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Thursday, 9 April, 2026
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ईरान युद्ध पर ट्रंप कैबिनेट बंटी, नेतन्याहू के ‘हॉकिश’ रुख को मिला समर्थन—NYT रिपोर्ट का दावा

NYT की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के सैन्य हमलों से पहले के हफ्तों में, व्हाइट हाउस 'ट्रंप द हॉक' (जो कार्रवाई के लिए उत्सुक थे) और 'वैंस द स्केप्टिक' (जो संशयवादी थे) के बीच बंटा हुआ था.

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नई दिल्ली: अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य हमले से पहले के हफ्तों में, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की वॉर कैबिनेट के अंदर इस कार्रवाई के जोखिम और फायदे को लेकर गहरा मतभेद था. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सख्त रुख के साथ खड़े थे.

रिपोर्ट में बताया गया कि व्हाइट हाउस में “ट्रंप द हॉक” (जो हमला करना चाहते थे) और “जेडी वेंस द स्केप्टिक” (जो इसके नतीजों को लेकर चेतावनी दे रहे थे) के बीच साफ बंटवारा था. इससे यह भी पता चलता है कि ट्रंप ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के सबसे बड़े फैसलों में से एक कैसे लिया.

यह जानकारी एक आने वाली किताब “रिजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसीडेंसी ऑफ़ डॉनल्ड ट्रंप” की रिपोर्टिंग पर आधारित है. इसमें बताया गया है कि न तो खुफिया एजेंसियां और न ही उपराष्ट्रपति इस फैसले के पक्ष में थे, और कई अन्य लोग भी इसके खिलाफ थे. लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही मन बना लिया था और वे नेतन्याहू के साथ खड़े थे.

“रिपोर्ट इस बात पर ज़ोर देती है कि कई महीनों तक, श्री ट्रंप की सख़्त सोच श्री नेतन्याहू की सोच से कितनी ज़्यादा मेल खाती थी—इतनी ज़्यादा कि राष्ट्रपति के कुछ खास सलाहकारों को भी इसका अंदाज़ा नहीं था. और यह दिखाती है कि आखिर में, श्री ट्रंप की वॉर कैबिनेट के ज़्यादा शक्की सदस्यों ने भी—सिर्फ़ श्री वैंस को छोड़कर, जो व्हाइट हाउस के अंदर पूरी तरह से युद्ध के सबसे बड़े विरोधी थे—राष्ट्रपति की सोच को ही माना; जिसमें उनका यह पक्का भरोसा भी शामिल था कि युद्ध जल्दी और निर्णायक होगा,” रिपोर्ट में यह बात कही गई है.

यह बहस 11 फरवरी को शुरू हुई, जब नेतन्याहू व्हाइट हाउस आए और सिचुएशन रूम में एक बेहद गोपनीय बैठक हुई. इस बैठक में चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, विदेश मंत्री मार्को रुबियो (जो राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी थे), रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन, और CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ मौजूद थे. ट्रंप के दामाद जैरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ भी इसमें शामिल थे, जो ईरान से बातचीत कर रहे थे.

जब बैठक में मौजूद लोगों ने नेतन्याहू से संभावित जोखिमों के बारे में पूछा, तो उन्होंने माना कि जोखिम हैं, लेकिन कहा कि कुछ न करने का खतरा ज्यादा है.

प्रेजेंटेशन में यह दिखाया गया कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम को कुछ ही हफ्तों में खत्म किया जा सकता है, सरकार इतनी कमजोर हो जाएगी कि वह होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद नहीं कर पाएगी, और अमेरिका के हितों पर हमले की संभावना बहुत कम होगी.

ट्रंप इस बात से सहमत दिखे और उन्होंने कहा, “मुझे तो यह सही लगता है.” लेकिन उनके सलाहकारों के बीच एक राय नहीं थी.

आंतरिक विभाजन

CIA डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस योजना के बड़े हिस्सों का विरोध किया और कहा कि शासन परिवर्तन (रेजीम चेंज) का विचार अवास्तविक है. रैटक्लिफ ने इसे “बकवास” कहा और रुबियो ने सीधे कहा, “यह बेकार है.”

उपराष्ट्रपति वेंस, जो उस समय अज़रबैजान में थे और बाद में पहुंचे, उन्होंने चेतावनी दी कि यह युद्ध बहुत महंगा होगा और क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अप्रत्याशित तरीके से जवाब दे सकता है.

जनरल डैन केन ने सैन्य क्षमता और जोखिमों का संतुलित आकलन दिया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बाधा की संभावना पर भी ध्यान दिलाया. लेकिन उन्होंने साफ तौर पर यह नहीं कहा कि हमला नहीं करना चाहिए.

युद्ध सचिव हेगसेथ हमले के स्पष्ट समर्थक थे; उनका तर्क था कि इसमें देरी करने से खतरा और बढ़ जाएगा. व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स, हालांकि आर्थिक और राजनीतिक नतीजों को लेकर चिंतित थीं, फिर भी उन्होंने राष्ट्रपति के फैसले को ही प्राथमिकता दी. व्हाइट हाउस के संचार कर्मचारियों—जिनमें डेविड वॉरिंगटन और स्टीवन च्युंग शामिल थे—ने नए संघर्षों से बचने के वर्षों पुराने वादों के बाद युद्ध छेड़ने से जुड़ी घरेलू राजनीतिक चुनौतियों को उजागर किया; लेकिन अंततः उन्होंने यह संकेत दिया कि ट्रंप जो भी फैसला लेंगे, वे उसका समर्थन करेंगे.

फरवरी के अंत तक स्थिति साफ थी. हेगसेथ और कुछ हद तक रुबियो ईरान की सैन्य ताकत खत्म करने पर ध्यान दे रहे थे. वेंस इसे “आपदा” मानते थे, लेकिन ट्रंप को जानते हुए सीमित हमले की तरफ झुक गए.

26 फरवरी को आखिरी बैठक में ट्रंप ने सभी की राय मांगी. वेंस ने फिर विरोध किया लेकिन कहा कि अगर फैसला होगा तो वे साथ देंगे. वाइल्स ने भी यही कहा. रैटक्लिफ और रुबियो ने सिर्फ व्यावहारिक लक्ष्यों की बात की, जैसे मिसाइल प्रोग्राम खत्म करना. जनरल केन ने सैन्य योजना और जोखिम बताए.

सबकी बात सुनने के बाद ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है हमें यह करना चाहिए.” 27 फरवरी को, जनरल केन की तय समय सीमा से 22 मिनट पहले, उन्होंने “एपिक फ्यूरी” नाम के ऑपरेशन को मंजूरी दे दी.

8 अप्रैल को, कई बार ईरान को “पूरी तरह खत्म करने” की धमकी देने के बाद, ट्रंप ने दो हफ्तों के लिए बमबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने की घोषणा की, शर्त यह थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ तुरंत खोला जाए. ईरान ने इसे “ऐतिहासिक जीत” बताया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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