नई दिल्ली: संसद में मंगलवार को राहुल गांधी पर तीखा हमला करते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा अगर विपक्ष की नेता होतीं तो शायद बेहतर प्रदर्शन करतीं, क्योंकि वे “कम से कम संसद में आती हैं और सुनती हैं.”
रिजिजू ने यह टिप्पणी लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बहस का जवाब देते हुए की. उनके बयान पर विपक्षी सदस्यों ने प्रतिक्रिया दी.
कांग्रेस के विपक्ष के नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना भाजपा मंत्री ने उनके पुराने “हग” और “विंक” वाले मामले का ज़िक्र करते हुए कहा कि उनका व्यवहार “गंभीर नहीं” लगता.
उन्होंने कहा, “मैंने पहली बार ऐसा देखा जब वो वहां से दौड़कर आए और प्रधानमंत्री को गले लगाने के लिए झपट पड़े. फिर अपनी कुर्सी पर बैठकर अपने सांसद को देखकर आंख मारते हैं. ऐसा नेता प्रतिपक्ष हमने पहली बार देखा है.”
रिजिजू जिस “हग और विंक” की बात कर रहे थे, वह 2018 की घटना है, जिसकी भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आलोचना की थी.
उन्होंने आगे कहा, “आपकी तरफ भी बहुत अच्छे लोग हैं, लेकिन आपने उन्हें विपक्ष का नेता बना दिया है, इसमें हम कुछ नहीं कर सकते. यह मेरे हाथ में नहीं है. देखिए, प्रियंका वाड्रा गांधी जी पीछे बैठी हैं और मुस्कुरा रही हैं. अगर उन्हें विपक्ष का नेता बनाया होता तो शायद प्रदर्शन बेहतर होता. कम से कम वे बैठकर सुनती तो हैं; आपके विपक्ष के नेता तो सुनते भी नहीं. वह मुस्कुराती भी हैं.”
जब विपक्ष ने उनके बयान पर नाराजगी जताई, तो रिजिजू ने सफाई देते हुए कहा कि संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते अगर कोई सांसद अच्छा व्यवहार करता है तो उसकी तारीफ करना उनका कर्तव्य है.
उन्होंने कहा, “मैं भाजपा का नेता और मंत्री हूं, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री के रूप में अगर कोई सांसद अच्छा व्यवहार करता है तो उसकी तारीफ करना मेरा कर्तव्य है. क्या अब किसी की तारीफ करना भी अपराध हो गया है? कांग्रेस के सदस्यों को क्या हो गया है? आप कुछ अच्छा कहें तो भी नाराज हो जाते हैं और कुछ सख्त कहें तो भी.”
रिजिजू के भाषण खत्म होने के बाद प्रियंका गांधी ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा:
“आज मुझे हंसी इसलिए आई क्योंकि इस देश में एक ही व्यक्ति है जो इन 12 सालों में इनके सामने झुका नहीं है. वह विपक्ष के नेता हैं और वह विपक्ष के नेता इसलिए हैं क्योंकि वे सदन में खड़े होकर सच बोल देते हैं, बिना झिझक बोल देते हैं. जो सच्चाई वह बोलते हैं, वह इनसे पचती नहीं है.”
बहस के दौरान रिजिजू ने राहुल गांधी के उस पुराने बयान की भी आलोचना की, जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें सदन में बोलने के लिए किसी की अनुमति की ज़रूरत नहीं है.
रिजिजू ने कहा, “चाहे प्रधानमंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या कोई और सांसद—स्पीकर की अनुमति के बिना कोई भी सदन में नहीं बोल सकता.”
केंद्रीय मंत्री ने यह भी दावा किया कि विपक्ष के कम से कम 50 सांसद उनसे व्यक्तिगत रूप से मिले और कहा कि वे लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से सहमत नहीं हैं, लेकिन मजबूरी में उन्हें इसका हिस्सा बनना पड़ा.
उन्होंने कहा कि ओम बिरला निष्पक्ष हैं और सदन में सभी सांसदों—चाहे नए हों या पुराने को बोलने का मौका मिलता है.
उन्होंने कहा, “मुझे गर्व है कि मैं उसी लोकसभा का सदस्य हूं, जहां ओम बिड़ला स्पीकर हैं.”
कांग्रेस पर सदन में लगातार हंगामा करने का आरोप लगाते हुए रिजिजू ने कहा कि भाजपा ने कभी स्पीकर की कुर्सी की तरफ कागज नहीं फेंके, कभी सदन से वॉकआउट नहीं किया और कभी सदन की गरिमा को कम नहीं होने दिया.
उन्होंने विपक्ष पर यह आरोप भी लगाया कि अब वे स्पीकर की भूमिका और कुर्सी को भी तय करना चाहते हैं.
उन्होंने कहा, “वे स्पीकर की भूमिका को भी नियंत्रित करना चाहते हैं. वे तय करना चाहते हैं कि कुर्सी पर कौन बैठे…दुर्भाग्य से वे स्पीकर की सत्ता अपने हाथ में लेना चाहते हैं.”
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि स्पीकर निष्पक्ष होते हैं.
उन्होंने कहा, “स्पीकर भले ही सत्तारूढ़ दल से आते हों, यह हम भी जानते हैं. लेकिन जब वे कुर्सी पर बैठते हैं तो उनकी भूमिका पूरी तरह निष्पक्ष होती है.”
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