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Monday, 13 April, 2026
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कम वेतन, ओवरटाइम का पैसा नहीं—नोएडा में मजदूर क्यों कर रहे हैं विरोध

नोएडा सेक्टर-57 की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने वालीं 27 साल की महिला मजदूर, जिनकी सैलरी 10,275 रुपये महीना है, उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में उसकी तनख्वाह नहीं बढ़ी है.

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नोएडा: नोएडा के औद्योगिक इलाकों में मजदूर ज्यादा वेतन की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं. वे फैक्ट्रियों में लोहे की रॉड, क्रिकेट बैट, पत्थर और डंडे लेकर पहुंचे. सोमवार सुबह सैकड़ों मजदूर सेक्टर 57 में रेडिकल माइंड्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, सिग्निफाई और मारुति सुजुकी की फैक्ट्रियों में घुस गए और तोड़फोड़ की. एक कार में आग लगा दी गई और कई गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया, जिससे नोएडा के औद्योगिक इलाकों में भारी जाम लग गया.

पिछले तीन दिनों से चल रहे इस विरोध में सोमवार को सैकड़ों मजदूर फैक्ट्रियों में घुस गए और तोड़फोड़ की. उन्होंने वहां काम करने वाले कर्मचारियों से भी प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की.

सेक्टर-57 की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम करने वाले दीपक कुमार ने हाथ में डंडा लेकर कहा, “हमारी मांगें पूरी करो, नहीं तो सब कुछ तबाह कर देंगे.”

यह विरोध उस समय शुरू हुआ जब हरियाणा सरकार ने पिछले हफ्ते मानेसर में पुलिस और मजदूरों के बीच हुए टकराव के बाद सभी श्रेणियों के मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन में 35 प्रतिशत बढ़ोतरी कर दी.

पहले हरियाणा में अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल मजदूरों को 11,000 से 13,000 रुपये के बीच वेतन मिलता था. 35 प्रतिशत बढ़ोतरी के बाद अब उनका वेतन 15,000 से 17,000 रुपये के बीच हो गया है. जबकि उत्तर प्रदेश में मजदूरों की मौजूदा सैलरी अभी भी 11,000 से 13,000 रुपये के बीच है.

विरोध स्थल पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, जिसमें रैपिड एक्शन फोर्स के जवान भी शामिल हैं. सेक्टर 57 में प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के पहुंचने से पहले कई फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ की. मौके पर मौजूद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता स्थिति को नियंत्रण में लाना है. अधिकारी ने कहा, “हम सीसीटीवी फुटेज की जांच करेंगे और तोड़फोड़ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे.”

रेडिकल माइंड्स टेक्नोलॉजीज फैक्ट्री में प्रदर्शनकारियों ने बिल्डिंग की खिड़कियां तोड़ दीं. कंपनी के कर्मचारी कौशल कुमार ने बताया कि प्रदर्शनकारी सुबह आए और सभी से बाहर निकलने को कहा.

उन्होंने फैक्ट्री के बाहर कहा, “उनके हाथ में डंडे और रॉड थे. उन्होंने बिल्डिंग को नुकसान पहुंचाया.”

लंबे काम के घंटे, कम वेतन

27 साल की मोहिनी पाल ने बताया कि वह पिछले दो साल से सेक्टर 57 की एक एक्सपोर्ट कंपनी में काम कर रही हैं, लेकिन उनकी सैलरी नहीं बढ़ी है.

पाल ने कहा, “मैं महीने के 10,275 रुपये कमा रही हूं. फैक्ट्री मालिक हमारा शोषण कर रहे हैं. हम ओवरटाइम करते हैं, लेकिन उसका पैसा नहीं दिया जाता.” उन्होंने यह भी बताया कि मालिक वॉशरूम जाने के लिए ब्रेक लेने पर भी ताने मारता है.

पाल ने कहा कि कई सालों से बढ़ रही नाराजगी अब इन विरोध प्रदर्शनों में बदल गई है. उन्होंने कहा, “फैक्ट्री मालिकों को हमारी सैलरी बढ़ानी चाहिए और सिस्टम में जरूरी सुधार करने चाहिए.”

उन्होंने यह भी बताया कि अगर वे एक दिन की छुट्टी लेती हैं, तो उनकी सैलरी से 1,350 रुपये काट लिए जाते हैं.

रविवार को नोएडा की डीएम मेधा रूपम ने राज्य के प्रमुख सचिव (श्रम) और श्रम आयुक्त के साथ बैठक की थी.

रुपम ने एक्स पर पोस्ट में कहा, “इस बैठक में मजदूरों के हितों की सुरक्षा, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, बोनस, साप्ताहिक छुट्टी और कार्यस्थल की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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