मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में पहले से ही एक संभावित उथल-पुथल बन रही थी, तभी इस हफ्ते उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई.
यह उथल-पुथल शायद कहीं ज्यादा सहज होती, अगर इसके मुख्य सूत्रधार उपमुख्यमंत्री पवार मौजूद होते. पार्टी सूत्रों ने ThePrint को बताया कि आने वाले जिला परिषद चुनावों की प्रक्रिया में लगभग एक हो चुकीं दोनों एनसीपी, चुनाव के बाद अजित पवार के निर्विवाद नेतृत्व में आधिकारिक रूप से एकजुट होने की बात कर रही थीं.
लेकिन अजित पवार की मौत ने इन योजनाओं पर धुंध डाल दी है. शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता जोर-शोर से फिर से एकजुट होने की वकालत कर रहे हैं, जबकि अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के नेता सतर्क रुख अपना रहे हैं. उनका कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता उपमुख्यमंत्री और पार्टी के विधायक दल के नेता का खाली पद भरना है.
अजित पवार की अनुपस्थिति का मतलब है कि अगर दोनों एनसीपी साथ आती हैं, तो उनके वरिष्ठ नेताओं के बीच शक्ति संतुलन अब अनिश्चित हो गया है.
शनिवार को एनसीपी के संस्थापक शरद पवार ने विलय की चर्चाओं से खुद को अलग करते हुए संकेत दिया कि अजित पवार की मौत से यह प्रक्रिया अब रुक सकती है.
उन्होंने पत्रकारों से कहा, “पिछले चार महीनों से अजित पवार और जयंत पाटिल के बीच संभावित पुनर्मिलन को लेकर कई बैठकें हुई थीं. अब एक दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना हो गई है, और ऐसा लगता है कि ये बातचीत अब बंद हो सकती है.”
हालांकि शरद पवार गुट के नेता इन योजनाओं को आगे बढ़ाने के इच्छुक हैं. उन्हें उम्मीद है कि वे अलग हुए गुट पर नियंत्रण हासिल कर सकेंगे और 2023 में अजित पवार के बगावत के बाद विभिन्न चुनावों में बार-बार हाशिए पर जाने के बाद पार्टी को फिर से खड़ा कर पाएंगे.
लेकिन अजित पवार खेमे के नेता विलय की स्थिति में अपनी सत्ता और पद खोने को लेकर चिंतित हैं, खासकर अपने नेता की मौत के बाद. इस हादसे से पार्टी और सरकार में कई अहम पद खाली हो गए हैं—पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, उपमुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और मंत्रिमंडल का एक और पद. पहले दो पद अजित पवार के पास थे, जबकि तीसरा पद दिसंबर में खाली हुआ था, जब नासिक की सत्र अदालत ने 1995 के एक मामले में विधायक माणिकराव कोकाटे की सजा बरकरार रखी थी और उन्हें पद छोड़ना पड़ा था.
राजनीतिक टिप्पणीकार अभय देशपांडे ने ThePrint से कहा, “एनसीपी के राज्य अध्यक्ष शशिकांत शिंदे से लेकर जयंत पाटिल, राजेश टोपे, अनिल देशमुख और अंकुश काकडे तक, शरद पवार एनसीपी के सभी नेता यह कह रहे हैं कि विलय की योजना तैयार हो चुकी थी और इसे आगे बढ़ना चाहिए. उनके लिए यह अलग हुए गुट पर नियंत्रण पाने का मौका है.”
उन्होंने आगे कहा, “हालांकि वे ऐसा तब तक नहीं कर पाएंगे, जब तक वे सत्ता में मौजूद महायुति में शामिल नहीं होते, क्योंकि कोई भी मौजूदा विधायक सत्ता छोड़कर विपक्ष में बैठने नहीं जाएगा.”
अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के वरिष्ठ नेता—सुनील तटकरे, प्रफुल पटेल और छगन भुजबल—शुक्रवार को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिले. इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बीजेपी, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी से बनी तीन-दलीय महायुति सरकार में पार्टी के तीन अहम पदों पर दावा सुनिश्चित करना था.
भुजबल ने कहा कि नेताओं ने अजित पवार की जगह उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार का नाम तय किया है. शनिवार दोपहर दो बजे विधायक दल की बैठक होगी, जिसमें विधायकों के औपचारिक रूप से सुनेत्रा पवार को विधायक दल का नेता चुने जाने की उम्मीद है. इसके बाद उनके उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की संभावना है.
शरद पवार ने कहा है कि उन्हें सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि यह “उनकी (अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी) पार्टी का आंतरिक फैसला है.”
अभय देशपांडे ने आगे कहा, “अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के नेता विलय की संभावना पर बात करने से बच रहे हैं, क्योंकि इससे उनकी पकड़ और उनका पद कमजोर हो जाएगा. इसलिए वे पहले अपने आंतरिक ढांचे को मजबूत करना चाहते हैं और अपना नेता व उपमुख्यमंत्री तय करना चाहते हैं.”
विलय की चर्चाएं
शरद पवार की एनसीपी के नेताओं ने रिकॉर्ड पर पुष्टि की है कि अजित पवार और शरद पवार एनसीपी के नेताओं के बीच कई बैठकें हुई थीं. इनमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे और वरिष्ठ विधायक जयंत पाटिल के बीच पुनर्मिलन पर काम करने को लेकर एक बैठक भी शामिल थी.
अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के एक सूत्र ने द प्रिंट को बताया, “आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए पश्चिमी महाराष्ट्र में उनके (शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी) ज्यादातर उम्मीदवार हमारे चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए व्यवहारिक तौर पर नेता और मतदाता दोनों ही दो एनसीपी को एक ही मान रहे हैं. चुनाव के बाद इसे औपचारिक रूप दिया जाना था.”
चुनाव 7 फरवरी को होने हैं.
अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के भीतर यह सोच थी कि विलय के बाद बनी एनसीपी महायुति में उन्हीं के नेतृत्व में बनी रहती. पहले उद्धृत स्रोत ने बताया कि शरद पवार की बेटी और बारामती से सांसद सुप्रिया सुले केंद्र में सक्रिय बनी रहतीं.
शरद पवार को हमेशा बीजेपी के साथ सीधे गठबंधन का विरोधी माना जाता रहा है. हालांकि, सूत्र ने कहा कि वह अजित पवार के नेतृत्व को स्वीकार करने और खुद राजनीति से पीछे हटने के लिए तैयार हो सकते थे. “कम से कम हमें यही समझ थी कि आगे चीजें इसी तरह बढ़ेंगी.”
शरद पवार का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल में खत्म होने वाला है. 85 वर्षीय नेता के बारे में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें कुछ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, और वह नगर निगम चुनावों और आने वाले ग्रामीण निकाय चुनावों के प्रचार से दूर रहे.
हालांकि, तत्काल पवार परिवार, जो अभी शोक की अवधि में है, ने कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के वरिष्ठ नेताओं ने रिकॉर्ड पर विलय की बातचीत की पुष्टि की है और कहा है कि पुनर्मिलन होना चाहिए.
शरद पवार के नेतृत्व वाली पार्टी के वरिष्ठ नेता अनिल देशमुख ने मुंबई में पार्टी मुख्यालय पर पत्रकारों से बात करते हुए कहा, “यह अजित दादा की मृत्यु से पहले की आखिरी इच्छा थी. इसे पूरा किया जाना चाहिए.”
देशमुख ने कहा, “अजित दादा की दिल से इच्छा थी कि दोनों पार्टियां एक हो जाएं. इस पर कई चर्चाएं हुई थीं और अजित दादा ने कहा था कि दोनों पार्टियां 100 प्रतिशत एक होनी चाहिए और उन्होंने उस दिशा में कदम भी उठाने शुरू कर दिए थे.” उन्होंने यह भी जोड़ा कि डिप्टी सीएम कौन होगा, अन्य मंत्री कौन होंगे जैसे सवाल बाद में सुलझाए जा सकते हैं.
देशमुख ने कहा, “अंतिम संस्कार कल ही हुआ है. ऐसी स्थिति के तुरंत बाद राजनीतिक बैठकें नहीं होतीं.”
हालांकि, नेता ने इस सवाल पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया कि क्या विलय के बाद एनसीपी बीजेपी के साथ गठबंधन करेगी और महायुति में बनी रहेगी.
गुरुवार को बारामती में पत्रकारों से बात करते हुए शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के विधायक जयंत पाटिल ने कहा कि हालांकि दोनों एनसीपी के पुनर्मिलन को लेकर कई बैठकें हुई थीं, लेकिन 16 जनवरी को एक खास बैठक हुई थी, जो नगर निगम चुनावों के नतीजों के दिन हुई, जिसमें कुछ अहम फैसले लिए गए. दोनों एनसीपी ने पुणे और पिंपरी चिंचवड़ में नगर निगम चुनाव साथ मिलकर लड़ा था और हार गई थीं.
पाटिल ने कहा, “17 तारीख को पवारसाहेब (शरद पवार) की मौजूदगी में भी एक बैठक हुई थी. इसके बाद जिला परिषद चुनावों की तैयारी शुरू हुई.”
‘प्राथमिकता डिप्टी सीएम और विधायक दल के नेता की नियुक्ति’
जब पत्रकारों ने भुजबल से दोनों एनसीपी के पुनर्मिलन और कुछ नेताओं की ऐसी इच्छा पर सवाल किया, तो भुजबल ने कहा, “मुझे किसी नेता की इच्छा के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया है. आज हमारे सामने सवाल विधायक दल के नेता के चुनाव का है. बाकी सब बाद में आएगा. पहले सरकार चलाने के लिए हमें डिप्टी सीएम चाहिए.”
पार्टी सूत्रों ने कहा कि पटेल, तटकरे और भुजबल जैसे कई वरिष्ठ दावेदारों के रहते, सभी को स्वीकार्य नेतृत्व वही होगा जो अजित पवार के अपने परिवार से हो. उनके बेटे पार्थ और जय युवा और अनुभवहीन हैं, इसलिए पत्नी सुनेत्रा ही एकमात्र विकल्प हैं.
अगर भविष्य में विलय होता है, तो अजित पवार गुट के नेता चाहते हैं कि अंतिम नेतृत्व उन्हीं की तरफ से हो. इसी वजह से पुनर्मिलन की किसी भी बातचीत से पहले सुनेत्रा पवार का तेजी से विधायक दल का नेता और डिप्टी सीएम चुना जाना और भी अहम माना जा रहा है.
अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के एक विधायक ने दिप्रिंट को बताया, “हमारे विधायक सुप्रिया सुले का नेतृत्व स्वीकार नहीं करते. और पवार परिवार में राजनीति में सक्रिय दूसरा नाम रोहित पवार का है, जो तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेताओं के मुकाबले काफी जूनियर हैं.”
एनसीपी के संस्थापक शरद पवार के भतीजे रोहित पवार कर्जत जामखेड विधानसभा क्षेत्र से दो बार के विधायक हैं.
उसी विधायक ने यह भी कहा कि अगर दोनों एनसीपी का विलय होता है, तो राज्य के वित्त मंत्री पद के लिए उम्मीदवारों का दायरा बढ़ जाएगा. “सुनील तटकरे पहले वित्त विभाग संभाल चुके हैं, लेकिन वह अभी सांसद हैं, विधायक नहीं. वहीं, शरद पवार गुट के जयंत पाटिल इस पद के लिए गंभीर दावेदार हो सकते हैं, क्योंकि वह पहले कई बार इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.”
राजनीतिक टिप्पणीकार देशपांडे ने कहा कि बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि बीजेपी क्या चाहती है.
देशपांडे ने कहा, “जब अजित पवार मौजूद थे, तब बीजेपी को पुनर्मिलन में दिलचस्पी दिख रही थी, क्योंकि यह उनके नेतृत्व में होता और वह पहले से ही महायुति का हिस्सा थे. सवाल यह है कि अब क्या बीजेपी शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी को महायुति का हिस्सा बनाना चाहती है. क्या इस गुट के आठ सांसद केंद्र में मोदी सरकार को ज्यादा स्थिरता देंगे. या फिर बीजेपी इसे ऐसा मानती है जो संभावित विपक्ष को मजबूत कर सकता है.” उन्होंने कहा, “यह सब अभी देखा जाना बाकी है.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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