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Sunday, 1 February, 2026
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‘चैंपियन’ MSME तैयार करना और 200 पुराने क्लस्टर्स को रिवाइव करना—बजट का मैन्युफैक्चरिंग पर जोर

बजट में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अस्थिर ग्लोबल हालात के बीच प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, फॉर्मल रोज़गार का विस्तार करने और भारत की कॉम्पिटिटिवनेस को बेहतर बनाने के लिए MSMEs को मज़बूत करना बहुत ज़रूरी है.

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नई दिल्ली: मैन्युफैक्चरिंग आधारित विकास और रोजगार को फिर से बढ़ावा देने का संकेत देते हुए, यूनियन बजट 2026-27 में माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) को सरकार की आर्थिक और रोजगार रणनीति के केंद्र में रखा गया है.

रविवार को अपना नौवां बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सात रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने का एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पेश किया. इससे उच्च मूल्य और तकनीक आधारित उद्योगों में घरेलू क्षमताएं विकसित करने की दिशा में बदलाव का संकेत मिलता है.

मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने से न केवल नए निवेश के जरिए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है, बल्कि पारंपरिक औद्योगिक केंद्रों को फिर से सक्रिय करने और छोटे उद्योगों के लिए वित्त तक पहुंच आसान करने में भी मदद मिलेगी.

सीतारमण ने अपने बजट भाषण में कहा, “मैं 200 पुराने औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने के लिए एक योजना लाने का प्रस्ताव रखती हूं, ताकि बुनियादी ढांचे और तकनीक के उन्नयन के जरिए उनकी लागत प्रतिस्पर्धा और दक्षता में सुधार किया जा सके.”

मैन्युफैक्चरिंग पर यह नया जोर सरकार के उस लक्ष्य की पृष्ठभूमि में है, जिसके तहत इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में योगदान मौजूदा करीब 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 2035 तक 25 प्रतिशत करने का लक्ष्य है.

यूनियन बजट 2026-27 में यह भी कहा गया है कि MSME को मजबूत करना उत्पादकता बढ़ाने, औपचारिक रोजगार का विस्तार करने और वैश्विक अनिश्चित हालात में भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता सुधारने के लिए बेहद जरूरी है.

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, MSME भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ये मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन का 35.4 प्रतिशत, निर्यात का 48.6 प्रतिशत और जीडीपी का 31.1 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं. 7.47 करोड़ से अधिक इकाइयों के जरिए करीब 32.8 करोड़ लोगों को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र, कृषि के बाद देश में रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है.

नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के डायरेक्टर मयंक अरोड़ा ने दिप्रिंट से कहा, “सरकार ने MSME सेक्टर को एक प्रमुख रोजगार सृजनकर्ता के रूप में पहचाना है, जो गैर-उत्पादक कृषि श्रम को गैर-कृषि उत्पादक गतिविधियों की ओर ले जाने में मदद करेगा.”

हालांकि, आक्रामक नीतिगत प्रयासों के बावजूद बजट दस्तावेज बताते हैं कि इस क्षेत्र के लिए आवंटन में बढ़ोतरी सीमित रही है. MSME के लिए बजट अनुमान 2025-26 के 23,168 करोड़ रुपये से बढ़कर 2026-27 में 24,566 करोड़ रुपये हुए हैं, यानी सिर्फ 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी.

2025-26 के लिए संशोधित अनुमान 12,096 करोड़ रुपये रहे, जो 2025-26 के बजट अनुमान के मुकाबले करीब 48 प्रतिशत की कम उपयोग को दर्शाता है.

मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार.

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी बजट की एक अहम घोषणा बायोफार्मा शक्ति पहल रही. इसके तहत पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. इसका उद्देश्य भारत को बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स का वैश्विक केंद्र बनाना है, साथ ही क्लिनिकल ट्रायल ढांचे और नियामक क्षमता का विस्तार करना है.

सरकार ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की भी घोषणा की है, जिसका फोकस उपकरण निर्माण, सामग्री, भारतीय बौद्धिक संपदा और कार्यबल विकास पर होगा. निवेशकों की मजबूत रुचि को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग योजना का आवंटन बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपये किया जाएगा.

अन्य उपायों में खनिज संपन्न राज्यों में रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाना, आयात पर निर्भरता कम करने के लिए नए केमिकल पार्क और पूंजीगत वस्तुओं के निर्माण को मजबूत करने की योजनाएं शामिल हैं.

कपड़ा जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में क्लस्टर आधुनिकीकरण, कौशल उन्नयन और मेगा टेक्सटाइल पार्कों का विकास किया जाएगा. इसके साथ ही खादी, हस्तशिल्प और खेल सामग्री निर्माण के लिए लक्षित पहलें भी होंगी.

अरोड़ा ने द प्रिंट से कहा, “इन क्षेत्रों को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकास के प्रमुख चालक के रूप में पहचाना गया है. ये नए दौर के क्षेत्र मैन्युफैक्चरिंग की गहराई बढ़ाएंगे और अस्थिर भू-राजनीतिक माहौल में भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को सुरक्षित करेंगे.”

‘चैंपियन’ MSME तैयार करना

बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ‘चैंपियन’ MSME बनाने के लिए तीन स्तरों वाली रणनीति अपनाएगी. इसमें 10,000 करोड़ रुपये के एसएमई ग्रोथ फंड के जरिए इक्विटी सपोर्ट शामिल है, जिसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले उद्यमों को विस्तार करने और वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ने में मदद करना है.

बजट में सेल्फ रिलायंट इंडिया यानी एसआरआई फंड में 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि देने की भी घोषणा की गई. इसका मकसद छोटे कारोबारों के लिए इक्विटी सपोर्ट को बनाए रखना है. सीतारमण ने कहा, “मैं 2021 में बनाए गए सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड में 2,000 करोड़ रुपये जोड़ने का प्रस्ताव रखती हूं, ताकि सूक्ष्म उद्यमों को समर्थन जारी रखा जा सके और उनकी जोखिम पूंजी तक पहुंच बनी रहे.”

2021 में शुरू किया गया एसआरआई फंड देश भर के MSME को इक्विटी फाइनेंसिंग के जरिए समर्थन देने के लिए बनाया गया है. यह उन उद्यमों को लक्ष्य बनाता है, जिनमें विस्तार की क्षमता और वित्तीय मजबूती है, ताकि वे बड़े यूनिट में बदल सकें.

तरलता की समस्या को दूर करने के लिए सीतारमण ने ट्रेड रिसीवेबल्स इलेक्ट्रॉनिक डिस्काउंटिंग सिस्टम यानी टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म के अधिक उपयोग की घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार टीआरईडीएस को और विस्तार देगी, जिसके जरिए अब तक 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा MSME तक पहुंच चुके हैं.

टीआरईडीएस एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है, जो MSME को उनके बकाया भुगतान को नकद में बदलकर कार्यशील पूंजी हासिल करने में मदद करता है. बजट में इसके विस्तार पर जोर छोटे कारोबारों के लिए तरलता सुधारने और फाइनेंसिंग के दबाव को कम करने के लिए है.

नांगिया ग्लोबल एडवाइजर्स के डायरेक्टर मयंक अरोड़ा ने कहा, “एसएमई ग्रोथ फंड का गठन MSME क्षेत्र में चैंपियन तैयार करेगा और यह एसएमई के लिए वही करेगा, जो पीएलआई योजनाओं ने बड़े कॉरपोरेट्स के लिए किया है. इससे अलग-अलग क्षेत्रों में पोर्टफोलियो को विविध बनाकर एसएमई को जोखिम पूंजी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.”

उन्होंने आगे कहा, “2021 में बनाए गए सेल्फ रिलायंट इंडिया फंड में अतिरिक्त राशि देने से उन एसएमई को भी समर्थन मिलेगा, जिन्हें पारंपरिक वित्तीय साधनों तक पहुंच में कठिनाई होती है.”

सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के सीनियर पॉलिसी एडवाइजर दीपक महेश्वरी ने कहा, “उत्पादन, रोजगार और निर्यात के लिहाज से MSME सेक्टर अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा है. पहले भी मुद्रा और अन्य योजनाएं लागू की गई हैं, लेकिन तीन स्तरों वाली यह रणनीति यानी एसएमई ग्रोथ फंड, एसआरआई फंड और टीआरईडीएस का अधिक उपयोग, एक स्वागत योग्य कदम है.”

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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