नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (आईएएफ) और अमेरिका की बड़ी एविएशन कंपनी जीई ने एक समझौता किया है, जिसके तहत देश में ही F404-IN20 इंजनों के लिए एक डिपो सुविधा बनाई जाएगी. इसका मकसद तेजस एलसीए विमान के इंजन की मरम्मत और ओवरहॉल की व्यवस्था को मजबूत करना और उसकी उपलब्धता बढ़ाना है.
जीई के बयान के मुताबिक, यह डिपो सुविधा भारतीय वायु सेना की होगी, वही इसे चलाएगी और संभालेगी. जीई एयरोस्पेस इसमें तकनीकी जानकारी, ट्रेनिंग, सपोर्ट स्टाफ और जरूरी स्पेयर पार्ट्स व खास उपकरण उपलब्ध कराएगा.
जीई एयरोस्पेस में डिफेंस और सिस्टम्स के लिए सेल्स और बिजनेस डेवलपमेंट की वाइस प्रेसिडेंट रीटा फ्लेहर्टी ने कहा, “इस नई डिपो सुविधा के जरिए हम भारतीय वायु सेना के लिए F404-IN20 इंजनों की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे, ताकि उनकी रक्षा जरूरतों के लिए उन्हें आधुनिक तकनीक आसानी से मिल सके.”
सूत्रों के अनुसार, यह सुविधा शुरू होने के बाद विदेश के रिपेयर सेंटर पर निर्भर रहने की जरूरत खत्म हो जाएगी, जिससे काम जल्दी होगा. उन्होंने बताया कि अभी बड़े रिपेयर के लिए इंजन को उसके मूल देश भेजना पड़ता है, जिससे फाइटर विमानों की उपलब्धता कम हो जाती है. कई बार इंजन के जाने और वापस आने में कई महीने लग जाते हैं.
उन्होंने यह भी बताया कि आईएएफ के इंजीनियर और टेक्नीशियन को जीई F404-IN20 इंजन की मरम्मत के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी. जरूरी औजार और स्पेयर पार्ट्स पर्याप्त संख्या में रखे जाएंगे, ताकि काम जल्दी हो सके.
आईएएफ हर साल लगभग 200 एयरो इंजीनियर भर्ती करता है, जिन्हें बाद में ट्रेनिंग दी जाती है.
दिलचस्प बात यह है कि जीई तेजस इंजनों की सप्लाई को लेकर अपने कॉन्ट्रैक्ट से पीछे रह गया है. 2021 में हुए समझौते के तहत अब तक उसने सिर्फ छह इंजन ही दिए हैं.
उम्मीद है कि इस साल के बीच तक इंजन की डिलीवरी ठीक तरीके से होने लगेगी. HAL और IAF दोनों इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि GE कई बार अपनी समय-सीमा बदल चुका है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पिछले साल अपने अमेरिकी समकक्ष पीट हेगसेथ के साथ इंजन डिलीवरी का मुद्दा उठाया था.
दोनों पक्षों के बीच एक और अहम प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है, जिसमें GE और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर F414 इंजन बनाएंगे. ये इंजन तेजस MK-2 विमान और 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एमसीए के पहले बैच में इस्तेमाल होंगे. इस वित्त वर्ष के अंत तक इसका औपचारिक समझौता होने की उम्मीद है.
तेजस के अलावा, जीई एयरोस्पेस के इंजन भारतीय नौसेना के P-8I समुद्री निगरानी विमान और MH60R हेलिकॉप्टर, और भारतीय वायु सेना के AH-64 अपाचे हेलिकॉप्टर में भी इस्तेमाल होते हैं. वहीं LM2500 मरीन गैस टर्बाइन आईएनएस विक्रांत एयरक्राफ्ट कैरियर और P-17 शिवालिक क्लास फ्रिगेट्स को ताकत देते हैं.
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