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Saturday, 21 March, 2026
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ईरान के मोजतबा खामेनेई ने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की पेशकश की

ईद संदेश में खामेनेई ने तुर्किये और ओमान पर हमलों में ईरान की भूमिका से इनकार किया और कहा कि मतभेद पैदा करने के लिए ‘जायनिस्ट धोखे’ का इस्तेमाल किया गया.

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नई दिल्ली: ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने अपने ईद संदेश में कहा कि तुर्किये और ओमान पर हुए हमलों में उनके देश की कोई भूमिका नहीं थी और पाकिस्तान व अफगानिस्तान के बीच रिश्ते मजबूत करने की अपील की.

खामेनेई ने कहा, “मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि तुर्किये और ओमान पर हुए हमले इस्लामिक रिपब्लिक की सशस्त्र सेनाओं द्वारा बिल्कुल भी नहीं किए गए.”

उन्होंने इन हमलों को “जायनिस्ट दुश्मन की चाल” बताया, जिसमें मतभेद पैदा करने के लिए “फॉल्स फ्लैग” रणनीति का इस्तेमाल किया गया. इसी संबोधन में उन्होंने अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच क्षेत्रीय एकता के महत्व पर जोर दिया.

उन्होंने कहा, “मैं लंबे समय से पाकिस्तान को ऐसा देश मानता रहा हूं, जिसे हमारे मरहूम नेता बहुत पसंद करते थे. यह भावना उस समय साफ दिखती थी, जब शुक्रवार की नमाज के भाषण में वहां आई विनाशकारी बाढ़ से हमारे धार्मिक भाइयों की जान को खतरे पर वे भावुक हो गए थे.”

उन्होंने कहा, “कई कारणों से मैं खुद भी हमेशा यही सोच रखता रहा हूं और विभिन्न बैठकों में इसे व्यक्त करता रहा हूं. यहां मैं हमारे दो भाईचारे वाले देशों, अफगानिस्तान और पाकिस्तान, से अपील करना चाहता हूं कि वे आपस में बेहतर संबंध बनाएं—कम से कम ईश्वर की खुशी के लिए और मुसलमानों के बीच विभाजन से बचने के लिए और अपनी ओर से मैं ज़रूरी कदम उठाने के लिए तैयार हूं.”

खामेनेई ने यह भी कहा कि पड़ोसी देशों के साथ ईरान के रिश्ते साझा धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित हैं.

उन्होंने कहा, “हम इस्लाम धर्म के प्रति अपनी साझा आस्था को पहचानते हैं” साथ ही “साझा रणनीतिक हित, खासकर अहंकार के मोर्चे का सामना करने में” क्षेत्रीय संबंधों को मजबूत कर सकते हैं.

ये बयान ऐसे समय आए हैं जब पाकिस्तान अपनी रणनीतिक साझेदारियों में बदलाव करता नज़र आ रहा है.

गुरुवार को इस्लामाबाद खाड़ी क्षेत्र में ईरान की जवाबी कार्रवाई की निंदा करने वाले अरब और इस्लामिक देशों के एक समूह में शामिल हो गया. इस बयान में तेहरान से “हमले रोकने” की अपील की गई और कहा गया कि भविष्य के रिश्ते संप्रभुता के सम्मान और हस्तक्षेप न करने पर निर्भर करेंगे. इस बयान का समर्थन सऊदी अरब, कतर, यूएई, मिस्र, तुर्किये और अजरबैजान सहित कई देशों ने किया.

पाकिस्तान के ऐतिहासिक रूप से ईरान के साथ संबंध रहे हैं, लेकिन हाल के समय में वह खाड़ी के अरब देशों, खासकर सऊदी अरब, के और करीब आया है, जिसके साथ उसने पिछले साल आपसी रणनीतिक रक्षा समझौता किया था.

यह बदलाव अजरबैजान और तुर्किये के साथ पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकी से भी मजबूत हुआ है, जिससे रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने वाली त्रिपक्षीय साझेदारी बनी है. यह ढांचा 2020 के कराबाख युद्ध के बाद उभरा और बाद के समझौतों से और मजबूत हुआ, जो एक बड़े रणनीतिक बदलाव को दिखाता है, जिसमें पाकिस्तान धीरे-धीरे खाड़ी-केंद्रित रणनीतिक समूह का हिस्सा बनता जा रहा है.

पाकिस्तानी नेताओं के सार्वजनिक बयान भी इसी दिशा को दिखाते हैं. प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने हाल ही में अजरबैजान के साथ एकजुटता दोहराई और बातचीत के जरिए तनाव कम करने की अपील की, जबकि फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने शिया समुदाय से कहा कि “अगर वे उस देश से इतना प्यार करते हैं तो ईरान चले जाएं.”

साथ ही, पाकिस्तान ने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की भी कोशिश की है. उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने पहले ईरान पर हमलों को “अनुचित” बताया था और बातचीत पर लौटने की अपील की थी.

इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान को देश के समर्थन के लिए धन्यवाद दिया था और अफगानिस्तान के लिए ट्वीट करते हुए उम्मीद जताई थी कि “अफगानिस्तान में भी शांति और स्थिरता बनी रहे.”

2021 में काबुल के पतन और तालिबान की वापसी के बाद ईरान ने एक व्यावहारिक संबंध बनाए रखा है, जबकि शुरुआत में उसने इस समूह का समर्थन नहीं किया था. 2001 में तेहरान ने नॉर्दर्न अलायंस का समर्थन किया था. ईरान आधिकारिक रूप से तालिबान को मान्यता नहीं देता, लेकिन उसने कूटनीतिक संबंध बनाए रखे हैं और आर्थिक संबंध भी बढ़ाए हैं.

पिछले साल सितंबर में ईरान के उद्योग, खनन और व्यापार मंत्री सैयद मोहम्मद अताबक के नेतृत्व में एक वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल व्यापार वार्ता के लिए अफगानिस्तान गया था. इसका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को 10 अरब डॉलर तक बढ़ाना और खाफ-हेरात रेलवे का विकास करना था, साथ ही चाबहार पोर्ट के ज्यादा इस्तेमाल की योजना थी, जिससे काबुल को पाकिस्तान को बायपास करने का विकल्प मिल सकता है.

तीन महीने बाद अराघची ने कहा कि अफगानिस्तान में स्थिरता पूरे क्षेत्र के लिए रणनीतिक रूप से जरूरी है और जोर दिया कि ईरान की सुरक्षा “सीधे तौर पर सभी पड़ोसी देशों के हितों से जुड़ी है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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