नई दिल्ली: सरकारी कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL, भारत के 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA कार्यक्रम के तहत पांच प्रोटोटाइप बनाने की करीब 15,000 करोड़ रुपये की परियोजना से बाहर हो गई है.
अब इस प्रोजेक्ट को हासिल करने की दौड़ में टाटा ग्रुप सबसे आगे है, जो अकेला बोलीदाता है. इसके बाद भारत फोर्ज लिमिटेड के नेतृत्व वाला एक कंसोर्टियम है, जो कल्याणी ग्रुप का हिस्सा है. इसमें रक्षा क्षेत्र की सार्वजनिक कंपनी BEML लिमिटेड और निजी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी डेटा पैटर्न्स इंडिया लिमिटेड शामिल हैं.
इसके अलावा निजी कंपनी एलएंडटी के नेतृत्व वाला एक और कंसोर्टियम भी दौड़ में है, जिसमें सरकारी कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड यानी BEL और निजी कंपनी डायनामैटिक्स टेक्नोलॉजीज शामिल हैं.
इन सभी कंपनियों में से सिर्फ टाटा के पास फाइनल असेंबली लाइन लगाने का अनुभव है. टाटा ने यह काम एयरबस के साथ मिलकर C-295 ट्रांसपोर्ट विमान के लिए किया है.
बाकी कंपनियों को, टाटा समेत, अलग-अलग विदेशी ओरिजिनल मैन्युफैक्चरर्स के लिए और तेजस कार्यक्रम के तहत पुर्जे, पंख और फ्यूजलेज बनाने का अनुभव है.
रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों ने बताया कि फाइनल लिस्ट में पहुंची तीनों निजी कंपनियों के बीच तकनीकी रूप से बहुत ज्यादा अंतर नहीं है. अंतिम चयन इस बात पर होगा कि सबसे कम बोली किसने लगाई है.
इसका मतलब यह है कि भारत का 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट एक भारतीय निजी कंपनी बनाएगी, जो DRDO की एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी यानी ADA के साथ मिलकर काम करेगी.
यह एक बहुत बड़ा कॉन्ट्रैक्ट होगा और इससे देश में फाइटर जेट बनाने की दो अलग-अलग उत्पादन लाइनें बनेंगी. एक HAL के पास, जो तेजस फ्लीट बनाएगी, और दूसरी किसी निजी कंपनी के पास, जो AMCA बनाएगी.
पिछले साल मई में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने AMCA प्रोजेक्ट को सरकारी और निजी दोनों तरह की कंपनियों के लिए खोलने का फैसला किया था.
यह पुराने चलन के खिलाफ था, क्योंकि आमतौर पर HAL को ही उत्पादन एजेंसी माना जाता और वह बाद में निजी कंपनियों के साथ पुर्जे और पार्ट्स बनाने के लिए समझौते करती.
सूत्रों ने बताया कि माना गया कि HAL के पास पहले से ही बहुत बड़ा ऑर्डर बुक है और उसे उन्हीं ऑर्डर्स की डिलीवरी पर ध्यान देना चाहिए. यह भी महसूस किया गया कि देश में फाइटर जेट की एक समानांतर असेंबली लाइन होना जरूरी है.
कुल मिलाकर सात कंपनियां इस कॉन्ट्रैक्ट की दौड़ में थीं, जिससे उन्हें 2035 से शुरू होने वाले सीरीज प्रोडक्शन का हक मिल सकता था.
बाकी दावेदारों में अदाणी डिफेंस एंड एयरोस्पेस, निजी प्रिसीजन इंजीनियरिंग कंपनी MTAR टेक्नोलॉजीज के साथ, इंजीनियरिंग सॉल्यूशंस कंपनी गुडलुक इंडिया लिमिटेड, रक्षा कंपनी एक्सिसकैड्स टेक्नोलॉजीज लिमिटेड, सरकारी कंपनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस तिरुवनंतपुरम लिमिटेड, और एक अन्य गठजोड़ जिसमें ICOMM टेल लिमिटेड, जो मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड की ग्रुप कंपनी है, और PTC इंडस्ट्रीज लिमिटेड शामिल थीं.
सूत्रों ने बताया कि HAL के दौड़ से बाहर होने की वजह राजस्व और ऑर्डर बुक का गणित था, जबकि कुछ लोग उसे आगे मान रहे थे.
नियमों के मुताबिक, ऑर्डर बुक का आकार कंपनी के राजस्व से तीन गुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए. HAL के मामले में यह सीमा पार हो रही थी.
आगे क्या होगा
सूत्रों ने बताया कि तीन महीने के भीतर अंतिम विजेता चुन लिया जाएगा और कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत कर दिए जाएंगे.
यह पूछे जाने पर कि क्या कंपनियां पहले अपनी असेंबली लाइन लगाएंगी, क्योंकि इसमें समय लगेगा, सूत्रों ने कहा कि इसके लिए कुछ व्यवस्थाएं की जा रही हैं.
हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ये व्यवस्थाएं क्या होंगी.
सूत्रों के मुताबिक, प्रोटोटाइप के विकास के अलग-अलग चरणों, जैसे टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन, के लिए ADA की सुविधाओं का इस्तेमाल किया जाएगा. तय टाइमलाइन के अनुसार, भारत के अपने 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट के पांचों प्रोटोटाइप 2031 तक तैयार हो जाएंगे. पहला प्रोटोटाइप 2028 तक GE 414 इंजन के साथ सामने आने की उम्मीद है.
भारतीय वायुसेना यानी IAF की योजना है कि 2035 से, जब सीरीज प्रोडक्शन शुरू होगा, AMCA के सात स्क्वाड्रन शामिल किए जाएं.
पिछले साल ADA की ओर से जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट के मुताबिक, AMCA के विकास, प्रोटोटाइप, फ्लाइट टेस्ट और सर्टिफिकेशन का पूरा कॉन्ट्रैक्ट प्रभावी तारीख से आठ साल से ज्यादा का नहीं होगा.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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