मुंबई: वह एक लेखिका, अभिनेत्री, एंकर, शौकीन पाठक हैं और अब सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रही हैं. मिलिए माधवी जाधव से, जो नासिक के सिन्नर तालुका में तैनात एक वन अधिकारी हैं. वह इस हफ्ते तब खबरों में आईं, जब उन्होंने महाराष्ट्र के मंत्री गिरीश महाजन से गणतंत्र दिवस के भाषण में डॉ. बी. आर. आंबेडकर का जिक्र न करने पर माफी की मांग की.
डॉ. आंबेडकर संविधान सभा की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे.
जाधव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह जल संसाधन मंत्री को फटकार लगाते हुए दिख रही हैं. वह इसे गणतंत्र दिवस के दिन डॉ. आंबेडकर का नाम न लेने की “जानबूझकर की गई कोशिश” बताती हैं.
“गिरीश महाजन ने अपने भाषण में डॉ. आंबेडकर का नाम नहीं लिया, जबकि उन लोगों के नाम बार-बार लिए गए जो लोकतंत्र और संविधान के लिए जिम्मेदार नहीं थे. जिस व्यक्ति को गणतंत्र दिवस का असली सम्मान मिलना चाहिए था, उसका नाम भाषण में क्यों नहीं लिया गया,” जाधव ने पूछा.
“मेरे जैसे लोगों को डॉ. आंबेडकर की वजह से सरकारी नौकरी मिल सकी. मैं माफी नहीं मांगूंगी,” उन्होंने कहा. वीडियो में वह प्रशासन को उन्हें निलंबित करने की चुनौती देती हुई भी सुनाई देती हैं.
इस घटना के बाद महाजन को एक बयान जारी करना पड़ा. उन्होंने कहा कि उन्होंने जानबूझकर आंबेडकर का जिक्र नहीं छोड़ा था. भाजपा नेता ने मीडिया से कहा, “मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया. मैं हमेशा अपने भाषणों में डॉ. आंबेडकर की सराहना करता हूं. अगर आप देखें, तो आंबेडकर जयंती के कार्यक्रमों में नीला पहनने वाला मैं ही अकेला मंत्री होता हूं और पूरी तरह उन कार्यक्रमों में हिस्सा लेता हूं. फिर भी, अगर इससे किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मुझे खेद है.”
अपनी ओर से जाधव ने दिप्रिंट से कहा कि उन्हें न सिर्फ डॉ. आंबेडकर बल्कि सावित्रीबाई फुले, छत्रपति शिवाजी, जिजामाता भोसले, छत्रपति शाहू, भगत सिंह और अन्य महापुरुषों के लिए भी गहरा सम्मान है. उन्होंने कहा कि वह बहुत कम उम्र से ही इन ऐतिहासिक व्यक्तित्वों से प्रभावित रही हैं. जब वह कक्षा तीन में थीं, तब इतिहास उनका पसंदीदा विषय था. 1980 के दशक में दूरदर्शन पर इन महापुरुषों के जीवन पर बने कार्यक्रमों से भी उन्हें प्रेरणा मिली.
उन्होंने कहा, “मैं हमेशा उनकी कहानियों से आकर्षित रहती थी. वे असली लोग थे. जिस उम्र में बच्चे कार्टून देखते हैं, उस उम्र में मैं इतिहास के इन महान लोगों की कहानियों की ओर खिंच जाती थी.”
माधवी जाधव कौन हैं
जाधव, 44 वर्ष की हैं और नासिक की रहने वाली हैं. उन्होंने दिप्रिंट को बताया कि बचपन से ही उन्हें किताबें पढ़ने का शौक था और वह लगातार पढ़ती रहीं. उनका परिवार उस समय किसी लाइब्रेरी की सदस्यता लेने में सक्षम नहीं था. लेकिन उनके घर के पास कवि कुसुमाग्रज की लाइब्रेरी थी, जहां सुबह और शाम दो से तीन घंटे के लिए मुफ्त में पढ़ने की अनुमति थी.
“मैं वहां नियमित रूप से जाने लगी. धीरे-धीरे मुझे समझ आया कि कविताओं से ज्यादा मुझे इतिहास की किताबें और आत्मकथाएं पढ़ने में रुचि है. यह मेरी गलती नहीं है कि मुझे इन महान सुधारकों और स्वतंत्रता सेनानियों से प्रेम है,” उन्होंने कहा.
जाधव ने बताया कि पहले वह तय नहीं कर पा रही थीं कि उन्हें काम करना है या नहीं. शादी के बाद उन्होंने नौकरी जॉइन की. 2011 बैच की यह अधिकारी अब नासिक में तैनात एक कक्षा तीन की वन अधिकारी हैं.
उनके दो बच्चे हैं. बेटा कक्षा 10 में पढ़ता है और बेटी कक्षा 1 में है. जाधव ने बताया कि उनकी बेटी का जन्म संयोग से 26 नवंबर को हुआ था, जिसे संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है. उनकी बेटी का पहला जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया गया था.
उन्होंने कहा, “हम पहले माता-पिता नहीं थे जिन्होंने बेटी का जन्मदिन बड़े तरीके से मनाया, लेकिन उस दिन मैंने महिला भ्रूण हत्या पर एक एकल प्रस्तुति दी थी. नासिक के कई महत्वपूर्ण लोग वहां आए थे, चाहे उस समय के मेयर हों, अधिकारी हों या विधायक. मैं यह संदेश देना चाहती थी कि सिर्फ केक काटना ही जरूरी नहीं है, बल्कि बेटी के जन्म का उत्सव मनाया जाना चाहिए.”
उन्होंने कहा, “मेरा संविधान में गहरा विश्वास है और मेरे घर का माहौल भी बहुत उदार है. मैं समानता में विश्वास करती हूं और लड़के और लड़की में कोई फर्क नहीं करती.”
जाधव ने बताया कि उन्होंने अपने बच्चों में भी समानता का विचार डाला है. उन्होंने अपने बेटे को खाना बनाना सिखाया, क्योंकि उनका मानना है कि खाना बनाना लैंगिक नहीं होता.
26 जनवरी की घटना पहली बार नहीं थी जब उन्होंने आवाज उठाई. जाधव ने याद किया कि एक बार उन्होंने कड़ा विरोध किया था, जब आरक्षित परेड प्लाटून में तीन या चार लोगों को किट नहीं दी गई थी. उन्होंने कहा, “तब भी मैंने कहा था कि ये यूनिफॉर्म किट सरकारी हैं. इन लोगों को किट क्यों नहीं दी गई. वे अलग-थलग दिख रहे थे.”
उन्होंने कहा, “उस समय संबंधित अधिकारी ने सबके सामने मुझ पर चिल्लाया. मैं रो पड़ी और आरएफओ मैडम से शिकायत की. बाद में उन्हें किट दे दी गई.” उन्होंने कहा कि अपनी इसी बेबाकी की वजह से विभाग में उनकी किसी से दोस्ती नहीं है.
उन्होंने कहा, “मेरे बैग में हमेशा एक किताब होती है. जब मेरा आधिकारिक काम खत्म हो जाता है, तो मैं एक कोने में बैठकर पढ़ना पसंद करती हूं.”
जाधव ने बताया कि पढ़ने और बेबाक होने के अलावा उन्होंने नासिक में कई स्थानीय नाटकों में अभिनय भी किया है. उन्होंने पांच नाटक लिखे हैं और दो का निर्देशन भी किया है. वह प्रशिक्षित कथक नृत्यांगना भी हैं. उन्होंने कहा, “मैंने सरकारी नौकरी जीवन में थोड़ी देर से शुरू की, क्योंकि मैं इन सभी गतिविधियों में व्यस्त थी. अगर मैंने पहले शुरुआत की होती, जो मैं चाहती भी थी लेकिन दुविधा में थी, तो आज मैं निश्चित रूप से कक्षा एक की अधिकारी होती.”
‘पता नहीं प्रमोशन मिलेगा या डिमोशन’: जाधव
गणतंत्र दिवस की इस टकराव के बाद जाधव को कई जगहों से समर्थन मिला. वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख और बाबासाहेब आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर ने उनसे बात की और समर्थन दिया. कांग्रेस सांसद और पार्टी की मुंबई इकाई की प्रमुख वर्षा गायकवाड़ ने भी इस घटना को लेकर भाजपा पर हमला बोला.
गायकवाड़ ने आरोप लगाया, “गणतंत्र दिवस संविधान का उत्सव है और उसके निर्माताओं को भूल जाना भाजपा की महाराष्ट्र विरोधी मानसिकता को दिखाता है. महाराष्ट्र के लोग ऐसे सत्ता के नशे में चूर मंत्रियों को कभी माफ नहीं करेंगे.”
उन्होंने कहा, “सच यह है कि भाजपा देश से संविधान और बाबासाहेब का नाम मिटाना चाहती है, क्योंकि वे समानता, न्याय और भाईचारे के सिद्धांतों से नफरत करते हैं. वे देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं और गरीबों का शोषण जारी रखना चाहते हैं. यही भाजपा चाहती है.” यह बात गायकवाड़ ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखी.
ये वीर वन विभाग अधिकारी माधुरी जाधव हैं।
गणतंत्र दिवस के आधिकारिक कार्यक्रम में मंत्री गिरीश महाजन द्वारा महामानव भारत रत्न बाबासाहेब आंबेडकर के नाम का उल्लेख तक नहीं किया गया, इस बात से संतप्त हो गई, विरोध जताया! तो उन्हें हिरासत में ले लिया गया।
भाजपा नेताओं को बाबासाहेब का… pic.twitter.com/KeekRnUxhN
— Prof. Varsha Eknath Gaikwad (@VarshaEGaikwad) January 26, 2026
इस बीच, जाधव का प्रमोशन होने वाला है. उन्होंने कहा, “अब मुझे नहीं पता कि इस घटना की वजह से मेरा प्रमोशन होगा या डिमोशन. वैसे भी, डिपार्टमेंट मुझे दुश्मन समझता है, तो देखते हैं. परवा इल्ले (मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता).”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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