नई दिल्ली: भारत ने गुरुवार को माना कि लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी की सप्लाई चिंता का विषय है. यह बयान उस समय आया जब इज़राइल और ईरान ने पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचे पर हमले किए, जिससे युद्ध में बड़ा तनाव बढ़ गया है.
विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “ऊर्जा की सप्लाई चिंता का विषय रही है. भारत में एलपीजी खास चिंता का विषय है. हम पहले घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे रहे हैं और उसके बाद देखेंगे कि कमर्शियल संस्थानों को कैसे सप्लाई दी जाए. हम अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने पर काम कर रहे हैं.”
जयसवाल ने आगे कहा कि भारत एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई के लिए रूस सहित कई स्रोतों पर नजर रख रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष लगभग 3 हफ्तों से जारी है. भारत ने अब तक कई इंटर-मिनिस्ट्री प्रेस ब्रीफिंग में कहा है कि ऊर्जा सामान, खासकर एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई में चुनौतियां हैं.
रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को एलपीजी सिलेंडर की मांग 56 लाख तक पहुंच गई, जबकि सप्लाई लगभग उतनी ही रही और 55 लाख तक पहुंची. हालांकि जयसवाल के बयान से संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा ढांचे पर हालिया हमलों से भारत की सप्लाई में और दिक्कतें आ रही हैं.
बुधवार को इज़राइल ने ईरान के साउथ पार्स नेचुरल गैस फील्ड पर हमला किया. साउथ पार्स ईरान का सबसे बड़ा नेचुरल गैस उत्पादन केंद्र है. जवाब में ईरान ने क्षेत्र के देशों से कहा कि वे ऊर्जा स्थलों से अपने कर्मचारियों को हटा लें और बाद में कतर के रास लफान साइट पर हमला किया. संयुक्त अरब अमीरात ने भी बताया कि उसके हबशन फील्ड पर बुधवार देर शाम ईरान ने हमला किया.
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने बुधवार देर रात इज़राइल के हमले से अमेरिकी सरकार को अलग बताया और कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. उन्होंने ईरान से अपील की कि वह क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना बंद करे.
भारत ने क्षेत्र में ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाने को रोकने की अपील की, जो उसके रुख में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, हालांकि गुरुवार को जायसवाल के बयान में किसी एक देश का नाम नहीं लिया गया.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से लेता है, जो अब युद्ध के कारण प्रभावित हुआ है. पिछले दो हफ्तों में रूस से कच्चे तेल की खरीद बढ़ी है, और भारत कमी को पूरा करने के लिए ज्यादा से ज्यादा देशों से एलपीजी और एलएनजी खरीदने को तैयार है.
देश भर में रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल संस्थानों ने एलपीजी का इस्तेमाल कम करना शुरू कर दिया है, क्योंकि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है.
जयसवाल ने कहा कि एलपीजी से भरे दो जहाजों के भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने से सप्लाई की कुछ दिक्कतें कम होंगी. इन जहाजों को इस हफ्ते की शुरुआत में भारत और ईरान के बीच तेज बातचीत के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की अनुमति दी गई थी.
तेहरान ने कहा है कि संघर्ष के दौरान होर्मुज बंद रहेगा, जिससे ऊर्जा की सप्लाई और प्रभावित होगी. यह स्ट्रेट दुनिया की लगभग एक चौथाई ऊर्जा सप्लाई के लिए जिम्मेदार है.
युद्ध शुरू होने के बाद से ऊर्जा से जुड़े सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. कच्चे तेल के लिए ब्रेंट फ्यूचर्स बेंचमार्क पिछले दो हफ्तों में लगभग 50 प्रतिशत बढ़ा है और गुरुवार सुबह थोड़े समय के लिए 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, यह बढ़ोतरी बुधवार शाम इजराइल और ईरान के हमलों के बाद हुई. इसके बाद कीमत में थोड़ी गिरावट आई है, लेकिन यह अब भी पिछले दिन से ज्यादा है.
ईरान के ऊर्जा ढांचे पर इज़राइल के हमलों को अमेरिका के भीतर कुछ विरोध का सामना करना पड़ा है. तेल अवीव ने पहले तेहरान के आसपास के तेल क्षेत्रों पर हमला किया था, जिसकी अमेरिका ने आलोचना की थी.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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