नई दिल्ली: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान चार दिन की आधिकारिक यात्रा पर आर्मेनिया में हैं. इस दौरे का मकसद रक्षा सहयोग को और गहरा करना है. हाल के वर्षों में आर्मेनिया अपने सैन्य आधुनिकीकरण के लिए भारत की ओर रुख कर रहा है.
जनरल चौहान 1 फरवरी को एक रक्षा प्रतिनिधिमंडल के साथ आर्मेनिया पहुंचे. इस दौरान वह आर्मेनिया के नागरिक और सैन्य नेतृत्व से मुलाकात करेंगे.
उनकी प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान से भी मुलाकात तय है.
रक्षा और सुरक्षा से जुड़े सूत्रों ने बताया कि इस दौरे का मुख्य फोकस रक्षा सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना है.
जब पूछा गया कि दोनों देश किन क्षेत्रों में साथ काम कर सकते हैं, तो सूत्रों ने निगरानी, अंतरिक्ष, साइबर, रणनीतिक संचार, रक्षा प्रणालियों और प्रशिक्षण का नाम लिया.
आर्मेनिया भारत से क्या खरीदना चाहता है, इस सवाल पर सूत्रों ने कहा कि यह दौरा इसी बात को समझने के लिए है कि आर्मेनिया की ज़रूरतें क्या हैं और भारत क्या पेश कर सकता है.
पिछले कुछ वर्षों में, जैसा कि दिप्रिंट कई बार रिपोर्ट कर चुका है, आर्मेनिया ने भारत से बड़ी संख्या में रक्षा उपकरण खरीदे हैं. इनमें दो तरह की तोपें, मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर, एयर डिफेंस सिस्टम, स्नाइपर राइफल, वेपन लोकेटिंग रडार, गोला-बारूद और एंटी-ड्रोन हथियार शामिल हैं.
रिपोर्ट के मुताबिक, आर्मेनिया ने भारत से भारतीय मिसाइलों की संभावित खरीद के लिए भी संपर्क किया है. इनमें स्वदेशी बियॉन्ड विजुअल रेंज अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल और अपने सुखोई-30 विमानों के अपग्रेड का विकल्प शामिल है.
आर्मेनिया भारत के लिए एक अहम रक्षा निर्यात गंतव्य बनकर उभरा है. जहां अमेरिका भारत से पुर्जे आयात करता है, वहीं आर्मेनिया भारत से पूरे रक्षा सिस्टम आयात करता है.
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