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Saturday, 7 February, 2026
होमदेशमेघालय की अवैध खदान में विस्फोट: 25 की मौत, ज़हरीली गैसों और कमजोर दीवारों से बचाव अभियान बाधित

मेघालय की अवैध खदान में विस्फोट: 25 की मौत, ज़हरीली गैसों और कमजोर दीवारों से बचाव अभियान बाधित

गुरुवार को जहां विस्फोट हुआ था, वहां से मजदूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए दो SDRF टीमें, तीन NDRF टीमें, एक विशेष बचाव दल, BSF, सेना और IAF के जवान स्टैंडबाय पर हैं.

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शिलांग: मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में बचाव अभियान लगातार जारी है. गुरुवार को एक अवैध खदान में विस्फोट हुआ था, जिसके बाद आग लग गई. इस खदान के अंदर अभी भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है. शुक्रवार देर शाम तक मरने वालों की संख्या बढ़कर 25 हो गई.

25 मृतकों में से 17 की पहचान हो चुकी है और उनके शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं.

जिस खदान में विस्फोट हुआ, वह मिंसंगट गांव की सीमा में आती है. यह जिला मुख्यालय ख्लिह्रियात से करीब 30 किलोमीटर दूर है. स्थानीय लोगों और इलाज करा रहे घायल मजदूरों का कहना है कि इस अवैध खदान के अंदर फंसे लोगों की संख्या 50 तक हो सकती है. हालांकि, मेघालय के डीजीपी इदाशिशा नोंग्रांग ने शुक्रवार को मीडिया को बताया कि इस समय खदान के अंदर फंसे मजदूरों की सही संख्या साफ नहीं है.

नजदीकी कस्बे के निवासियों ने दिप्रिंट को बताया कि अवैध खदान में काम करने वाले ज्यादातर लोग दिहाड़ी मजदूर थे और वे असम, पश्चिम बंगाल और यहां तक कि नेपाल से भी आते थे.

यह भी जानकारी मिली है कि दो एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) टीमें, तीन एनडीआरएफ (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) टीमें, एक विशेष बचाव दल, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), सेना और भारतीय वायुसेना (आईएएफ) के जवान, बचाए गए मजदूरों को एयरलिफ्ट करने के लिए स्टैंडबाय पर हैं.

लेकिन अवैध खदान के अंदर की स्थिति के कारण बचाव कार्य में दिक्कतें आ रही हैं. मौके पर मौजूद एक एनडीआरएफ के जवान ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट को बताया, “उन्हें (बचावकर्मियों को) इस तरह की मिट्टी का अनुभव नहीं है और खदान की दीवारें मजबूत नहीं हैं. इसके अलावा ज़हरीली गैसें भी हैं और सांस लेने के उपकरण के साथ भी बचाव कार्य करना बहुत मुश्किल हो रहा है.”

इस बीच, राज्य सरकार ने भी दो मंत्रियों को मौके पर भेजा है, ताकि वे अधिकारियों से मिलकर बचाव अभियान की स्थिति का जायजा ले सकें.

मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा द्वारा अवैध खदान चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के तुरंत बाद पुलिस ने फोर्मे चिरमांग और शमेही वार नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया. दोनों को अदालत में पेश किया गया और तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.

ख्लिह्रियात थाने में स्वतः संज्ञान लेते हुए एक एफआईआर भी दर्ज की गई. यह एफआईआर बीएनएस की धाराओं 105, 118(2) और 3(5), खनिज और खनन (विकास और विनियमन) अधिनियम की धाराओं 21 और 21(1) तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 के तहत दर्ज की गई है.

कार्यकर्ता एग्नेस खार्शींग ने दिप्रिंट से कहा, “यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है. सरकार इसे होने से रोक सकती थी. यह एक हत्या है.”

उन्होंने कहा, “2014 में एनजीटी द्वारा रैट होल माइनिंग पर प्रतिबंध लगने के बाद यह सब बंद हो जाना चाहिए था, लेकिन सालों से सरकार यह कहती रही कि यहां रैट होल माइनिंग नहीं हो रही है. इसने बहुत सी जानें ले ली हैं.”

खार्शींग ने जनवरी में सीबीआई निदेशक को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि राज्य पुलिस थांग्सको की एक अवैध खदान में हुए विस्फोट को छिपा रही है, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हुई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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