नई दिल्ली: कई सालों तक माओवादी कमांडर अन्वेष अपने कंधे पर हथियार लटकाकर ओडिशा के घने जंगलों में घूमता रहा. हाल के दिनों में छत्तीसगढ़ के बस्तर का यह वामपंथी गुरिल्ला अपने उन साथियों से जुड़ना चाहता था जिन्होंने हथियार छोड़ दिए थे.
लेकिन सरेंडर करने का उसका विचार उसे ओडिशा के सबसे वरिष्ठ माओवादी कमांडर सुक्रू से टकराव की स्थिति में ले आया. दोनों के बीच कई बार टकराव हुआ, और पुलिस सूत्रों के मुताबिक 29 जनवरी को विशेष जोनल कमेटी सदस्य सुक्रू ने ओडिशा के अन्य कमांडरों के साथ मिलकर अन्वेष की हत्या कर दी.
कंधमाल जिला पुलिस द्वारा अन्वेष की हत्या और पाकरी आरक्षित वन क्षेत्र में दफनाए जाने की खुफिया जानकारी की पुष्टि के बाद मंगलवार को उसका शव जमीन से निकाला गया.
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, माओवादी विरोधी अभियान, संजीब पांडा ने कहा कि अन्वेष अपने करीब दर्जनभर साथियों के साथ सरेंडर करना चाहता था, लेकिन सुक्रू के नेतृत्व वाला समूह हथियारबंद अभियान जारी रखना चाहता था.
उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “अन्वेष प्लाटून कमांडर था और सुक्रू के बाद दूसरे नंबर पर था. अन्वेष अपने 12 साथियों के साथ सरेंडर करना चाहता था, लेकिन सुक्रू का समूह ऐसा नहीं चाहता था. इसलिए सुक्रू के समूह ने अन्वेष की हत्या कर दी और उसका शव दफना दिया.”
अन्वेष छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के सुकमा इलाके का रहने वाला था. वह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, माओवादी की ओडिशा की कंधमाल कालाहांडी बौध नयागढ़ डिवीजन की आठवीं कंपनी के सैन्य प्लाटून का डिवीजनल कमेटी सदस्य और कमांडर था. उसके सिर पर 27.5 लाख रुपये का इनाम था.
सुक्रू ओडिशा के मलकानगिरी जिले का रहने वाला था और उस पर 55 लाख रुपये का इनाम था.
ओडिशा पुलिस के सूत्रों ने कहा कि यह हत्या ओडिशा के माओवादी नेताओं और पड़ोसी छत्तीसगढ़ के कैडरों के बीच अंदरूनी मतभेद का नतीजा थी.
एक ओडिशा पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह हत्या जमीनी स्तर पर माओवादी रैंकों में बढ़ती दरार का नतीजा है. माना जा रहा है कि यह मामला छत्तीसगढ़ के माओवादी कैडरों और ओडिशा के कमांडर के नेतृत्व में काम कर रहे कैडरों के बीच मतभेद से शुरू हुआ. यह ओडिया और छत्तीसगढ़ नेतृत्व के बीच अंदरूनी टकराव है.”
कंधमाल के पुलिस अधीक्षक हरीशा बी.सी. ने कहा कि सुक्रू ने डिवीजनल कमेटी सदस्य शीला और एरिया कमेटी सदस्य जगेश जैसे अन्य माओवादी कमांडरों की मदद से अन्वेष की हत्या की. उन्होंने यह भी बताया कि पिछले हफ्ते नंदाबली आरक्षित वन क्षेत्र में माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच मुठभेड़ में जगेश मारा गया.
कंधमाल एसपी ने बयान में कहा, “प्रारंभिक जांच से संकेत मिलता है कि अन्वेष की कथित तौर पर उसके अपने साथियों ने हत्या की. खुफिया जानकारी के मुताबिक अन्वेष संगठन छोड़कर पुलिस के सामने सरेंडर करना चाहता था. नेतृत्व ने इसका हिंसक विरोध किया. माना जा रहा है कि हत्या एसजेडसीएम सुक्रू ने डीवीसीएम शीला और एसीएम जगेश की मदद से की.”
अधिकारियों ने कहा कि ओडिशा सरकार की माओवादियों के लिए सरेंडर और पुनर्वास नीति में हाल ही में किए गए बदलाव के बाद अन्वेष पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करना चाहता था.
पिछले साल नवंबर में मोहन चरण माझी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने राज्य में माओवादी कैडरों के सरेंडर और पुनर्वास की नीति को अपडेट किया था.
माओवादी कैडरों को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया. ऊपरी श्रेणी ए यानी वरिष्ठ रैंक वाले सरेंडर कैडर और मध्य व निचली श्रेणी बी यानी कम रैंक वाले सरेंडर कैडर.
संशोधित शर्तों के तहत सरकार ने वरिष्ठ नेताओं, जिनमें केंद्रीय समिति सदस्य शामिल हैं, के लिए पुनर्वास राशि बढ़ाकर एक करोड़ रुपये तक कर दी. निचले रैंक के अन्य माओवादी कैडरों के लिए 10 लाख रुपये की अतिरिक्त फिक्स्ड डिपॉजिट की व्यवस्था भी की गई.
नीति में संशोधन के बाद इस साल की शुरुआत से अब तक राज्य में 54 वामपंथी गुरिल्ला सरेंडर कर चुके हैं, और खुफिया अधिकारियों के मुताबिक अन्वेष भी उनमें शामिल होना चाहता था. एक वरिष्ठ राज्य सरकार के अधिकारी ने कहा, “परिभाषा के अनुसार अन्वेष संशोधित और उन्नत पुनर्वास पैकेज के लिए पात्र था.”
इस महीने की शुरुआत में सरकार ने नीति में फिर बदलाव किया और शर्त जोड़ी कि राज्य के बाहर के माओवादी कैडर तभी वित्तीय पुनर्वास के पात्र होंगे जब उनका संचालन क्षेत्र ओडिशा में हो.
हालांकि, पुलिस के मुताबिक अंदरूनी बहस के बाद जनवरी में अन्वेष की कथित तौर पर हत्या कर दी गई. ओडिशा पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि पुख्ता जानकारी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी बाकी है.
सूत्रों ने कहा कि पुलिस को घटना की जानकारी मिली थी, लेकिन स्थान और समय को लेकर जानकारी अस्पष्ट थी. अधिकारियों ने बताया कि प्रतिबंधित संगठन के सरेंडर कर चुके कैडरों ने इन विवरणों की पुष्टि की.
ओडिशा पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर, जिसकी कॉपी दिप्रिंट ने देखी है, के अनुसार कंधमाल पुलिस को एक “विश्वसनीय स्रोत” से सूचना मिली थी कि एक अज्ञात माओवादी कैडर ने दूसरे की हत्या कर शव को पाकरी आरक्षित वन क्षेत्र में दफना दिया है.
एक ओडिशा पुलिस अधिकारी ने दर्ज किया कि जमीन के दो से तीन मीटर नीचे खुदाई करने पर एक अज्ञात सड़ा हुआ शव बरामद हुआ.
कंधमाल एसपी ने कहा कि डारिंगबाड़ी पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता 2023 की हत्या और सबूत नष्ट करने से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. उन्होंने कहा, “कंधमाल पुलिस छत्तीसगढ़ में मृतक के परिवार के संपर्क में है ताकि जरूरी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा सके और शव सौंपा जा सके. मामले की आगे की जांच जारी है.”
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