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Monday, 2 March, 2026
होमदेशशराब नीति केस: केजरीवाल को मिली राहत पर CBI की 974 पन्नों की अपील, जज पर ‘चुनिंदा रीडिंग’ का आरोप

शराब नीति केस: केजरीवाल को मिली राहत पर CBI की 974 पन्नों की अपील, जज पर ‘चुनिंदा रीडिंग’ का आरोप

27 फरवरी को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली शराब नीति मामले में 23 आरोपियों के खिलाफ CBI का केस खारिज कर दिया था और प्रक्रिया में खामियों व सुनी-सुनाई बातों पर भरोसा करने के लिए CBI को फटकार लगाई थी.

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नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 2022 के दिल्ली एक्साइज केस में ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ बड़ी अपील दायर की है. एजेंसी ने 27 फरवरी को अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य को दी गई राहत को “स्पष्ट रूप से गैरकानूनी”, “गलत” और “साफ दिखाई देने वाली गलतियों वाला” बताया है.

सीबीआई ने कहा है कि विशेष जज (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) जितेंद्र सिंह ने “मिनी-ट्रायल” चलाया. एजेंसी का कहना है कि जज ने “साजिश के अलग-अलग हिस्सों को अलग-अलग देखा” और सबूतों को एक साथ जोड़कर नहीं परखा. सीबीआई ने आरोप लगाया है कि जज ने अभियोजन पक्ष के मामले को “चुनिंदा तरीके से पढ़ा” और उन सबूतों को नज़रअंदाज़ कर दिया जो आरोपियों की जिम्मेदारी दिखाते थे.

सीबीआई ने यह भी कहा कि 27 फरवरी के अपने आदेश में जज ने अभियोजन के मामले को “सही नज़रिए से नहीं समझा”, जिसकी वजह से उन्होंने केंद्रीय एजेंसी और जांच अधिकारी पर “अनुचित और समझ से बाहर” टिप्पणियां कीं.

दिल्ली हाई कोर्ट—जस्टिस स्वर्णा कांत शर्मा की बेंच, अब होली की छुट्टी के बाद 9 मार्च को इस याचिका पर सुनवाई कर सकती है.

इससे पहले, दिल्ली की राउज एवेन्यू जिला अदालत ने 598 पन्नों के आदेश में दिल्ली शराब नीति मामले में 23 आरोपियों के खिलाफ सीबीआई का केस खारिज कर दिया था. अदालत ने प्रक्रिया में खामियों और सुनी-सुनाई बातों पर ज्यादा भरोसा करने के लिए सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई थी.

सीबीआई की अपील

अपनी याचिका में सीबीआई ने कहा है कि शराब नीति मामले में हर आरोपी की अलग-अलग भूमिका देखने से शायद दोष साफ न दिखे, लेकिन जब सभी के कामों को एक साथ देखा जाए तो रद्द की जा चुकी नीति से पैसे कमाने की साजिश साफ नज़र आती है.

सीबीआई ने कहा कि जज ने साजिश के मूल आधार को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया और छोटी-छोटी बातों में विरोधाभास ढूंढते रहे, जबकि वे बातें अभियोजन के केस का हिस्सा भी नहीं थीं. एजेंसी का कहना है कि जज ने “आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाओं को अपने तरीके से, बिल्कुल अलग नजरिए से समझ लिया.” याचिका में यह भी कहा गया है कि एकल जज को अभियोजन के मामले और इस चरण पर लागू होने वाले कानून की बुनियादी समझ की कमी थी.

याचिका में कहा गया है, “असल में, ऊंचे कार्यकारी स्तर से निकला बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का मामला, जांच एजेंसी पर गलत निष्कर्ष निकालकर आरोप लगाने की वजह से खत्म कर दिया गया, जबकि इस स्तर पर रिकॉर्ड को बिना विवाद के माना जाना चाहिए था और वह कुछ और ही दिखाता है.”

27 फरवरी के अपने आदेश में राउज एवेन्यू कोर्ट ने सभी आरोपियों को राहत दे दी. अदालत ने कहा कि सबूत इतने मजबूत नहीं हैं कि “गंभीर शक” पैदा हो या पहली नज़र में मामला बनता हो. जज ने सीबीआई की चार्जशीट को “कमियों से भरी” और “अटकलों पर आधारित” भी बताया.

सीबीआई ने कहा है कि आदेश में तथ्यों को गलत पढ़ा गया और सह-आरोपी जो बाद में गवाह बने, उनके कानून की भी गलत व्याख्या की गई. एजेंसी का कहना है कि उसका मामला उन आरोपियों के खिलाफ है जिन्होंने दिल्ली की 2021-2022 की शराब नीति बनाते और लागू करते समय अनियमितताओं के लिए आपराधिक साजिश की और सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत दी.

विवाद की शुरुआत

सीबीआई की अगस्त 2022 में दर्ज एफआईआर के अनुसार, दिल्ली सरकार जब एक्साइज नीति बना रही थी, तब कुछ अनियमितताओं की जानकारी एजेंसी को अपने सूत्रों और गृह मंत्रालय के तत्कालीन निदेशक प्रवीण कुमार राय से मिली. इसके बाद जांच शुरू की गई.

सीबीआई ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, सबूत मिटाने और सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने जैसे आरोपों में 23 लोगों के खिलाफ पांच चार्जशीट दाखिल कीं. इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने 22 दिसंबर 2025 से 12 फरवरी तक रोजाना सुनवाई की.

सीबीआई का दावा है कि दिल्ली एक्साइज पॉलिसी 2021–22 को “जानबूझकर भ्रष्टाचार का जरिया बनाकर तैयार और लागू किया गया, ताकि मार्जिन में हेरफेर के जरिए बड़े पैमाने पर अवैध पैसा कमाया जा सके.”

एजेंसी ने कहा कि उस समय की दिल्ली सरकार का मकसद इन अनियमितताओं से मिले पैसे का इस्तेमाल राजनीतिक उद्देश्यों, जैसे गोवा चुनाव, में करना था.

सीबीआई की अपील के मुताबिक, “साजिश सबसे ऊंचे राजनीतिक स्तर पर रची गई, जहां नीति का ढांचा जानबूझकर बदला गया. मौजूदा पांच प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत मार्जिन के साथ निजी थोक व्यवस्था बनाई गई और विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद टर्नओवर की शर्तें ढीली की गईं.”

इस पर जज सिंह ने कहा था कि 12 प्रतिशत की सीमा थोक व्यापारियों के मुनाफे को नियंत्रित करने के लिए तय की गई थी, जबकि प्रस्तावित नीति में पांच प्रतिशत आधार मूल्य था, जिस पर व्यापारी बातचीत कर सकते थे, और इससे उन्हें 12 प्रतिशत से ज्यादा मुनाफा कमाने की छूट मिल सकती थी.

गड़बड़ियों के बारे में सीबीआई ने यह भी कहा कि इसमें शामिल सभी राजनेता और अधिकारी आपस में मिले हुए थे, लेकिन अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया मुख्य नेता थे.

एजेंसी के अनुसार, मनीष सिसोदिया “एक्साइज और वित्त मंत्री होने के नाते” नीति बनाने और लागू करने में “मुख्य भूमिका” में थे, जबकि अरविंद केजरीवाल “AAP के कुल प्रभारी” होने के कारण उसके “सभी बड़े फैसलों” को देखते थे. अपील में आगे कहा गया है कि दुर्गेश पाठक और विजय नायर, जो उनसे करीबी तौर पर जुड़े थे, साजिश के लक्ष्य को पूरा करने के लिए उनके साथ मिलकर काम कर रहे थे.

अंत में, याचिका में कहा गया है कि यह मामला “पूरे तौर पर पढ़ने पर एक लगातार चलने वाली आपराधिक साजिश” को दिखाता है, जो एक्साइज नीति बनने के समय शुरू हुई और गोवा चुनाव के लिए कथित तौर पर कमीशन पैदा किए.

अब सबकी नजर दिल्ली हाई कोर्ट पर है, जो इस याचिका पर सुनवाई की तैयारी कर रहा है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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