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Thursday, 19 March, 2026
होमविदेशकीव ने भारत में 6 यूक्रेनियनों के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई

कीव ने भारत में 6 यूक्रेनियनों के खिलाफ आतंकवाद के आरोपों पर ‘गंभीर चिंता’ जताई

NIA द्वारा 13 मार्च को गिरफ़्तार किए गए छह यूक्रेनी नागरिकों को भारतीय अधिकारियों द्वारा अभी तक कांसुलर एक्सेस नहीं दिया गया है. दिल्ली स्थित यूक्रेनी दूतावास का कहना है कि वह चल रही जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है.

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नई दिल्ली: भारत में यूक्रेन दूतावास ने गुरुवार को कहा कि उसके छह नागरिकों की गिरफ्तारी और भारत के आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत उन पर लगाए गए आरोपों की जांच को लेकर उसे “गंभीर चिंता” है. दूतावास का कहना है कि यह मामला “संभवतः सुनियोजित” और “राजनीतिक रूप से प्रेरित” हो सकता है. अपने इस आरोप के समर्थन में उसने मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला दिया, जिनमें कहा गया है कि इन गिरफ्तारियों के पीछे रूसी खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी थी.

हालांकि कीव के राजनयिक मिशन ने यह भी दोहराया कि वह भारतीय अधिकारियों के साथ सहयोग करने को तैयार है. उसने अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की द्वारा जारी संयुक्त बयान का उल्लेख किया, जिसमें आतंकवाद से मिलकर लड़ने की बात कही गई थी.

दूतावास ने अपने बयान में कहा, “भारत में यूक्रेन के छह नागरिकों की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी, खासकर उन मीडिया रिपोर्टों को देखते हुए जिनमें कहा गया है कि यह कार्रवाई रूसी पक्ष से मिली जानकारी के आधार पर शुरू हुई, भारत में यूक्रेन दूतावास इस मामले में मौजूद उन परिस्थितियों पर गंभीर चिंता जताता है जो यह संकेत देती हैं कि यह मामला संभवतः सुनियोजित और राजनीतिक रूप से प्रेरित हो सकता है. खासकर इस चरण पर सामने आए तथ्यों से ऐसा लगता है.”

बयान में आगे कहा गया, “यूक्रेन इस तरह के किसी भी संकेत को पूरी तरह खारिज करता है कि यूक्रेनी राज्य किसी भी तरह आतंकवादी गतिविधियों के समर्थन में शामिल हो सकता है. यूक्रेन एक ऐसा देश है जो हर दिन रूसी आतंक के असर को झेल रहा है और इसी कारण आतंकवाद के हर रूप के खिलाफ उसका रुख सिद्धांत आधारित और बिना किसी समझौते वाला है.”

दूतावास ने यह भी कहा कि आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े किसी भी आरोप को केवल उपलब्ध तथ्यों, पारदर्शी प्रक्रिया और दोनों सरकारों के बीच पूर्ण सहयोग के आधार पर ही देखा जाना चाहिए.

13 मार्च को भारत की नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी यानी एनआईए द्वारा छह यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद पूर्वी यूरोप के इस देश की तरफ से यह दूसरा बयान है. मामले से जुड़े एक व्यक्ति ने दिप्रिंट को बताया कि यूक्रेनी दूतावास को अभी तक एनआईए की हिरासत में मौजूद अपने नागरिकों से वाणिज्य दूतावास की पहुंच नहीं मिली है, जबकि उसने इस हफ्ते की शुरुआत में अलग बयान जारी कर इसकी मांग की थी.

इसी मामले में एक अमेरिकी नागरिक को भी एनआईए ने गिरफ्तार किया है. सभी सात विदेशी नागरिकों पर भारत के कड़े गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामला दर्ज किया गया है. खास तौर पर धारा 18 लगाई गई है, जिसमें आतंकवादी कार्रवाई करने या उसमें मदद करने की साजिश का आरोप शामिल है.

एनआईए ने सोमवार को नई दिल्ली की एक अदालत को बताया कि ये सात विदेशी नागरिक जरूरी परमिट के बिना मिजोरम में दाखिल हुए और फिर कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से म्यांमार गए, जहां उन्होंने उन जातीय सशस्त्र संगठनों को प्रशिक्षण दिया जो भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों का समर्थन करते हैं.

दिप्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार एनआईए ने अदालत को बताया कि इन सातों ने ड्रोन युद्ध, ऐसे प्लेटफॉर्म तैयार करने और जैमिंग तकनीक पर आधारित प्रशिक्षण दिया.

मैथ्यू एरॉन वैनडाइक एकमात्र ऐसे अमेरिकी नागरिक हैं जिन्हें भारत की जांच एजेंसी ने हिरासत में लिया है. छह यूक्रेनी नागरिकों की पहचान हुरबा पेट्रो, स्लीव्याक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होनचारुक माक्सिम और कामिंस्की विक्टर के रूप में हुई है.

इन सातों विदेशियों को आगे 11 दिन के लिए एनआईए की हिरासत में भेजा गया है और अब वे 27 मार्च तक हिरासत में रहेंगे.

यूक्रेन इससे पहले भी अपने नागरिकों की गिरफ्तारी पर आपत्ति जता चुका है. उसने “बिना रुकावट” वाणिज्य दूतावास पहुंच की मांग की थी और नई दिल्ली के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराया था.

यूक्रेनी दूतावास के ताजा बयान में कहा गया, “हम यूक्रेन और भारत की संबंधित एजेंसियों के बीच सक्रिय सहयोग के लिए सिद्धांत आधारित तैयारियां जताते हैं, खासकर आपराधिक मामलों में पारस्परिक कानूनी सहायता से जुड़े द्विपक्षीय समझौते के आधार पर, जो दोनों पक्षों की केंद्रीय एजेंसियों के जरिए अधिकतम कानूनी सहयोग और समन्वय की व्यवस्था देता है.”

बयान में आगे कहा गया, “हम यह भी जोर देकर कहते हैं कि यूक्रेन की किसी भी ऐसी गतिविधि में कोई रुचि नहीं है जिससे भारत की सुरक्षा को खतरा हो. इसके उलट यूक्रेन भारत जैसे प्रभावशाली और मित्र देश के साथ सुरक्षा, भरोसे और सहयोग को मजबूत करने की लगातार वकालत करता है. इसके बजाय रूस, जो एक आक्रामक राज्य है, हर परिस्थिति में यूक्रेन और भारत जैसे मित्र देशों के बीच दूरी पैदा करने की कोशिश करता है.”

कीव की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि उसके छह नागरिकों की गतिविधियों से जुड़ी जांच को कुछ मीडिया संस्थानों, खासकर रूस के मीडिया ने इस तरह पेश किया है जैसे यह भारतीय हितों के खिलाफ यूक्रेनी प्रशासन की किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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