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Saturday, 14 February, 2026
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बांग्लादेश: हसीना के बाद पहली बार चुनाव, तारिक रहमान की BNP भारी बढ़त में

दिवंगत खालिदा ज़िया के बेटे के 36 साल में बांग्लादेश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री बनने की उम्मीद; पार्टी ने समर्थकों से जश्न न मनाने और शांति बनाए रखने को कहा.

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ढाका: बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट (बीएनपी), देश के 13वें संसदीय चुनाव में बड़ी बहुमत हासिल करने की ओर बढ़ रही है. यह बदलाव लंबे समय तक नेता रहीं शेख हसीना को पद से हटाए जाने के 18 महीने बाद आया है.

चुनाव आयोग द्वारा जारी पहले नतीजों के अनुसार, घोषित की गई पहली 100 सीटों में से बीएनपी ने 73 सीटें जीतीं — जो बड़ी जीत का शुरुआती संकेत है. 41 सीटों के शुरुआती रुझानों में भी ज्यादातर जगहों पर बीएनपी के उम्मीदवार आगे दिखे.

इन नतीजों से बीएनपी अध्यक्ष तारिक रहमान, 60, बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में सबसे आगे हो गए हैं. अगर यह पुष्टि होती है, तो वे 36 साल में देश के पहले पुरुष प्रधानमंत्री होंगे, जिससे लंबे समय तक महिला नेताओं के प्रभुत्व का दौर खत्म होगा.

कई दशकों तक बांग्लादेश दुनिया में इसलिए अलग पहचान रखता था क्योंकि वहां महिलाओं ने नेतृत्व किया. रहमान की मां खालिदा ज़िया (बीएनपी) ने दो पूरे कार्यकाल पूरे किए, जबकि अवामी लीग की हसीना ने 15 साल में चार कार्यकाल तक शासन किया.

12 फरवरी का आम चुनाव उस युवा आंदोलन के बाद पहला चुनाव था, जिसने हसीना की सरकार को गिरा दिया था. ये विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से जेनरेशन Z के युवाओं ने किए थे. आलोचकों का कहना था कि पिछली सरकार धीरे-धीरे ज्यादा सख्त और भ्रष्ट होती जा रही थी.

रहमान को अनौपचारिक रूप से ढाका-17 और बोगुरा-6 सीट से विजेता घोषित किया गया. ढाका-17 में उन्हें 72,699 वोट मिले, जबकि उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंदी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के एस.एम. खालिदुज्जामन को 68,300 वोट मिले — यानी 4,399 वोटों का अंतर.

बीएनपी की जीत उन इलाकों में भी हुई जिन्हें पहले अवामी लीग का गढ़ माना जाता था. गोपालगंज, शरीयतपुर, मदारिपुर और फरीदपुर जिलों में पार्टी ने 13 में से 11 सीटें जीतीं.

दोनों सीटों पर जीत की पुष्टि होने पर यह साफ होगा कि रहमान को शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में मजबूत समर्थन मिला है.

एक्स पर एक पोस्ट में बीएनपी की मीडिया सेल ने जीत का दावा करते हुए कहा, “बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी-बीएनपी अधिकतर सीटों पर जीत के बाद सरकार बनाने जा रही है.” चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता के अनुसार, कई सीटों के नतीजे अभी प्रक्रिया में हैं और दिन में बाद में घोषित किए जा सकते हैं.

बीएनपी ने पहले ही कहा था कि अगर वह चुनाव जीतती है, तो उसके अध्यक्ष और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान बांग्लादेश के अगले प्रधानमंत्री होंगे.

बीएनपी की केंद्रीय चुनाव संचालन समिति के प्रवक्ता महदी अमीन ने शुक्रवार तड़के मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “हमें भरोसा है कि हम दो-तिहाई से ज्यादा सीटें जीतकर सरकार बनाएंगे.” पीटीआई ने इसकी खबर दी थी.

फिर भी, शुक्रवार को बीएनपी नेताओं ने समर्थकों से सार्वजनिक जश्न से दूर रहने और पूरे देश में दुआ और शांति बनाए रखने की अपील की.

बीएनपी के मुख्य प्रतिद्वंदी जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख शफीकुर रहमान ने हार स्वीकार की और कहा कि पार्टी सिर्फ विरोध करने की राजनीति नहीं करेगी.

रॉयटर्स ने उनके हवाले से कहा, “हम सकारात्मक राजनीति करेंगे.”

स्थानीय टीवी रिपोर्टों के अनुसार, नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी), जिसका नेतृत्व उन युवा कार्यकर्ताओं ने किया था जिन्होंने हसीना को हटाने में अहम भूमिका निभाई थी और जो जमात-नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा थी, उसने जिन 30 सीटों पर चुनाव लड़ा उनमें से सिर्फ पांच जीतीं.

मंगलवार को टीवी पर दिए गए भाषण में रहमान ने अपनी पार्टी की पिछली कमियों को स्वीकार किया और मतदाताओं से माफी मांगी. उन्होंने सख्त भ्रष्टाचार-विरोधी कदम, कानून का राज बहाल करने और जवाबदेह सरकार देने का वादा किया.

उन्होंने कहा, “अगर बीएनपी को देश चलाने की जिम्मेदारी दी जाती है, तो हम आत्मनिर्भर बांग्लादेश बनाएंगे.” उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय वेतनमान समय पर लागू करने और सभी क्षेत्रों में बराबर विकास का वादा किया.

उन्होंने सबको साथ लेकर चलने पर जोर देते हुए कहा कि मुसलमान, हिंदू, बौद्ध, ईसाई, आस्तिक और नास्तिक — सभी बीएनपी के नेतृत्व में सुरक्षित रहेंगे.

चुनाव को “ऐतिहासिक पड़ाव” बताते हुए रहमान ने कहा कि पिछली सरकार ने “लोगों से राज्य का मालिकाना हक छीन लिया था और सभी लोकतांत्रिक राजनीतिक अधिकारों पर कब्जा कर लिया था.” उन्होंने कहा कि यह चुनाव “लंबे आंदोलनों और कुर्बानियों” के बाद लोगों को वह हक वापस दिलाता है.

गुरुवार को हुए मतदान में 300 में से 299 संसदीय सीटों के लिए 2,000 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में थे, जिनमें निर्दलीय भी शामिल थे. एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण चुनाव टाल दिया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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