लखनऊ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय वन दिवस के मौके पर राष्ट्रीय वानिकी संवाद के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने देश में जंगलों के महत्व और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया.
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने भारत की प्राचीन परंपरा और वैदिक काल की सीख का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इंसान ने जब-जब प्रकृति से छेड़छाड़ की है, तब-तब उसे उसके परिणाम भुगतने पड़े हैं.
उन्होंने कहा, “भारत की वैदिक परंपरा से लेकर आज दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों तक, हर व्यक्ति ने प्रकृति से छेड़छाड़ के परिणाम भुगते हैं. ग्लोबल वार्मिंग और ग्लोबल कूलिंग जैसी समस्याएं हमें नई चेतावनी दे रही हैं.”
योगी आदित्यनाथ ने प्राकृतिक संसाधनों के आपसी संबंध और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की जरूरत पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा, “एक बावड़ी दस कुओं के बराबर होती है, दस बावड़ियां एक तालाब के बराबर होती हैं, दस तालाब एक पुत्र के बराबर होते हैं और दस पुत्र एक पेड़ के बराबर होते हैं. प्रकृति में पेड़ का महत्व सर्वोपरि माना गया है. इसलिए हम सभी जानते हैं कि जंगल जीवन की नींव हैं और प्रकृति के संतुलन का अहम आधार हैं.”
मुख्यमंत्री ने जंगल, पानी, हवा और जीवन के गहरे संबंध को समझाते हुए नागरिकों से प्रकृति का सम्मान और संरक्षण करने की अपील की.
उन्होंने कहा, “अगर जंगल हैं तो पानी है, अगर पानी और जंगल हैं तो हवा है और अगर हवा है तो जीवन है. यानी इनके बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती.”
उन्होंने भारत की ऋषि परंपरा का जिक्र करते हुए पर्यावरण के प्रति इंसानों की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया.
उन्होंने कहा, “धरती हमारी माता है और हम सभी उसके पुत्र हैं. हर पुत्र की अपनी मां के प्रति क्या जिम्मेदारी होती है? यह कि वह अपनी मां के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ न करे, बल्कि उसका सम्मान और संरक्षण करे.”
मुख्यमंत्री ने सभी नागरिकों से अपने स्तर पर यह सोचने की अपील की कि कहीं न कहीं प्रकृति के प्रति हमारी कोशिशों में कमी रह गई है. उन्होंने कहा कि जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण जीवन और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है.
