गोरखपुर: गोरखपुर के दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय में 26 देशों के 180 प्रतिनिधि दो-दिवसीय ‘वैश्विक कृत्रिम बौद्धिकता सम्मेलन 2026’ में शामिल हुए और एआई की व्यापक संभावनाओं पर मंथन किया. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी.
एक आधिकारिक बयान के अनुसार इस कार्यक्रम का आयोजन ‘मेटा’ और विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से शुक्रवार को किया गया.
उद्घाटन के मौके पर उद्यान, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने एआई से होने वाले ‘‘ज्ञान-मंथन’’ की तुलना प्राचीन ‘‘समुद्र मंथन’’ से की.
सिंह ने शोधकर्ताओं से नैतिक मूल्यों तथा वैश्विक कल्याण को प्राथमिकता देने का आग्रह किया.
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने इस बात पर जोर दिया कि एआई को, विशेष रूप से कृषि व चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में हमेशा एक मानवीय सहायक के रूप में ही कार्य करना चाहिए.
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री आशीष चौहान ने ‘डेटा संप्रभुता’ को लेकर चिंता व्यक्त की और वैश्विक एकाधिकार को रोकने के लिए स्वदेशी एआई मॉडल के निर्माण का आह्वान किया.
कुलपति प्रो. पूनम टंडन की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन, एआई नवाचार और इसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर आगे भी विचार-विमर्श जारी रखेगा.
