नई दिल्ली: नवंबर में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के चेन्नई कैंपस में एक वरिष्ठ अधिकारी की कार में आग लगा दी गई. इस घटना के बाद ऐसी कई बातें सामने आईं, जिनसे बल के अंदर नाराज़गी का संकेत मिला. कुछ अधिकारियों ने वहां का माहौल “बहुत टॉक्सिक” बताया.
1 जनवरी को चेन्नई हब के कुछ अधिकारियों ने एनएसजी के डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखकर दखल देने की मांग की. उन्होंने कहा कि “बढ़ती दुश्मनी” को रोकने के लिए कदम उठाए जाएं. यह पत्र सोशल मीडिया पर सामने आया, लेकिन अधिकारियों का कहना था कि मामला अंदर ही सुलझा लिया गया था.
सूत्रों के अनुसार, असहजता की वजह मुख्य रूप से उस पुलिस जांच से जुड़ी घटनाएं थीं, जो ग्रुप कमांडर की गाड़ी में आग लगाने के मामले में चल रही थी. जांच के दौरान कुछ अधिकारियों से पूछताछ की गई और उनके घरों की तलाशी ली गई.
सूत्रों ने बताया कि तलाशी की कार्रवाई एक बड़ा विवाद बन गई. कुछ अधिकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराज़गी जताई और हब का माहौल “टॉक्सिक” बताया. अपने पत्र में अधिकारियों ने कहा कि इस घटना से अधिकारियों और जवानों के बीच “गहरा अविश्वास” पैदा हुआ, जिससे “ऑपरेशन की क्षमता पर असर पड़ा और कमांड कमजोर हुई.”
उन्होंने यह भी अनुरोध किया कि एनएसजी के डायरेक्टर जनरल वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम भेजें, जो इस घटना की असली वजह की स्वतंत्र जांच करे और सामान्य स्थिति बहाल करने में मदद करे.
सुरक्षा तंत्र के सूत्रों के अनुसार, इंस्पेक्टर जनरल रैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 7 जनवरी को चेन्नई हब का दौरा किया. उन्होंने जवानों से बातचीत की, शिकायतें सुनीं और “मामला सुलझाने” की कोशिश की. लेकिन बाद में पत्र के लीक होने से इस पूरे मामले को “अलग मोड़ और रंग” मिल गया.
एक सूत्र ने कहा, “कुछ अधिकारी इस बात से नाराज़ थे कि उनके घरों की तलाशी ली गई और उनसे ग्रुप कमांडर की गाड़ी के मामले में पूछताछ हुई. हालांकि, पुलिस स्वतंत्र जांच कर रही थी, लेकिन कुछ अधिकारियों को लगा कि तलाशी का आदेश अंदर से दिया गया था.”
उन्होंने आगे कहा, “जब एक वरिष्ठ अधिकारी हब आए और जवानों से बात की, तब मामला साफ किया गया. अधिकारियों ने कहा कि वे पुलिस जांच में पूरा सहयोग करेंगे.”
सूत्र ने यह भी कहा कि पत्र उस समय लीक हुआ जब मामला पहले ही सुलझ चुका था. “यह मुद्दा जनवरी में ही सुलझा लिया गया था. पत्र कई हफ्तों बाद सामने आया और लगता है कि किसी नाराज़ व्यक्ति ने इसे लीक किया.”
हालांकि इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन पुलिस अभी तक यह पता नहीं लगा पाई है कि गाड़ी में आग किसने लगाई.
जांच एजेंसियों को शक है कि यह काम कैंपस के अंदर के किसी व्यक्ति ने किया हो सकता है, क्योंकि एनएसजी का क्षेत्रीय हब एक हाई-सिक्योरिटी जोन है, जहां प्रवेश सीमित है. एक दूसरे पुलिस सूत्र ने कहा, “कोई आम नागरिक अंदर आकर ऐसा नहीं कर सकता. संभावना है कि यह कैंपस के अंदर का ही कोई व्यक्ति हो, लेकिन अभी तक गिरफ्तारी के लिए कोई सबूत नहीं मिला है.”
एनएसजी ने भी इस घटना की आंतरिक जांच शुरू कर दी है.
एक सूत्र ने कहा, “क्योंकि यह आगजनी का मामला था, इसलिए पुलिस द्वारा जांच करना सही था. उसी के अनुसार उन्हें जानकारी दी गई. एनएसजी के डायरेक्टर जनरल ने तमिलनाडु पुलिस के डायरेक्टर जनरल को पत्र लिखकर जांच तेज करने और दोषियों को पकड़ने का अनुरोध किया. जांच जारी है और पुलिस को पूरा सहयोग दिया जा रहा है.”
दिप्रिंट ने एनएसजी और तमिलनाडु पुलिस से टिप्पणी के लिए संपर्क किया, लेकिन खबर के छापे जाने तक कोई आधिकारिक जवाब नहीं मिला था. जवाब मिलने पर इस रिपोर्ट को अपडेट कर दिया जाएगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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