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Monday, 9 March, 2026
होमरिपोर्टकुनो में चीता ज्वाला ने दिए 5 शावकों को जन्म, भारत में चीतों की संख्या 53 हुई

कुनो में चीता ज्वाला ने दिए 5 शावकों को जन्म, भारत में चीतों की संख्या 53 हुई

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का क्षण बताया.

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भोपाल: मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के कुनो नेशनल पार्क में नामीबियाई चीता ज्वाला ने पांच शावकों को जन्म दिया है. इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 53 हो गई है.

इन पांच शावकों के जन्म के बाद भारत में जन्मे और जीवित चीतों के शावकों की संख्या 33 हो गई है. इसे भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट चीता के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए इसे वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का क्षण बताया.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “कुनो नेशनल पार्क से फिर एक अच्छी खबर आई है. चीता ज्वाला ने 5 शावकों को जन्म दिया है, जो प्रोजेक्ट चीता के लिए एक और बड़ा मील का पत्थर है. इसके साथ ही भारत में चीतों की संख्या 50 के पार पहुंचकर 53 हो गई है. यह वन्यजीव संरक्षण के लिए गर्व का पल है और भारत में चीतों को फिर से बसाने की कोशिशों की सफलता को दिखाता है.”

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई और इसे प्रोजेक्ट चीता के लिए गर्व का क्षण बताया. उन्होंने कहा कि ज्वाला तीसरी बार मां बनी है और उसने पांच शावकों को जन्म दिया है.

उन्होंने एक्स पर पोस्ट में लिखा, “चीतों की संख्या 50 के पार पहुंच गई है. प्रोजेक्ट चीता के लिए यह गर्व का पल है. नामीबिया की चीता ज्वाला, जो तीसरी बार मां बनी है, ने आज कुनो नेशनल पार्क में पांच शावकों को जन्म दिया. इसके साथ ही भारत में जन्मे और जीवित शावकों की संख्या 33 हो गई है और यह भारत में चीता का दसवां सफल लिटर है.”

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस परियोजना से जुड़े पशु चिकित्सकों, फील्ड स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की मेहनत की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि इन लोगों की मेहनत और समर्पण के कारण यह उपलब्धि संभव हो पाई है.

उन्होंने कहा कि इन नए शावकों के जन्म के साथ भारत में चीतों की कुल संख्या 53 हो गई है, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए एक ऐतिहासिक और भावुक पल है.

‘प्रोजेक्ट चीता’ भारत का दुनिया का पहला इंटरकॉन्टिनेंटल ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट है, जिसकी शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी. इस परियोजना का उद्देश्य भारत में चीतों को फिर से बसाना है, क्योंकि देश में 1952 में चीता पूरी तरह विलुप्त हो गया था.

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