नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने 2024 में उत्तर-पूर्वी भारत में उद्योग और निवेश को तेज़ करने के लिए एक नई नीति शुरू करने का वादा किया था, लेकिन रविवार को पेश किए गए वार्षिक बजट में इसका असर कम ही दिखाई दिया. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रमुख UNNATI (उत्तर पूर्व परिवर्तनकारी औद्योगीकरण योजना) के तहत केवल 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
मार्च 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने UNNATI योजना को मंज़ूरी दी थी. इसके तहत 10 वर्षों में 10,037 करोड़ रुपये खर्च करने और कम से कम 83,000 प्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा करने का वादा किया गया था.
मंत्रालय के रिकॉर्ड के मुताबिक, अब तक इस योजना के तहत 792 आवेदन मिले हैं. इनमें से 327 को मंज़ूरी दी गई है और 242 आवेदन प्रक्रिया में हैं. केंद्र सरकार ने पहले कहा था कि इस योजना के तहत कुल 2,180 आवेदन आने की उम्मीद है.
UNNATI योजना ने 2017 में शुरू की गई नॉर्थ ईस्ट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम (NEIDS) की जगह ली है, जो पांच साल तक लागू रही थी.
उत्तर-पूर्व क्षेत्र की कई औद्योगिक संस्थाओं ने NEIDS को मोदी सरकार की पहली औद्योगिक नीति बताते हुए इसे “फ्लॉप शो” कहा था. एक संसदीय समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि 2019-20 में इस योजना के लिए सिर्फ 1 करोड़ रुपये ही दिए गए थे.
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए व्यय बजट के अनुसार, 2024-25 में UNNATI योजना के तहत 8.05 करोड़ रुपये खर्च किए गए. 2025-26 में योजना के लिए 175 करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन अंत में केवल 33 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए. वहीं 2026-27 के लिए अब 50 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.
UNNATI योजना का संचालन वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय करता है, जिसके मंत्री पीयूष गोयल हैं.
फरवरी 2025 में गुवाहाटी में हुए एडवांटेज असम इन्वेस्टमेंट समिट को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि असम दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत के बीच एक अहम प्रवेश द्वार बनकर उभर रहा है और “इस क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए” सरकार ने UNNATI योजना शुरू की है.
उन्होंने कहा था कि यह योजना असम सहित पूरे उत्तर-पूर्व क्षेत्र में उद्योग, निवेश और पर्यटन को तेज़ करेगी. उत्तर-पूर्व से जुड़ी अन्य प्रमुख योजनाएं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) के अंतर्गत आती हैं, जिसका नेतृत्व ज्योतिरादित्य सिंधिया कर रहे हैं.
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए DoNER को 6,812 करोड़ रुपये दिए गए हैं. 2025-26 में मंत्रालय को 5,915 करोड़ रुपये आवंटित हुए थे, जिनमें से 4,479 करोड़ रुपये खर्च किए गए. वहीं 2024-25 में 3,370 करोड़ रुपये खर्च हुए थे.
DoNER के तहत दो प्रमुख योजनाएं हैं—प्रधानमंत्री विकास पहल (PM-DevINE) और नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS).
PM-DevINE योजना के तहत क्षेत्रीय ज़रूरतों के अनुसार इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक विकास परियोजनाओं को फंड दिया जाता है. इस योजना के लिए 2,300 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. 2025-26 में इसके लिए 2,296 करोड़ रुपये रखे गए थे, लेकिन बाद में इसे घटाकर 1,600 करोड़ रुपये कर दिया गया, जिससे वास्तविक खर्च में कमी का संकेत मिलता है.
DoNER का दूसरा बड़ा खर्च NESIDS योजना के तहत हुआ, जिसे 2,500 करोड़ रुपये मिले हैं. यह योजना पानी की आपूर्ति, बिजली और कनेक्टिविटी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए वित्तीय सहायता देती है, खासकर पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से. 2025-26 में इस योजना के लिए 2,481 करोड़ रुपये आवंटित थे, लेकिन खर्च केवल 1,600 करोड़ रुपये ही हुआ.
बजट में उत्तर-पूर्व क्षेत्र के लिए कोई बड़ी नई घोषणा नहीं की गई, सिवाय बौद्ध सर्किट के विकास के प्रस्ताव के.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, “उत्तर-पूर्वी क्षेत्र थेरवाद और महायान/वज्रयान परंपराओं का सभ्यतागत संगम है. मैं अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मणिपुर, मिज़ोरम और त्रिपुरा में बौद्ध सर्किट के विकास के लिए एक योजना शुरू करने का प्रस्ताव रखती हूं. इस योजना में मंदिरों और मठों का संरक्षण, तीर्थ व्याख्या केंद्र, कनेक्टिविटी और तीर्थ यात्रियों की सुविधाएं शामिल होंगी.”
इसके अलावा सरकार उत्तर-पूर्व क्षेत्र में पाई जाने वाली उच्च-मूल्य वाली फसल अगर (Agar) पेड़ को भी समर्थन देगी, जिसकी सबसे अधिक संख्या असम में है. सरकार तेज़पुर स्थित नेशनल मेंटल हेल्थ इंस्टीट्यूट को क्षेत्रीय शीर्ष संस्थान (रीजनल एपेक्स इंस्टीट्यूशन) के रूप में अपग्रेड करने की भी योजना बना रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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