scorecardresearch
Sunday, 1 February, 2026
होमदेशअर्थजगत‘अंधा’ बजट: कांग्रेस ने कहा—केंद्र ने रोजगार, विकास और आर्थिक सर्वे को नज़रअंदाज़ किया

‘अंधा’ बजट: कांग्रेस ने कहा—केंद्र ने रोजगार, विकास और आर्थिक सर्वे को नज़रअंदाज़ किया

चिदंबरम ने कहा, ‘अगर सरकार ने आर्थिक सर्वे पढ़ा होता, तो लगता है उसने उसे नज़रअंदाज़ करने का फैसला किया है और लोगों पर शब्द—अक्सर संक्षिप्त शब्द (एक्रोनिम)—फेंकने की अपनी पसंदीदा आदत पर लौट आई.’

Text Size:

नई दिल्ली: कांग्रेस ने रविवार को केंद्रीय बजट को “भारत के असली संकटों से अंधा” बताया. पार्टी ने सरकार पर आरोप लगाया कि उसने आर्थिक सर्वे में बताए गए मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया और सामाजिक व विकास से जुड़े अहम खर्चों में कटौती की.

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “बेरोजगार युवा. गिरता मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर. निवेशक पूंजी बाहर निकाल रहे हैं. घरेलू बचत तेज़ी से गिर रही है. किसान परेशान हैं. दुनिया भर में आने वाले झटके—सबको नज़रअंदाज़ किया गया. ऐसा बजट जो रास्ता बदलने से इनकार करता है और भारत के असली संकटों से अंधा है.”

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार देश के सामने मौजूद बड़े आर्थिक मुद्दों से निपटने में नाकाम रही है. उन्होंने कहा कि कमज़ोर वर्गों को कोई राहत नहीं दी गई और बेरोजगारी का कोई समाधान नहीं बताया गया.

खरगे ने कहा, “मोदी सरकार के पास नए विचार खत्म हो चुके हैं. यह बजट जितने जवाब देता है, उससे ज्यादा सवाल खड़े करता है—चाहे वे भारत की आर्थिक, सामाजिक या राजनीतिक चुनौतियां हों. गरीबों के लिए इसमें कुछ भी नहीं है. महंगाई पर काबू पाने के लिए कोई समाधान, कोई सकारात्मक सुझाव या ठोस कदम नहीं बताए गए.”

कांग्रेस नेता ने आगे कहा, “आर्थिक सर्वे बताता है कि व्यापार में अनिश्चितता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन बजट में इसका मुश्किल से जिक्र है. इसी तरह रुपये की गिरती कीमत से निपटने की कोई योजना नहीं है…बजट में उपभोक्ता मांग को बढ़ाने की कोई मंशा नहीं दिखती. घरेलू बचत में गिरावट और निजी कर्ज के बढ़ते बोझ को भी नजरअंदाज किया गया है.”

खरगे ने कहा, “असमानता ब्रिटिश राज के समय के स्तर से भी आगे निकल गई है. लेकिन बजट में इसका ज़िक्र तक नहीं है. न ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग या अल्पसंख्यकों के लिए किसी तरह की मदद का प्रावधान किया गया है.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि बजट भाषण ने “हर प्री-बजट टिप्पणीकार, लेखक और अर्थशास्त्र के छात्र” को हैरान कर दिया. उन्होंने कहा कि सरकार ने 29 फरवरी को जारी 2025-26 के आर्थिक सर्वे को “पूरी तरह से” नज़रअंदाज़ कर दिया.

चिदंबरम ने कहा, “अगर सरकार ने आर्थिक सर्वे पढ़ा होता, तो लगता है उसने उसे नजरअंदाज करने का फैसला किया और लोगों पर शब्द—अक्सर एक्रोनिम—फेंकने की अपनी पसंदीदा आदत पर लौट आई.”

चिदंबरम ने बताया कि जिन मुद्दों का बजट भाषण में ज़िक्र नहीं हुआ, उनमें अमेरिका द्वारा लगाए गए दंडात्मक टैरिफ से निर्यातकों पर पड़ रहा दबाव, लंबे समय से चल रहे वैश्विक व्यापार संघर्ष जिनका निवेश पर असर पड़ रहा है, चीन के साथ बढ़ता व्यापार घाटा, और लगभग 30 प्रतिशत के आसपास कम सकल स्थायी पूंजी निर्माण शामिल हैं, जो निजी क्षेत्र की निवेश करने में हिचक को दिखाता है.

उन्होंने कहा, “हमारा फैसला यह है कि बजट भाषण और बजट—दोनों—आर्थिक रणनीति और आर्थिक नेतृत्व की कसौटी पर खरे नहीं उतरते.”

उन्होंने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) को लेकर अनिश्चितता, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के लगातार बाहर जाने, FRBM (फिस्कल रिस्पॉन्सिबिलिटी एंड बजट मैनेजमेंट) लक्ष्यों के उल्लंघन के साथ ऊंचे राजकोषीय और राजस्व घाटे के कारण राजकोषीय सुधार की धीमी रफ्तार, और आधिकारिक महंगाई आंकड़ों व “घरेलू खर्च की सच्चाई” के बीच बढ़ते अंतर की ओर भी इशारा किया.

राजकोषीय प्रबंधन पर चिदंबरम ने कहा कि “एक अकाउंटेंट के मानकों से भी” 2025-26 में सरकार का प्रदर्शन खराब रहा. उन्होंने बताया कि राजस्व प्राप्तियों में 78,086 करोड़ रुपये की कमी रही और कुल खर्च में 1,00,503 करोड़ रुपये की कमी आई. इसमें राजस्व खर्च 75,168 करोड़ रुपये कम रहा और पूंजीगत खर्च में 1,44,376 करोड़ रुपये की कटौती हुई. इसमें केंद्र का पूंजीगत खर्च 25,335 करोड़ रुपये और राज्यों का पूंजीगत खर्च 1,19,041 करोड़ रुपये कम किया गया.

उन्होंने कहा कि केंद्र का पूंजीगत खर्च 2024-25 में GDP के 3.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में 3.1 प्रतिशत रह गया, लेकिन बजट भाषण में इसका कोई कारण नहीं बताया गया.

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजस्व खर्च में कटौती का असर आम लोगों से जुड़े क्षेत्रों पर ज्यादा पड़ा है—जैसे ग्रामीण विकास, शहरी विकास, सामाजिक कल्याण, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य. उन्होंने जल जीवन मिशन के बजट में बड़ी कटौती की ओर भी ध्यान दिलाया, जो संशोधित अनुमान में 67,000 करोड़ रुपये से घटकर 17,000 करोड़ रुपये रह गया.

चिदंबरम ने पूछा, “2026-27 में इसे बढ़ाकर 67,670 करोड़ रुपये कर दिया गया है, लेकिन इस आंकड़े की क्या विश्वसनीयता है?”

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भारत भर में घोषित नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से केरल को बाहर रखने पर केंद्रीय बजट की आलोचना की.

एक्स पर पोस्ट में थरूर ने कहा, “पूरे भारत में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा देश के लिए स्वागतयोग्य है, लेकिन केरल को बाहर रखना बिल्कुल गलत है. हम एक घनी आबादी वाला राज्य हैं, जिसे आधुनिक परिवहन की सख्त जरूरत है… हमें असली ट्रेनें चाहिए, नए एक्रोनिम नहीं.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

share & View comments