हैदराबाद: जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस पार्टी अब आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ टीडीपी-जेएसपी गठबंधन के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही है. यह कदम तब उठाया गया है जब विशेष जांच दल ने यह पाया कि तिरुपति लड्डू के घी में एनिमल फैट (पशु वसा) मिलाए जाने का कोई सबूत नहीं है.
घी में मिलावट के आरोप 2024 में बड़े विवाद का कारण बने थे. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने दावा किया था कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल में भगवान वेंकटेश्वर को चढ़ाए जाने वाले लड्डू घटिया सामग्री से बनाए गए थे और सबसे दर्दनाक बात यह थी कि शुद्ध घी की जगह एनिमल फैट का इस्तेमाल किया गया था.
शुक्रवार सुबह, वाईएसआर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के पूर्व अध्यक्ष भूमना करुणाकर रेड्डी ने तिरुपति में श्रीनिवास प्रसाद निंदा परिहार होमम किया. यह एक धार्मिक अनुष्ठान है, जो झूठे आरोपों से मुक्ति के लिए किया जाता है. यह अनुष्ठान तब किया गया जब एसआईटी ने कहा कि घी में अशुद्धियां थीं, लेकिन वे वनस्पति तेल से जुड़ी थीं, न कि एनिमल फैट से.
सीबीआई की निगरानी में गठित यह एसआईटी सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2024 के आदेश के बाद बनाई गई थी.
एसआईटी की जांच में सामने आया है कि 2019 से 2024 के बीच 5,971 टन मिलावटी घी तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को अगमार्क स्पेशल ग्रेड गाय के घी के नाम पर सप्लाई किया गया.
एसआईटी ने पाया कि कुछ निजी घी सप्लाई करने वाली डेयरी कंपनियों ने टीटीडी के कुछ कर्मचारियों के साथ मिलीभगत की. इसके कारण पांच साल में मंदिर ट्रस्ट को 234 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
जांच में यह भी कहा गया कि इस मिलावटी घी का इस्तेमाल भगवान वेंकटेश्वर मंदिर में पवित्र लड्डू और अन्य प्रसाद बनाने में किया गया, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुईं.
हालांकि, सीबीआई निदेशक की निगरानी में हुई इस जांच में मिलावटी घी में किसी भी तरह की एनिमल फैट, जैसे मछली का तेल या सुअर की चर्बी, के कोई सबूत नहीं मिले. इस जांच में सीबीआई, आंध्र प्रदेश पुलिस और भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण के अधिकारी शामिल थे.
नायडू के आरोप
तेलुगु देशम पार्टी के नेता नायडू ने कहा था कि लाखों श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत हुई हैं, खासकर आंध्र प्रदेश में, जहां भगवान वेंकटेश्वर को बहुत श्रद्धा से पूजा जाता है. उन्होंने कहा था कि यह सच्चाई सामने आने पर लोगों को गहरा आघात लगा कि जून में उनकी सरकार आने से पहले लड्डू कैसे तैयार किए जा रहे थे.
Om Namo Venkatesaya 🙏🏻
Despite national media clearly stating the facts, the TDP continues to push a false narrative on the Tirupati laddu issue. Verified reports have made it clear that there was no animal fat, yet misinformation is being spread… pic.twitter.com/oPNX32tfO9
— YSR Congress Party (@YSRCParty) January 30, 2026
नायडू के उपमुख्यमंत्री और एनडीए सहयोगी पवन कल्याण ने भी मंदिरों में प्रदर्शन किए. उन्होंने कहा कि लड्डू के घी में कथित मिलावट सनातन धर्म पर हमला है.
जन सेना पार्टी प्रमुख पवन कल्याण ने 11 दिन की प्रायश्चित दीक्षा भी ली. उन्होंने कहा कि यह हिंदू धर्म के खिलाफ हुए विभिन्न अपमानों के प्रायश्चित के लिए था, जिनमें वाईएसआर कांग्रेस सरकार के दौरान तिरुपति में लड्डू प्रसाद की कथित मिलावट भी शामिल है.
पवन कल्याण ने उस साल अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह के लिए टीटीडी द्वारा भेजे गए एक लाख लड्डुओं पर भी सवाल उठाए थे.
वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी भी शामिल हैं, ने इन आरोपों को सख्ती से खारिज किया और इन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया.
मुख्यमंत्री के आरोपों को बिना आधार का बताते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी और वाईएसआर कांग्रेस के राज्यसभा सांसद वाई.वी. सुब्बा रेड्डी, जो टीटीडी के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं, सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. उन्होंने मांग की कि इन आरोपों की गहन जांच किसी रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज या रिटायर्ड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस की निगरानी में कराई जाए.
23 सितंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी रिट याचिका में, नायडू के बयानों के कुछ ही दिनों बाद, सुब्रमण्यम स्वामी ने दिप्रिंट की उस रिपोर्ट का हवाला दिया और उसे याचिका के साथ जोड़ा, जिसने इस मामले का खुलासा किया था. इसमें टीटीडी के कार्यकारी अधिकारी श्यामला राव के बयान का उल्लेख था कि जिस घी में पशु वसा की मिलावट बताई जा रही थी, उसका इस्तेमाल कभी भी लड्डू बनाने में नहीं किया गया.
अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एसआईटी का गठन किया गया. इसने आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा पहले बनाई गई जांच टीम की जगह ली.
गुरुवार को पूर्व मंत्री चेलुबॉयिना वेणु गोपाल कृष्णा ने कहा कि नायडू और पवन कल्याण की तिरुमला लड्डू मुद्दे को राजनीतिक रूप से भुनाने की साजिश पूरी तरह उजागर हो गई है. उन्होंने दोनों नेताओं से मांग की कि वे झूठे आरोप लगाकर जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत करने के लिए करोड़ों श्रद्धालुओं से तुरंत माफी मांगें.
चार्जशीट
पिछले हफ्ते, एसआईटी ने नेल्लोर की एक अदालत में अंतिम पूरक चार्जशीट दाखिल की.
एसआईटी ने कहा कि जांच में सामने आया है कि भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी मिल्क ने, खुद और श्री व्यष्णवी डेयरी स्पेशलिटीज, मालगंगा मिल्क एंड एग्रो प्रोडक्ट्स और एआर डेयरी फूड के जरिए, मई 2019 से सितंबर 2024 के बीच कुल 59,71,781 किलोग्राम मिलावटी घी की सप्लाई की. इससे टीटीडी के 234 करोड़ रुपये के फंड का दुरुपयोग हुआ.
रिपोर्ट में कहा गया कि एसआईटी ने गुजरात के आनंद में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड, सेंटर फॉर एनालिसिस एंड लर्निंग इन लाइवस्टॉक एंड फूड यानी एनडीडीबी कैल्फ से संपर्क किया. इसका मकसद कच्चे डेटा का विश्लेषण और एआर डेयरी फूड प्राइवेट लिमिटेड, आरोपी नंबर 1, द्वारा 6 जुलाई और 12 जुलाई 2024 को तिरुमला भेजे गए चार टैंकरों से टीटीडी द्वारा लिए गए बचे हुए घी के सैंपलों की आगे की जांच कराना था, ताकि मिलावट पर अंतिम राय मिल सके.
एनडीडीबी कैल्फ, आनंद ने जांच की और मार्च 2025 में अपनी रिपोर्ट सौंपी. रिपोर्ट के मुताबिक, सैंपलों में मुख्य रूप से वनस्पति तेल और या पौधों से मिलने वाली वसा पाई गई. इसमें कहा गया कि पशु मूल की वसा, जैसे घी, टैलो, लार्ड या मछली के तेल की मौजूदगी की संभावना बहुत कम है.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सैंपलों में कोलेस्ट्रॉल नहीं पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि टैलो, लार्ड और मछली के तेल की मौजूदगी की संभावना बहुत ही कम है.
एनडीडीबी कैल्फ ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि सैंपलों में घी की मात्रा बहुत कम थी. उसके मुताबिक, कुछ यौगिक सैंपलों में एफएसएसएआई के नियमों के पालन के लिए मिलाए गए थे.
उसने कहा, टीटीडी से लिए गए घी के सैंपलों में फैटी एसिड प्रोफाइल और बीटा सिटोस्टेरॉल की मौजूदगी के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि ये सैंपल मुख्य रूप से पाम ऑयल और या पाम स्टीयरिन को पाम कर्नेल ऑयल के साथ मिलाकर बनाए गए हैं.
एआर डेयरी के टैंकरों से लिए गए सैंपल नेल्लोर कोर्ट के जरिए हरियाणा के करनाल स्थित आईसीएआर एनडीआरआई को भी भेजे गए, ताकि लार्ड और अन्य पशु वसा की मौजूदगी की जांच हो सके.
16 मई 2025 की एनडीआरआई रिपोर्ट में कहा गया कि चारों सैंपलों की जांच की गई और किसी में भी लार्ड नहीं पाया गया.
YSRCP का हमला
गुरुवार को, चार्जशीट सामने आने के एक दिन बाद, YSRCP नेता और पूर्व टीटीडी चेयरमैन वाई वी सुब्बा रेड्डी ने कहा कि एसआईटी ने साफ तौर पर यह साबित कर दिया है कि तिरुपति लड्डू के घी में कोई भी पशु वसा या पशु से बना पदार्थ नहीं पाया गया. उन्होंने कहा कि इससे सितंबर 2024 में नायडू द्वारा लगाए गए सनसनीखेज और आस्था को झकझोरने वाले आरोप पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं.
रेड्डी ने कहा कि इस निष्कर्ष से दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को, और उन परिवारों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें भगवान वेंकटेश्वर के नाम पर चलाई गई गैरजिम्मेदाराना प्रचार से गहरी चोट पहुंची थी.
हालांकि, सुब्बा रेड्डी ने कहा कि कई परेशान करने वाले सवाल अब भी बिना जवाब के हैं और अब नायडू सरकार को इनका जवाब देना होगा.
पूर्व टीटीडी चेयरमैन ने कहा कि जिन चार टैंकरों से एआर डेयरी ने घी भेजा था, जिनके आधार पर यह विवाद शुरू हुआ, वे 2024 के चुनावों के बाद सरकार बदलने के समय के थे. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हीं खेपों को पहले खारिज किया गया और बाद में अलग नामों से फिर इस्तेमाल किया गया.
रेड्डी ने सवाल किया कि इसकी अनुमति किसने दी, किसके आदेश पर उन टैंकरों को संभाला गया और खारिज किया गया घी सिस्टम में दोबारा कैसे आया. उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार आंध्र प्रदेश की जनता और दुनिया भर के करोड़ों श्रद्धालुओं को साफ जवाब देने की जिम्मेदार है.
YSRCP के राज्यसभा सदस्य ने कहा कि भले ही एसआईटी ने 36 आरोपियों के नाम लिए हैं, जिनमें घी सप्लायर, टीटीडी के कुछ कर्मचारी और बाहरी डेयरी विशेषज्ञ शामिल हैं, लेकिन जवाबदेही यहीं खत्म नहीं हो सकती और जिम्मेदारी की पूरी कड़ी तय की जानी चाहिए.
2023 में सुब्बा रेड्डी की जगह टीटीडी चेयरमैन बने करुणाकर रेड्डी ने कहा कि सीबीआई एसआईटी रिपोर्ट में साफ तौर पर कुछ अधिकारियों और घी सप्लायर्स के बीच गठजोड़ की बात कही गई है, लेकिन इसमें किसी भी YSRCP नेता का नाम नहीं है.
इसके बावजूद, करुणाकर ने कहा कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू कैबिनेट बैठकों में भी लगातार आरोप लगाते रहे और गलत तरीके से यह दावा करते रहे कि टेंडर नियमों में ढील देने से मिलावट हुई.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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