नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया की कंपनी एम्फीबियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (AAI), जो नागरिक और सैन्य इस्तेमाल के लिए एम्फीबियस विमान बनाती है, ने भारत में अपना एल्बाट्रॉस 2.0 पेश करने के लिए भारतीय कंपनी एपोजी एयरोस्पेस के साथ साझेदारी की है.
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब भारत द्वीपों की कनेक्टिविटी के लिए सीप्लेन को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है.
2026-27 के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सीप्लेन के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) का प्रस्ताव रखा था.
उन्होंने कहा था, “सीप्लेन वीजीएफ स्कीम भी शुरू की जाएगी, ताकि ऑपरेशंस को समर्थन दिया जा सके.” VGF भारत सरकार की एक वित्तीय व्यवस्था है, जो पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप परियोजनाओं को समर्थन देने के लिए इस्तेमाल होती है.
राष्ट्रीय राजधानी में हुई साझेदारी की घोषणा वाले एक कार्यक्रम में भारतीय कंपनी ने बताया कि उसने करीब 3,500 करोड़ रुपये के सौदे में 15 सीप्लेन का ऑर्डर दिया है.
दोनों कंपनियों ने एक ऐसी साझेदारी की भी घोषणा की, जिसके तहत एपोजी एयरोस्पेस भारतीय उपमहाद्वीप के लिए AAI की एक्सक्लूसिव अधिकृत प्रतिनिधि साझेदार होगी. यह साझेदारी प्रतिबंधित श्रेणी में रक्षा और सरकारी जरूरतों को कवर करेगी.
यह साझेदारी रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल, प्रशिक्षण और क्षमता विकास, सिमुलेशन, और विमान के सैन्यीकरण के लिए एंड-टू-एंड सिस्टम इंटीग्रेशन तक फैली होगी.
एल्बाट्रॉस 2.0 क्या है
एल्बाट्रॉस 2.0 दुनिया का पहला और एकमात्र ऐसा ट्रांसपोर्ट कैटेगरी एम्फीबियस विमान है, जिसे 19 सीटों से ज्यादा (28 सीटों तक) के लिए FAA या EASA से सर्टिफिकेशन मिला है. यह रजिस्टर्ड पैसेंजर ट्रांसपोर्ट (RPT) सेक्टर में आता है.
यह विमान एक बार में 28 यात्रियों को ले जा सकता है और इसे अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन और यूरोपियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी के मानकों के तहत प्रमाणित किया गया है.
विमानों के ऑर्डर के अलावा, एपोजी ने कहा कि वह भारत में मैन्युफैक्चरिंग, मेंटेनेंस और ओवरहॉल फैसिलिटी, ट्रेनिंग और सिमुलेशन इंफ्रास्ट्रक्चर, और एडवांस्ड सिस्टम्स इंटीग्रेशन क्षमताएं खड़ी करने के लिए अतिरिक्त 500 करोड़ रुपये का निवेश करेगा.
यह निवेश विमान के सिविल और मिलिट्री दोनों वेरिएंट्स को सपोर्ट करेगा और एयरोस्पेस प्रोडक्शन को स्थानीय स्तर पर विकसित करने की व्यापक कोशिश का हिस्सा होगा.
एम्फीबियन एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट और चीफ एग्जीक्यूटिव गोपी रेड्डी ने कहा कि पहला एल्बाट्रॉस 2.0 विमान अगले 18 से 24 महीनों में भारतीय बाजार में आने की उम्मीद है.
ये घोषणाएं ऐसे समय में हुई हैं, जब भारत सरकार तटीय इलाकों, द्वीपों और दूरदराज के क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने पर जोर दे रही है, और “मेक इन इंडिया” और रक्षा स्वदेशीकरण पहलों के तहत आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दे रही है.
एम्फीबियस विमानों को भारत की बढ़ती “ब्लू इकॉनमी” के लिए भी अहम माना जा रहा है. इसमें समुद्री निगरानी, आपदा राहत और द्वीप विकास जैसे क्षेत्र शामिल हैं.
AAI के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन खोआ होआंग ने कहा कि लंबे समय का लक्ष्य भारत में एल्बाट्रॉस की पूरी मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली लाइन स्थापित करना है. उन्होंने कहा, “असेंबली लाइन लगाने को लेकर बातचीत और योजना चल रही है.” कंपनी की फिलहाल अमेरिका में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है.
एपोजी एयरोस्पेस ने पहले ही एम्फीबियन एयरक्राफ्ट होल्डिंग्स, जो AAI की पैरेंट कंपनी है, में करीब 65 करोड़ रुपये का निवेश किया है. दोनों पक्षों ने इसे एक लंबी अवधि की रणनीतिक साझेदारी बताया है.
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