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Monday, 26 January, 2026
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CPI(M) ने अच्युतानंदन को पद्म विभूषण मिलने का स्वागत किया, कहा—पहले इनकार ‘निजी फैसले’ थे

हालांकि, केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह में अभिनेता ममूटी को मिले सम्मान की सराहना की, लेकिन वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता को मरणोपरांत दिए गए पद्म विभूषण पर चुप्पी साधे रखी.

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तिरुवनंतपुरम: राज्य सम्मानों को लेकर लंबे समय से चली आ रही अपनी नीति से अलग हटते हुए, सीपीआई(एम) ने सोमवार को वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वी. एस. अच्युतानंदन को मरणोपरांत दिए गए पद्म विभूषण का स्वागत किया. पार्टी ने कहा कि वह उनके परिवार की खुशी में शामिल है. पार्टी ने कहा, चूंकि, अच्युतानंदन के परिवार ने यह सम्मान स्वीकार कर लिया है, इसलिए इसका विरोध करने का कोई कारण नहीं है.

सीपीआई(एम) के राज्य सचिव एम. वी. गोविंदन ने कहा, ई. एम. एस. नंबूदिरिपाद, ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य द्वारा पहले ऐसे सम्मानों को ठुकराना उनका निजी फैसला था, जिसे पार्टी ने समर्थन दिया था.

रविवार रात, वी. एस. अच्युतानंदन के बेटे अरुण कुमार ने सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर इस सम्मान पर खुशी जताई.

गोविंदन ने सोमवार को मीडिया से कहा, “राज्य द्वारा सार्वजनिक सेवा और कला जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने वाले लोगों को कई सम्मान दिए गए, जब ईएमएस से पूछा गया, तो उन्होंने इनकार कर दिया, यही बात ज्योति बसु और बुद्धदेव भट्टाचार्य के साथ भी हुई, जहां तक वीएस का सवाल है, उन्हें यह सम्मान मरणोपरांत दिया गया है. वीएस के परिवार ने इसे खुशी-खुशी स्वीकार किया है. पार्टी के लिए संबंधित प्राधिकारी परिवार ही है. उन्होंने इसे खुशी से स्वीकार किया है, जिसे हम भी स्वीकार करते हैं. हमें अलग रुख अपनाने की जरूरत नहीं है. हम परिवार की खुशी में शामिल हैं.”

हालांकि, सीपीआई(एम) का यह रुख ऐसे सम्मानों को पहले खारिज करने की उसकी पुरानी नीति से अलग है.

2022 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीआई(एम) नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य ने यह सम्मान लेने से इनकार कर दिया था. पार्टी ने उनके फैसले का समर्थन करते हुए कहा था कि पार्टी की नीति लोगों के लिए काम करने की है, न कि पुरस्कारों के लिए.

इसी तरह, 1992 में केरल के पहले मुख्यमंत्री ई. एम. एस. नंबूदरिपाद ने पद्म विभूषण लेने से इनकार किया था और 2008 में पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री ज्योति बसु ने भारत रत्न ठुकरा दिया था.

2022 में केरल की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के. के. शैलजा ने भी रेमन मैग्सेसे पुरस्कार लेने से इनकार किया था. उन्होंने कहा था कि वह इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लेना चाहतीं, क्योंकि फिलीपींस के राष्ट्रपति पर कम्युनिस्टों के खिलाफ कथित अत्याचारों के आरोपों के चलते पार्टी इस पुरस्कार के खिलाफ थी.

दिप्रिंट से बात करते हुए सीपीआई(एम) की राज्य समिति के सदस्य और पार्टी के तिरुवनंतपुरम सचिव वी. जॉय ने कहा कि राज्य को इस सम्मान की उम्मीद नहीं थी. उन्होंने आरोप लगाया कि ममूटी सहित कुछ को छोड़कर, बाकी पुरस्कार राजनीतिक लाभ के लिए दिए गए हैं. हालांकि, जॉय ने साफ किया कि चूंकि यह सम्मान मरणोपरांत है, इसलिए इसे ठुकराने की ज़रूरत नहीं है.

पार्टी नेताओं द्वारा पहले ऐसे पुरस्कार ठुकराने के सवाल पर जॉय ने कहा कि वे निजी फैसले थे.

उन्होंने कहा, “यह लोगों का फैसला होता है, लेकिन अब यह मरणोपरांत दिया गया है, इसलिए इस पर बात करने की ज़रूरत नहीं है. अगर वीएस जीवित होते, तो वे खुद अपना बयान देते. पार्टी को इसे ठुकराने की ज़रूरत नहीं है. अगर पार्टी ऐसा करती, तो सुर्खियां बनतीं कि हमने वीएस जैसे व्यक्ति को दिए गए सम्मान को ठुकरा दिया.”

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस सम्मान को राजनीतिक अभियान में बदलने की योजना बना सकती है, लेकिन इससे उसे कोई फायदा नहीं होगा.

उन्होंने कहा, “मृत्यु के बाद जब सम्मान दिया जाता है, तो हम कुछ और नहीं कर सकते. यह केंद्र का राजनीतिक इरादे से किया गया कदम है, हमें इसका अंदाजा है. वीएस इस सम्मान के हकदार हैं; वे स्वतंत्रता सेनानी थे, उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने.”

दिप्रिंट ने सीपीआई के राज्य सचिव बिनोय विश्वम से फोन पर टिप्पणी के लिए संपर्क किया, लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस समय कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते. सीपीआई, सीपीआई(एम) की राज्य में सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है.

परिवार ने किया स्वागत

विधानसभा चुनाव में कुछ ही महीने बचे हैं और केरल से सात अन्य लोगों को भी पद्म पुरस्कार दिए गए हैं. अच्युतानंदन के अलावा, न्यायमूर्ति के. टी. थॉमस और लेखक व पत्रकार पी. नारायणन को पद्म विभूषण दिया गया है, जबकि अभिनेता ममूटी और एसएनडीपी (श्री नारायण धर्म परिपालन योगम) प्रमुख वेल्लापल्ली नटेशन को पद्म भूषण मिला है.

अंतरिक्ष वैज्ञानिक ए. ई. मुथुनायगम, शास्त्रीय नृत्यांगना के. विमला मेनन और पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता कोल्लक्कैयिल देवकी अम्मा को पद्म श्री से सम्मानित किया गया है.

वाम सरकार के मजबूत समर्थक वेल्लापल्ली राज्य में मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कथित बयानों को लेकर विवादों में रहे हैं. उनके बेटे तुषार वेल्लापल्ली भारतीय धर्म जन सेना (बीडीजेएस) के अध्यक्ष हैं, जो एनडीए का घटक दल है.

रविवार को पुरस्कारों की घोषणा के तुरंत बाद, अच्युतानंदन के बेटे अरुण कुमार ने फेसबुक पोस्ट कर खुशी ज़ाहिर की. उन्होंने कहा कि जमीन की हरियाली और गरीबों के लिए न्याय ही अच्युतानंदन के लिए सबसे बड़े पुरस्कार हैं और यह सम्मान देश द्वारा दी गई बड़ी मान्यता है.

अरुण कुमार ने कहा, “हम इस सम्मान को लोगों द्वारा उन पर बरसाए गए प्यार के रूप में देखते हैं. साथ ही, पद्म विभूषण वाकई देश द्वारा दिया गया एक बड़ा सम्मान है. हमारा परिवार इस सम्मान से बेहद खुश है, लेकिन इससे भी बड़ा वह प्यार और भरोसा है जो केरल के आम लोगों ने दशकों से उन्हें दिया है. वही मेरे पिता का असली पद्म है.”

हालांकि, सोमवार को अरुण कुमार ने स्पष्ट किया कि उनके पिता को मिलने वाले किसी भी सम्मान और पुरस्कार से परिवार खुश है, लेकिन आगे की बात पार्टी से चर्चा के बाद तय होगी.

मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने रविवार को अभिनेता ममूटी को मिले सम्मान का स्वागत किया था, लेकिन अच्युतानंदन पर चुप रहे. राज्य फिल्म पुरस्कार समारोह में, जहां ममूटी को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला, विजयन ने कहा, “कई वर्षों से हमारी कैबिनेट लगातार ममूटी के नाम की सिफारिश करती रही है. हर चीज़ का अपना समय होता है, और अब आखिरकार यह सम्मान मिलना बेहद संतोषजनक है. हम पूरे दिल से उन्हें बधाई दे सकते हैं.”

दिप्रिंट से बात करते हुए राज्य के राजनीतिक विश्लेषक जोसेफ सी.

मैथ्यू ने कहा, “हम सिर्फ अनुमान लगा सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि अगर वीएस जीवित होते, तो वे इसे ठुकरा देते. पार्टी ने शायद इसलिए यह रुख अपनाया क्योंकि उनके परिवार ने इसे स्वीकार कर लिया है.”

उन्होंने कहा कि अच्युतानंदन और वेल्लापल्ली को मिले पुरस्कारों को विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक लाभ के तौर पर भी देखा जा सकता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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