नई दिल्ली: पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने गुरुवार को शिया मौलवियों से कहा कि जिन्हें “ईरान से इतना प्यार है” वे वहां जा सरकते हैं. समुदाय के नेताओं ने इस बयान को अपमानजनक और भड़काऊ बताया. यह बयान ऐसे समय आया है जब इस्लामाबाद रणनीतिक रूप से अरब खाड़ी देशों की ओर झुकाव दिखा रहा है.
मुनीर ने रावलपिंडी में इफ्तार कार्यक्रम के दौरान मौलवियों से कहा, “अगर आपको ईरान से इतना प्यार है, तो ईरान चले जाइए.”
यह बयान तब आया जब मौलवियों ने मुनीर की उस चेतावनी का ज़िक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि “किसी दूसरे देश में हुई घटनाओं के आधार पर पाकिस्तान में हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी”. मौलवियों ने कहा कि मुनीर की टिप्पणी से ऐसा लगा कि अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पाकिस्तान में हुए विरोध प्रदर्शन के लिए शिया समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है.
सेना प्रमुख की यह टिप्पणी उसी दिन आई जब पाकिस्तान ने अरब और इस्लामी देशों के एक समूह के साथ मिलकर खाड़ी क्षेत्र में ईरान के जवाबी हमलों की निंदा की—यह कदम क्षेत्र में पाकिस्तान की बदलती रणनीति को दिखाता है.
बैठक में मौजूद शिया नेताओं ने बाद में सार्वजनिक रूप से कहा कि मुनीर ने गिलगित-बाल्टिस्तान में अशांति को सीधे शिया नेतृत्व के प्रभाव से जोड़ा और कुछ लोगों द्वारा की गई हिंसा के लिए पूरे समुदाय को जिम्मेदार ठहराया. समुदाय के नेताओं ने कहा कि इस तरह की बात अपमानजनक है और ऐतिहासिक रूप से भी सही नहीं है.
शिया मौलवी मोहम्मद शिफा नजफी ने कहा कि उन्होंने सेना प्रमुख की इस बात का विरोध किया. उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल पर वीडियो बयान में कहा, “इन घटनाओं के लिए सभी शियाओं को जिम्मेदार न माना जाए.”
उन्होंने आगे कहा, “सबको एक ही समूह में रखना सही नहीं है.”
नजफी ने बैठक का विस्तार से ज़िक्र करते हुए कहा, “पाकिस्तान सेना में भी शिया हैं. देश की स्थापना कायदे-आजम (जिन्ना) ने की थी, जो खुद शिया थे. हालांकि, मेरी बात के बाद उनके लहज़े में थोड़ा बदलाव आया और उन्होंने कहा कि ‘अगर आपको ईरान से इतना प्यार है, तो आपको ईरान चले जाना चाहिए. दरवाजे खुले हैं’. मैं यह इसलिए बता रहा हूं क्योंकि वहां करीब एक दर्जन जनरल और विद्वान बैठे थे. किसी से कुछ छिपा नहीं है.”
सेना की आधिकारिक जानकारी में इस बैठक को अलग अंदाज़ में बताया गया. उसमें कहा गया कि मुनीर ने धार्मिक नेताओं से राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने और सांप्रदायिक विभाजन व बाहरी हस्तक्षेप से बचने की अपील की.
पाकिस्तान, ईरान के बाद, शिया आबादी वाला दूसरा सबसे बड़ा देश है. हालांकि, शिया समुदाय अल्पसंख्यक है, लेकिन माना जाता है कि वे देश की आबादी का करीब 15 प्रतिशत हैं.
जिस अशांति का ज़िक्र मुनीर ने किया, वह मार्च में शुरू हुई थी, जब खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में प्रदर्शन शुरू हो गए.
कराची में प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर हमला कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी मरीन को गोली चलानी पड़ी. इस घटना में कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई.
इस्लामाबाद में पुलिस ने डिप्लोमैटिक एन्क्लेव की ओर मार्च कर रही भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया.
स्कार्दू में प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के एक दफ्तर की इमारत में आग लगा दी. स्थानीय अधिकारियों के अनुसार गिलगित-बाल्टिस्तान में भी कई लोगों की मौत हुई.
मुनीर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पाकिस्तान की क्षेत्रीय रणनीति में बदलाव दिख रहा है. इस्लामाबाद लंबे समय से ईरान और खाड़ी देशों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है, लेकिन हाल के महीनों में वह सऊदी अरब और उसके सहयोगियों के ज्यादा करीब आ गया है, जिसमें आपसी रक्षा समझौता भी शामिल है. साथ ही तुर्किये और अजरबैजान के साथ भी संबंध मजबूत किए हैं, जो खाड़ी केंद्रित रणनीतिक दिशा को दिखाता है.
यह बदलाव अंदरूनी विरोधाभासों से खाली नहीं है. एक तरफ पाकिस्तान ने गुरुवार को ईरान की निंदा में हिस्सा लिया, वहीं दूसरी तरफ उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने अलग से ईरान पर हुए हमलों को “अनुचित” बताया और तुरंत बातचीत शुरू करने की मांग की.
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