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Saturday, 28 March, 2026
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पश्चिम एशिया संघर्ष से पाकिस्तान की सत्ता संरचना पर आसिम मुनीर की पकड़ मजबूत

पाकिस्तान के कुछ सेना-विरोधी नागरिक, जो पहले इमरान खान के साथ हुए व्यवहार को लेकर सेना से नाराज़ थे, अब एक राय पर पहुंच गए हैं—आसिम मुनीर ने पाकिस्तान को वैश्विक खिलाड़ी बना दिया है.

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अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बदलते बयानों और ईरान द्वारा किसी भी शांति वार्ता को खुले तौर पर ठुकराने के बीच जब पश्चिम एशिया का संघर्ष चौथे हफ्ते में पहुंचा, तो एक नया नाम उभरकर सामने आया—फील्ड मार्शल आसिम मुनीर. पाकिस्तान और उसकी मध्यस्थता को लेकर अटकलें सुर्खियों में रहीं. कुछ प्रमुख पाकिस्तानी कॉलम लेखकों ने उनके “लगातार बढ़ते कद” की तारीफ भी की.

मुनीर और उनकी वैश्विक छवि को पश्चिमी मीडिया में दिखाया गया. पाकिस्तान का सबसे ताकतवर व्यक्ति तेहरान और ट्रंप दोनों से संबंध रखता है. उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति का “पसंदीदा फील्ड मार्शल” कहा जा रहा है. पश्चिम एशिया संघर्ष में पाकिस्तान का शांति मध्यस्थ के रूप में उभरना उसकी छवि को एक जिम्मेदार क्षेत्रीय खिलाड़ी के रूप में दिखाने की कोशिश है.

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री ने पड़ोसी देश की भूमिका को खारिज कर दिया है, लेकिन नई दिल्ली फील्ड मार्शल के कदमों पर नज़र बनाए रखेगा. यही वजह है कि आसिम मुनीर दिप्रिंट के न्यूज़मेकर ऑफ द वीक हैं.

एक राय

यह कोई पक्के तौर पर नहीं जानता कि क्या पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की—यहां तक कि देश के विदेश मामलों के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी को भी नहीं पता. गुरुवार को इस्लामाबाद में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान ने अमेरिका का कोई शांति प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऐसा कोई प्रस्ताव दिया गया था या नहीं, चाहे वह सीधे दिया गया हो या डिजिटल तरीके से.

लेकिन इतना ज़रूर कहा जा रहा है कि आसिम मुनीर ने, उनके समर्थकों के अनुसार, एक और उपलब्धि हासिल कर ली है और एक बार फिर नागरिक सरकार पर अपना दबदबा साबित कर दिया है. कुछ सेना-विरोधी नागरिक, जो पहले अपने पसंदीदा क्रिकेटर इमरान खान के साथ हुए व्यवहार को लेकर सेना से नाराज़ थे, अब एक राय पर पहुंच गए हैं—सेना प्रमुख ने पाकिस्तान को वैश्विक खिलाड़ी बना दिया है. वे कन्फर्मेशन बायस की परवाह नहीं करते. “आसिम मुनीर के लगातार बढ़ते कद” और यहां तक कि नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकन की भी चर्चा हो रही है.

कई मीडिया खबरों में कहा गया कि पाकिस्तान की सेना और नागरिक सरकार ने इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत कराने की इच्छा जताई. वहीं एक्स पर कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि ट्रंप के पश्चिम एशिया दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर इस्लामाबाद पहुंचे. बाद में यह खबर फर्ज़ी निकली.

पाकिस्तान की सत्ता संरचना के शीर्ष पर किसी सैन्य शासक का पहुंचना नया नहीं है. मुनीर के मामले में फर्क यह है कि यह केवल सैन्य ढांचे के भीतर बदलाव नहीं है, बल्कि देश की वैश्विक और राजनीतिक व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव है.

पठान, हाफिज़-ए-कुरान और बदलता पाकिस्तान

2024 के चुनाव, जिन पर गड़बड़ी के आरोप लगे थे और इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद, पाकिस्तान की गठबंधन सरकार को कमजोर और सेना पर निर्भर माना गया.

इसी बदलते माहौल में जनरल मुनीर ने अपनी स्थिति मजबूत की.

पिछले साल नवंबर में पाकिस्तान की संसद ने 27वां संवैधानिक संशोधन बिल पास किया—एक साल में दूसरा संशोधन जिसे बहुत तेज़ी से पारित किया गया. विपक्षी नेताओं और विश्लेषकों ने इसकी आलोचना करते हुए इसे “संवैधानिक तख्तापलट” बताया.

इस संशोधन को फील्ड मार्शल मुनीर के हाथों में सत्ता मजबूत करने वाला कदम माना गया. पहले से ही पाकिस्तान के सबसे प्रभावशाली व्यक्ति, अब उनके पास केवल सेना ही नहीं बल्कि नौसेना और वायुसेना पर भी अधिकार है. उनका पांच साल का कार्यकाल प्रभावी रूप से फिर से शुरू हो गया है और इसे आगे बढ़ाने की भी संभावना है, जिससे उनका कार्यकाल असामान्य रूप से लंबा हो सकता है. इस कदम से उन्हें आपराधिक मुकदमों से आजीवन छूट भी मिलती है.

इसी दौरान पाकिस्तान की एकमात्र स्वतंत्र शाखा, न्यायपालिका की शक्तियां भी कम कर दी गईं. सरकार द्वारा नियुक्त जजों के साथ एक नया संवैधानिक कोर्ट बनाया गया, जिसने सुप्रीम कोर्ट की जगह ले ली. विरोध में कई वरिष्ठ जजों ने इस्तीफा दे दिया. इसी बीच मुनीर के उभार के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रियता भी बढ़ी, खासकर अमेरिका के साथ.

इसके बाद सऊदी-पाकिस्तान रक्षा समझौता हुआ, जिसकी देश के अंदर काफी सराहना हुई. इसके बाद पश्चिमी मीडिया में कई अन्य रक्षा समझौतों की खबरें आईं. हालांकि, बाद में इन खबरों को गलत बताया गया और ज्यादातर समझौते आगे नहीं बढ़े.

कुछ समय तक अलग-थलग रहने के बाद, आसिम मुनीर ने वैश्विक नेताओं से संपर्क बढ़ाया है, जिसमें वाशिंगटन में डॉनल्ड ट्रंप से मुलाकात और अब ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़रायल की कार्रवाई में मध्यस्थ की भूमिका शामिल बताई जा रही है.

पुराने तरीके, नया व्यक्ति

पाकिस्तान का इतिहास लंबे समय से सेना के हस्तक्षेप और नागरिक शासन के बीच चलता रहा है. मुनीर अलग हैं. एक हाफिज़-ए-कुरान होने के कारण वे अपने भाषणों में धार्मिक बातों पर जोर देते हैं और पाकिस्तान को मुस्लिम दुनिया का चमकता सितारा बताते हैं, जो अपने करीबी सहयोगी सऊदी के बाद दूसरे स्थान पर है. वे बार-बार प्रवासी पाकिस्तानियों से कहते हैं कि पाकिस्तान एक डंप ट्रक है जिसका एक ही लक्ष्य है—चमकती हुई मर्सिडीज, यानी भारत, पर कंकड़ डालना. यही ज्यादातर पाकिस्तानी जनरलों की सोच रही है.

मुनीर का कार्यकाल एक अधिक केंद्रीकृत मॉडल की वापसी जैसा दिखता है, जिसमें सेना केवल प्रभाव नहीं डालती बल्कि सीधे राजनीतिक नतीजे तय करती है. पाकिस्तान के पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ ने भी ऐसी ही रणनीति अपनाई थी, लेकिन व्यापक विरोध के बाद उन्हें सत्ता छोड़नी पड़ी थी.

अब देखना यह है कि क्या मुनीर भी मुशर्रफ की राह पर चलते हैं या जीवन भर वर्दी में बने रहते है—एक सुरक्षा जो उन्होंने राज्य के सभी तंत्रों में बदलाव करके खुद को दी है.

मीडिया, तंत्र और सेना—सब मुनीर के नियंत्रण में बताए जा रहे हैं. जैसा कि पाकिस्तानी लेखक मोहम्मद हनीफ ने अपने खास अंदाज़ में कहा, “अक्सर जब तानाशाह इस तरह व्यवहार करते हैं, तो पाकिस्तान का भूगोल बदल जाता है और जनरलों को अपनी जान बचाकर भागना पड़ता है.”

(इस न्यूज़मेकर को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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