नई दिल्ली: इस हफ्ते की शुरुआत में पटियाला में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रेल लाइन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने वाले एक आतंकी मॉड्यूल के सदस्य की तलाश में लगी पंजाब पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. राज्य के पुलिस प्रमुख गौरव यादव ने बुधवार को बताया कि पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार, उपकरण, विस्फोटक और हाई-एंड पिस्तौल बरामद किए हैं.
बरामद सामान में एक रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG), एक मेटल से बना इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस यानी IED (स्टिकी बम) जिसका वजन 2.296 किलो है, साथ में तीन डेटोनेटर जिनमें इलेक्ट्रिक वायर और बैटरी लगी है, दो पैकेट सिंथेटिक विस्फोटक RDX (कुल 1.456 किलो) और एक P-86 हैंड ग्रेनेड शामिल है.
पंजाब को देश के दूसरे हिस्सों से जोड़ने वाले इस फ्रेट कॉरिडोर पर हमला करने की नाकाम कोशिश में 2.5 फीट गहरा गड्ढा बन गया और हमलावर जगरोप सिंह का शरीर टुकड़ों में बिखर गया. पुलिस की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना सोमवार रात करीब 8:23 बजे पटियाला जिले के बठोनियां खुर्द गांव के पास राजपुरा-शंभू रेलवे ट्रैक पर हुई.
बरामदगी में तीन एडवांस Glock पिस्तौल और वायरलेस सेट भी शामिल हैं, जिन्हें अब मृत जगरोप सिंह उर्फ जुपा और उसके भाई सतनाम सिंह ने अपने गांव पंजवार में एक अस्तबल और कार में छुपाकर रखा था. ये सभी सामान सतनाम सिंह की निशानदेही पर मिले, जिसे मंगलवार को पटियाला ब्लास्ट के कुछ घंटों बाद गिरफ्तार किया गया था.
पटियाला की इस घटना से अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि राज्य में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को निशाना बनाने के हमलों का एक पैटर्न सामने आ रहा है. इससे पहले फतेहगढ़ साहिब जिले के सिरहिंद में भी इसी तरह की नाकाम तोड़फोड़ की कोशिश हुई थी.
यह राज्य 1,300 किलोमीटर से ज्यादा लंबे दो बड़े कॉरिडोर में से एक का बड़ा हिस्सा है, जो लुधियाना से बिहार के सोन नगर तक फैला हुआ है.
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में एक बड़ा सुधार है, जिसे इंडस्ट्री और व्यापार के लिए शुरू किया गया था, ताकि व्यस्त रूट्स पर यात्री और मालगाड़ी ट्रैफिक को अलग किया जा सके.
सोमवार की घटना के कुछ घंटों बाद ही पटियाला पुलिस ने दावा किया कि उन्होंने मानसा के रहने वाले प्रदीप सिंह खालसा के नेतृत्व वाले एक आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश किया है. बताया जा रहा है कि उसका संपर्क मलेशिया में बैठे सिख अलगाववादी आतंकियों से था और वह पाकिस्तान के हथियार सप्लायर्स के भी संपर्क में था.
जैसा कि पहले रिपोर्ट किया गया, डीजीपी यादव ने कहा कि यह मॉड्यूल मलेशिया में बैठे एक शख्स जुझार सिंह के नाम से चल रहे नेटवर्क से जुड़ा था. डीजीपी के मुताबिक, प्रदीप का संपर्क अमेरिका में रहने वाले सुरिंदर सिंह ठिकरीवाल और पाकिस्तान में मौजूद प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स के चीफ रणजीत सिंह नीता से भी था. ठिकरीवाल पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है और अमेरिका में रहता है, और पंजाब पुलिस ने उसे कई आतंकी मामलों में नामजद किया है.
पंजाब पुलिस के सूत्रों ने बताया कि इस मॉड्यूल के सदस्यों तक काफी फंडिंग पहुंचाई जा रही थी, लेकिन उनका काम मुख्य रूप से “कट्टरपंथी सोच” पर आधारित था.
उन्होंने बताया कि इस मॉड्यूल के खुलासे के साथ ही दो और मामले भी सुलझ गए हैं—सिरहिंद में फ्रेट कॉरिडोर रेलवे ट्रैक पर तोड़फोड़ की कोशिश और पिछले साल नवंबर में मोगा जिले में सेंट्रल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी (CIA) की सुविधा पर ग्रेनेड हमला. हालांकि डीजीपी यादव ने कहा कि जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि पहले के मामलों में जगरोप की असली भूमिका क्या थी.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जगरोप ने 2014 से 2022 के बीच आठ साल में कई बार मलेशिया और कुछ बार संयुक्त अरब अमीरात के दुबई की यात्रा की थी. उसकी यात्रा का पूरा रिकॉर्ड विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से जानकारी मिलने के बाद जांचा जाएगा.
इस मामले में अब तक गिरफ्तार चारों आरोपियों—सतनाम सिंह, प्रदीप सिंह, कुलविंदर सिंह और गुरप्रीत सिंह को सात दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: भारत के नए शहर अब हीटवेव हॉटस्पॉट बनते जा रहे हैं, और वे इसके लिए तैयार नहीं हैं