नई दिल्ली: बिहार में आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों को अब बाजार से खरीदी गई पोशाक की जगह जीविका दीदियों द्वारा घरेलू स्तर पर सिली हुई पोशाक दी जा रही है. अब तक 10 लाख से अधिक पोशाक सेट वितरित किए जा चुके हैं. पूरे राज्य में 1000 से अधिक संकुल स्तर पर सिलाई कार्य चल रहा है.
इस पहल से हजारों ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिला है. करीब 1.5 लाख महिलाएं इस कार्य से जुड़ी हैं और उन्हें औसतन 10 हजार रुपये मासिक आय प्राप्त हो रही है. कई जिलों में सिलाई घर और प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किए गए हैं.
आंगनबाड़ी केंद्रों में लगभग 50 लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं. यह योजना बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोशाक उपलब्ध कराने के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को भी मजबूत कर रही है.
