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Sunday, 1 February, 2026
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बजट 2026 का फोकस माउंटेन ट्रेल टूरिज्म पर, राज्य सरकारों के लिए बड़ी परीक्षा

निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित प्रोजेक्ट्स को मौजूदा टूरिज्म मिनिस्ट्री की डेस्टिनेशन डेवलपमेंट स्कीम, जिसमें स्वदेश दर्शन 2.0 भी शामिल है, के ज़रिए लागू किए जाने की संभावना है.

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नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस साल अपने बजट भाषण में ट्रेकिंग और हाइकिंग को बढ़ावा देने के लिए पहाड़ी ट्रेल विकसित करने का खास तौर पर जिक्र किया. यूनियन बजट 2026 में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर, और पूर्वी व पश्चिमी घाट के कुछ इलाकों में “पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ” माउंटेन ट्रेल बनाने का प्रस्ताव है. इन ट्रेल का मकसद ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देना और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना है.

सीतारमण ने कहा, “भारत के पास विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग अनुभव देने की क्षमता और अवसर है. हम हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर में, पूर्वी घाट के अराकू वैली और पश्चिमी घाट के पोधिगई मलै में पर्यावरण के लिहाज से टिकाऊ माउंटेन ट्रेल विकसित करेंगे.”

यह कोई नए टूरिज्म प्रोग्राम का लॉन्च नहीं था. यह एक पॉलिसी सिग्नल था, न कि कोई खास फंडिंग की घोषणा.

कोविड-19 के बाद भारत में माउंटेन टूरिज्म फिर से पटरी पर लौट आया है, जिसमें पहाड़ी इलाकों में बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग और रिवर राफ्टिंग जैसे माउंटेन स्पोर्ट्स शामिल हैं. इससे बीर, मनाली और ऋषिकेश जैसे इलाकों में घरेलू एडवेंचर टूरिज्म और नेचर ट्रैवल बढ़ा है, लेकिन हिमालय के कई दूरदराज के इलाके अभी भी अछूते हैं. ये ट्रेल्स वहां टूरिज्म इंडस्ट्री को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं.

सरकार पिछले कुछ वर्षों से स्वदेश दर्शन और प्रशाद जैसी लॉन्ग टर्म योजनाओं के जरिए पर्यटन उद्योग को बढ़ाने की कोशिश कर रही है. मंत्रालय की इकोटूरिज्म के लिए राष्ट्रीय रणनीति (2022) और सस्टेनेबल टूरिज्म के लिए राष्ट्रीय रणनीति (2022) में कम्युनिटी की आजीविका, वहन क्षमता और इकोसिस्टम की सुरक्षा पर ज़ोर दिया गया है. पर्यटन मंत्रियों ने विदेशी पर्वतारोहियों को आमंत्रित कर और बड़े हिमालयन ट्रेल का प्रस्ताव रखकर भारत को वैश्विक एडवेंचर डेस्टिनेशन के तौर पर पेश किया है.

2015 में शुरू की गई स्वदेश दर्शन योजना, जिसे बाद में स्वदेश दर्शन 2.0 में बदला गया, ट्रेल विकास, गाइडों की ट्रेनिंग, लास्ट माइल कनेक्टिविटी और साइन बोर्ड जैसी पर्यटन अवसंरचना को फंड देती है.

स्वदेश दर्शन 2.0 के तहत 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की दर्जनों परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, ताकि टिकाऊ और जिम्मेदार पर्यटन ढांचे को मजबूत किया जा सके. हाल के वर्षों में हिमाचल और उत्तराखंड के काजा और रकछम-चितकुल जैसे इलाकों के लिए भी मंजूरी मिल चुकी है.

चुनौतियां और असर

सीतारमण द्वारा घोषित परियोजनाएं पर्यटन मंत्रालय की मौजूदा डेस्टिनेशन डेवलपमेंट योजनाओं, जिनमें स्वदेश दर्शन 2.0 भी शामिल है, के जरिए लागू की जा सकती हैं.

हिमाचल प्रदेश के एनवायरनमेंटलिस्ट गुमान सिंह ने कहा, “फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये माउंटेन ट्रेल कैसे बनाए जाएंगे, सड़क नेटवर्क कैसा होगा और फंडिंग किस तरह होगी. सरकार को इन सभी बातों पर स्पष्ट होना होगा. योजना में विकेंद्रीकरण होना चाहिए और सरकार को यह समझना होगा कि इससे पहाड़ों में पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, इसलिए वहन क्षमता को लेकर सतर्क रहना जरूरी है.”

उन्होंने आगे कहा, “राज्य सरकारों के सामने पर्यटकों की बढ़ती संख्या, पर्यावरण मंजूरी, वहन क्षमता की सीमा और नाजुक पहाड़ी रास्तों के लंबे समय तक रखरखाव के बीच संतुलन बनाने की चुनौती होगी. हमने हाल ही में मनाली में देखा कि किस तरह भीड़ पहाड़ों में घुस आई. वहां की आबादी करीब 80 लाख है, लेकिन हर साल लगभग 4 करोड़ पर्यटक आते हैं.”

माउंटेन ट्रेल का क्रियान्वयन इस बात पर निर्भर करेगा कि राज्य कितनी जल्दी परियोजना रिपोर्ट तैयार कर पाते हैं और पर्यटन अवसंरचना योजनाओं के तहत केंद्र से मंजूरी हासिल करते हैं.

पर्यटन मंत्रालय के एक सूत्र ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “राज्यों को तय रूट, जमीन का मालिकाना हक, वन्यजीव और वन से जुड़ी मंजूरियां लेनी होंगी. इसके लिए राज्यों और केंद्र के बीच, साथ ही वन विभाग और स्थानीय पंचायतों के साथ मजबूत समन्वय जरूरी होगा. समयसीमा काफी हद तक राज्य की क्षमता पर निर्भर करेगी, न कि सिर्फ केंद्र के निर्देशों पर.”

जिभी वैली टूरिज्म डेवलपमेंट एसोसिएशन के मुख्य सचिव ललित कुमार ने सतर्क आशावाद जताया.

उन्होंने कहा, “यह निश्चित रूप से पर्यटन क्षेत्र को मदद करेगा और रोजगार के अवसर पैदा करेगा, लेकिन इसके नतीजों पर भी ध्यान देना होगा. अगर हम टिकाऊ पर्यटन की बात कर रहे हैं, तो पर्यावरण, सामाजिक और सुरक्षा से जुड़े प्रभावों को भी शामिल करना होगा. पर्यटन और माउंटेन स्पोर्ट्स के कुछ हिस्सों में अवैध गतिविधियां हैं और निगरानी अब भी कमजोर है.”

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कहीं मात्रा आधारित पर्यटन को गुणवत्ता आधारित पर्यटन पर तरजीह तो नहीं दी जा रही. साथ ही उन्होंने आपदा प्रबंधन को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया, खासकर मनाली और कुल्लू जैसे इलाकों में, जहां तेज सड़क विस्तार ने 2023 और 2025 की आपदाओं के असर को और बढ़ा दिया.

उन्होंने कहा, “यह हिमाचल और अन्य हिमालयी क्षेत्रों में पर्यटन के लिए एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसके लिए ज्यादा समग्र दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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