गुरुग्राम: हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) की पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (कंप्यूटर साइंस) भर्ती में विवाद खड़ा हो गया है. लिखित परीक्षा में शामिल करीब 5,100 कैंडिडेट्स में से सिर्फ 39 ही पास हो पाए, जिससे विज्ञापित 1,711 में से 1,672 पद खाली रह गए.
5 फरवरी को घोषित नतीजों के बाद विपक्षी दलों और उम्मीदवारों की ओर से तीखी आलोचना हुई है. कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या आयोग की मूल्यांकन प्रक्रिया का मकसद वाकई पद भरना है या उन्हें हमेशा खाली रखना.
भ्रम और बढ़ाते हुए, एचपीएससी ने एक अभूतपूर्व कदम उठाया है—मौजूदा सिलेक्शन की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 1,672 पदों के लिए नया विज्ञापन जारी कर दिया. आयोग के इतिहास में यह पहली बार है जब पहली भर्ती पूरी हुए बिना दूसरी भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है.
यह विवाद दिसंबर 2025 के एक ऐसे ही मामले के बाद सामने आया है, जब असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) के 613 पदों के लिए सिर्फ 151 उम्मीदवार ही इंटरव्यू के लिए चुने गए थे.
कांग्रेस विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इन नतीजों को युवाओं के करियर के साथ “क्रूर मज़ाक” बताया.
उन्होंने कहा, “2019 में शुरू हुई भर्ती प्रक्रिया को सात साल हो गए और 1,711 पदों के लिए सिर्फ 39 योग्य कैंडिडेट्स मिले. यह या तो भारी अक्षमता है या युवाओं के रोज़गार को जानबूझकर नुकसान पहुंचाना.”
INLD नेता अभय सिंह चौटाला ने इसे नौकरियां न देने की “सुनियोजित साज़िश” बताया.
उन्होंने कहा, “जो कैंडिडेट्स विश्वविद्यालयों में टॉपर रहे हैं और यूजीसी नेट जैसी राष्ट्रीय परीक्षाएं पास कर चुके हैं, उन्हें एचपीएससी अयोग्य बता रहा है. परीक्षा कराने और मूल्यांकन करने के तरीके में कुछ बुनियादी गड़बड़ है.”
2019 से शुरू हुई कहानी
भर्ती की यह पूरी कहानी 2019 में शुरू हुई, जब हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने 1,711 PGT कंप्यूटर साइंस पदों का विज्ञापन दिया, जिसमें 1,633 पद सामान्य हरियाणा कैडर के लिए और 78 पद मेवात कैडर के लिए थे. बाद में सरकार ने सभी पीजीटी भर्तियां एचपीएससी को सौंपने का फैसला किया, जिसके बाद आयोग ने 2023 में इन पदों का फिर से विज्ञापन दिया.
1,633 हरियाणा कैडर पदों में से 859 सामान्य वर्ग, 327 अनुसूचित जाति, 163 BC-A, 82 BC-B और 163 आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लिए थे. 78 मेवात कैडर पदों में 43 सामान्य, 15 SC, 8 BC-A, 4 BC-B और 8 EWS के लिए थे.
एचपीएससी द्वारा जारी नए विज्ञापन में एससी पदों के लिए अनिवार्य उप-वर्गीकरण—वंचित अनुसूचित जाति (डीएससी) और अन्य अनुसूचित जाति (ओएससी)—नहीं दिया गया है. अधिकारियों का कहना है कि यह “बाद में किया जाएगा.”
नई भर्ती में भी वही 35 प्रतिशत क्वालिफाइंग मानदंड रखा गया है, जिसकी वजह से पिछली परीक्षा में सिर्फ 39 कैंडिडेट्स ही पास हो पाए थे.
विज्ञापन में यह भी कहा गया है कि अगर प्रारंभिक परीक्षा में विज्ञापित पदों की संख्या से दोगुने से ज़्यादा कैंडिडेट्स पास भी हो जाएं, तब भी इंटरव्यू के लिए सिर्फ पदों की संख्या के दोगुने कैंडिडेट्स को ही बुलाया जाएगा.
एक महिला, जिनकी बेटी परीक्षा में फेल हो गई, उन्होंने कहा कि उनकी बेटी ने अपनी पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट डिविजन हासिल किया, लेकिन एचपीएससी की 35 प्रतिशत की सीमा पार नहीं कर पाई. उन्होंने कहा, “ऐसा कौन सा सिस्टम है जो लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले छात्रों को फेल घोषित कर देता है? मेरी बेटी ने HTET पास किया है, वह टॉपर रही है, लेकिन एचपीएससी के मुताबिक, वह योग्य नहीं है!”
मणिका आहूजा, जो पंजाब यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में डबल गोल्ड मेडलिस्ट हैं और एलएलबी व एलएलएम भी मेरिट के साथ कर चुकी हैं, दिसंबर में असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) की एचपीएससी की लिखित परीक्षा में भी फेल हो गई थीं.
उन्होंने कहा, “हममें से ज़्यादातर ने यूजीसी नेट/जेआरएफ जैसी राष्ट्रीय पात्रता परीक्षाएं और पीजीटी के लिए HTET पास किया है. असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) के 613 पदों के लिए सिर्फ 151 कैंडिडेट्स इंटरव्यू के लिए चुने गए और अब 1,711 PGT कंप्यूटर साइंस पदों के लिए सिर्फ 39 पास हुए हैं.”
उन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं की थर्ड-पार्टी जांच और नतीजों की समीक्षा की मांग की.
उन्होंने कहा, “यह बेहद परेशान करने वाला है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय में हमेशा टॉपर रहे कैंडिडेट्स को सरकारी नौकरी के लायक नहीं माना जा रहा. एचपीएससी को चाहिए कि मूल रूप से विज्ञापित पदों की संख्या से दोगुने कैंडिडेट्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाए.”
एचपीएससी सचिव और 2009 बैच के आईएएस अधिकारी मुकेश आहूजा ने कहा कि यह कहना गलत होगा कि आयोग सभी विषयों में योग्य कैंडिडेट नहीं ढूंढ पाया. उन्होंने बताया कि एचपीएससी ने 20 विषयों में पीजीटी और 26 विषयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पदों के लिए विज्ञापन दिया था और कुल 92 अलग-अलग परीक्षाएं कराई गईं.
उन्होंने कहा, “आयोग को सिर्फ असिस्टेंट प्रोफेसर (अंग्रेज़ी) और पीजीटी (कंप्यूटर साइंस) में योग्य उम्मीदवार ढूंढने में समस्या आई. एक-दो विषयों को छोड़कर बाकी सभी में इंटरव्यू के लिए योग्य उम्मीदवारों की संख्या पदों से कहीं ज़्यादा थी.”
उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा के लिए न्यूनतम पासिंग मार्क्स 35 प्रतिशत तय हैं और जो उम्मीदवार इसे हासिल नहीं करते, वे इंटरव्यू में नहीं जा सकते.
आहूजा ने कहा कि विश्वविद्यालय परीक्षाओं और एचपीएससी भर्ती परीक्षा की तुलना करने से पहले उम्मीदवारों को समझना चाहिए कि विश्वविद्यालय परीक्षाएं योग्यता आधारित होती हैं, जबकि भर्ती परीक्षाएं छंटनी आधारित होती हैं. इनका मकसद चरण-दर-चरण उम्मीदवारों को छांटना होता है ताकि किसी खास नौकरी के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति चुना जा सके.
उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाएं सिर्फ विषय की समझ और ज्ञान की गहराई ही नहीं, बल्कि योग्यता, समस्या सुलझाने की क्षमता, ज्ञान का उपयोग, गति, सटीकता और कभी-कभी दबाव में निर्णय लेने की क्षमता भी परखती हैं.
कंप्यूटर साइंस परीक्षा के बारे में आहूजा ने कहा कि लिखित परीक्षा के बाद उम्मीदवारों ने शिकायत की थी कि पेपर कठिन था और सिलेबस से बाहर के सवाल थे. मामला अदालत पहुंचा और HPSC ने शिकायतों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई.
उन्होंने कहा, “विशेषज्ञ समिति ने पाया कि पेपर कठिन होना कोई बहाना नहीं है. हालांकि, सिलेबस से बाहर सवालों के मामले में यह पाया गया कि 15 में से एक सवाल सिलेबस से बाहर था. हमने उस सवाल को हटा दिया और 150 की बजाय 140 अंकों में मूल्यांकन किया.”
5 फरवरी को नतीजे घोषित होने के बाद सिर्फ 39 उम्मीदवार ही 35 प्रतिशत से ऊपर अंक ला पाए.
उन्होंने कहा, “विचार-विमर्श के बाद हमने 1,672 पदों के लिए फिर से विज्ञापन देने का फैसला किया है ताकि एचपीएससी मूल रूप से विज्ञापित 1,711 पदों के लिए सिफारिशें दे सके.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
