नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी की एक विशेष सीबीआई कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली आबकारी नीति मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई अन्य लोगों को बरी कर दिया.
विशेष सीबीआई जज जितेंद्र सिंह ने मौखिक रूप से कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दाखिल चार्जशीट सिसोदिया के खिलाफ पहली नज़र में मामला साबित करने में नाकाम रही. सिसोदिया इस मामले में फरवरी 2023 में गिरफ्तार होने वाले आम आदमी पार्टी (AAP) के पहले बड़े नेता थे.
केजरीवाल के बारे में जज ने कहा कि उन्हें पुख्ता सबूत के बिना मामले में फंसाया गया.
आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए केजरीवाल ने कहा कि इससे उनकी ईमानदारी साबित होती है.
भावुक AAP नेता ने सिसोदिया के साथ मीडिया से कहा, “आरोप लगाए गए कि केजरीवाल भ्रष्ट हैं, लेकिन केजरीवाल भ्रष्ट नहीं हैं. मैंने ज़िंदगी में सिर्फ ईमानदारी कमाई है और आज अदालत के आदेश ने साबित कर दिया कि केजरीवाल पूरी तरह ईमानदार इंसान हैं.”
सीबीआई का मामला अगस्त 2022 में दिल्ली के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की सिफारिश पर दर्ज हुआ था. इसमें शराब बनाने और थोक सप्लाई के ठेकों के बदले कथित रूप से कार्टेल बनाने और कमीशन लेने की जांच की सिफारिश की गई थी.
जज सिंह ने शुक्रवार को मामले के सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया और उनके खिलाफ आरोप तय करने से इनकार कर दिया. अदालत ने सीबीआई की जांच को गलत बताया और कहा कि चार्जशीट में किए गए दावों को गवाहों और दस्तावेजी सबूतों से साबित नहीं किया गया.
आरोपियों को राहत देते हुए जज सिंह ने कहा, “कभी-कभी जब फाइल बहुत ज्यादा पढ़ते हो, तो फाइल आपसे बात करने लगती है.”
उन्होंने कहा, “अभियोजन का मामला जांच में टिक नहींता. रिकॉर्ड में लगातार प्रक्रिया और परामर्श दिखता है. अपराध की मंशा साबित करने के लिए कोई अचानक रुकावट नहीं है. बड़ी साजिश की थ्योरी यहां फेल हो जाती है. अभियोजन के मामले में अंदरूनी विरोधाभास हैं.”
उन्होंने आगे कहा, “हेरफेर का आरोप नहीं टिकता. नीति तय संवैधानिक प्रक्रिया से होकर गुजरी. नीति की संरचना किसी अपराध को साबित नहीं करती. रिकॉर्ड में संस्थागत विचार-विमर्श दिखता है.”
जज ने सीबीआई को यह कहकर भी फटकार लगाई कि उसने अपने मुख्य गवाह के बयान चार्जशीट में शामिल नहीं किए और कुछ आरोपियों के बयानों पर भरोसा किया, जो बाद में सरकारी गवाह बन गए और उन्हें माफी मिल गई.
उन्होंने कहा, “अगर ऐसी प्रथा की इजाजत दी गई…बयानों को दोबारा रिकॉर्ड करना…तो यह गलत उदाहरण बनेगा.”
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