नई दिल्ली: पंजाब के मोगा जिले की पुलिस ने तीन बाइक सवार युवकों की तलाश शुरू कर दी है. इनमें से एक ने मंगलवार को शहर में प्रवासी मजदूरों के एक समूह पर गोली चलाई.
सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस अजय गांधी ने दिप्रिंट को बताया, “खोसा जलाल गांव में कई गोलियां चलाई गईं और मजदूरों में से एक अशोक कुमार के पैर में गोली लगी. वे बिहार के रहने वाले हैं और धान के खेतों में मजदूरी करते हैं. हालांकि, अब वे ठीक हो गए हैं और खतरे से बाहर हैं.”
उन्होंने कहा कि बाइक सवार हमलावरों की पहचान कर ली गई है और जल्द से जल्द सभी को गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है.
माना जा रहा है कि हमलावरों में से एक ने घटना का वीडियो बनाया और उसे इंस्टाग्राम पर डाल दिया. वीडियो में खुद को दविंदर बंबीहा गैंग से जुड़ा बताया गया है और गोलीबारी की वजह भी बताई गई है.
इंस्टाग्राम पर डाले गए कथित पोस्ट में लिखा है, “खोसा जलाल गांव में जो गोलियां चलाई गईं, वह हमने चलाईं — लाडी भलवान और निरवैर सिंह. यह हमारा विरोध है उन लोगों के खिलाफ जो पंजाब आए और इसे अपनी पुश्तैनी ज़मीन समझने लगे.”
‘निरवैर सिंह’ नाम के हैंडल से किए गए पोस्ट में लिखा है, “ये लोग बाहर से आते हैं और पंजाब का माहौल खराब करते हैं और पंजाब के लोगों के साथ बुरा करते हैं. जैसा कि सबने पहले देखा है कि इन लोगों ने पंजाब के बच्चों के साथ कैसा व्यवहार किया, लेकिन इनके खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई. न तो बच्चे के साथ बलात्कार करने वालों के परिवारों को सज़ा मिली और न ही चाकू मारकर बच्चे को मारने वालों के परिवारों से कोई बड़ी रकम ली गई.”
हाल के समय में राज्य में प्रवासी मजदूरों के खिलाफ इस तरह की यह पहली घटना है, लेकिन इससे पहले भी वे स्थानीय लोगों और कुछ निगरानी समूहों के निशाने पर रहे हैं. खासकर पिछले साल सितंबर में होशियारपुर में एक पांच साल के बच्चे के साथ कथित रूप से एक प्रवासी मजदूर द्वारा बलात्कार और हत्या की घटना के बाद.
उस घटना के बाद राज्य में पंजाबी बनाम ‘परवासी’ (प्रवासी) का विवाद बढ़ गया था. कई गांवों के सरपंचों और कुछ समूहों ने अपने इलाकों में प्रवासी मजदूरों के आने पर रोक लगा दी थी.
इंस्टाग्राम पर डाले गए वीडियो में उन सरपंचों को भी धमकी दी गई है जो कथित रूप से प्रवासी मजदूरों को आधार कार्ड बनवाने और वोट के लिए स्थानीय तौर पर रहने की अनुमति दिलाने में मदद कर रहे हैं.
पोस्ट में लिखा है, “हम आपको बताना चाहते हैं कि पंजाब के ये सरपंच सदस्य इनके आधार कार्ड बनवा रहे हैं और वोट के लिए इन्हें रहने की अनुमति दे रहे हैं. आने वाले समय में अगर इन्हें किसी गांव या शहर से नहीं निकाला गया तो हम इन्हें मार देंगे और शहरों के लालची सरपंचों की सूची बनाकर कार्रवाई करेंगे.”
पोस्ट में आगे लिखा है, “देखते हैं कि बलात्कारी भाइयों को पैर में गोली लगती है या नहीं…यह मालवा इलाके के नशा तस्करों के लिए चेतावनी है. आपकी सूची भी बना ली गई है, चाहे वे आम लोग हों या बंबीहा ग्रुप से जुड़े हमारे साथी.”
अंत में “#stayalertbhaia” लिखकर चेतावनी दी गई है. ‘भैया’ शब्द पंजाब में प्रवासी मजदूरों के लिए बोलचाल में इस्तेमाल होता है.
इस मामले में बिहार के सीतामढ़ी जिले के रहने वाले सुबोध कुमार की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई है. उन्होंने पुलिस को बताया कि वह अपने चचेरे भाई अशोक के साथ दोपहर का खाना खाने के लिए चावल मिल से बाहर आ रहे थे, तभी गोलीबारी हुई. दोनों वहीं काम करते हैं.
कुमार ने बताया कि दो युवकों ने उन पर गोली चलाई.
एफआईआर, जिसे दिप्रिंट ने भी देखा है, में लिखा है, “जब हम श्री दुर्गा फीड फैक्ट्री पहुंचे, तो मोगा की तरफ से एक काली मोटरसाइकिल पर तीन युवक आए, जिनके चेहरों पर कपड़ा बंधा था. हमारे पास आते ही बाइक पर पीछे बैठे दो युवकों ने हमें मारने के लिए फायरिंग की. गोलियां हमारे पैरों में लगीं और हम ज़मीन पर गिर गए.”
कुमार ने कहा कि उनके ठेकेदार ने उन्हें बचाया और सिविल अस्पताल, मोगा ले जाने का इंतजाम किया, जहां डॉक्टर ने उनके बाएं पैर पर पट्टी बांधी और छुट्टी दे दी. अशोक को आगे इलाज के लिए फरीदकोट के श्री गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
