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Tuesday, 20 January, 2026
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लिव-इन को प्रेम विवाह मानें, महिला को पत्नी का दर्जा दें: मद्रास हाईकोर्ट

कोर्ट ने एक व्यक्ति को अग्रिम ज़मानत देने से इंकार किया, कहा शादी का झूठा वादा करके सेक्स करना भारतीय न्याय संहिता के तहत अपराध है और इसके लिए 10 साल की जेल और जुर्माना हो सकता है.

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नई दिल्ली: मद्रास हाई कोर्ट ने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने के आरोप में एक आदमी को अग्रिम जमानत देने से इनकार करते हुए कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप को गंधर्व (प्रेम) विवाह के रूप में देखा जाना चाहिए और ऐसी रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को पत्नी का दर्जा दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 69 लागू की जाए. यह प्रावधान धोखे से यौन संबंध बनाने को अपराध मानता है.

कोर्ट ने कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप भारतीय समाज के लिए एक “सांस्कृतिक झटका” है. ऐसे रिश्तों में लोग इसे आधुनिक समझते हैं, लेकिन यह नहीं समझते कि रिश्ता टूटने पर कानूनी परिणाम क्या होंगे.

कोर्ट ने कहा, “कुछ समय बाद जब उन्हें पता चलता है कि लिव-इन रिलेशनशिप शादी के तहत मिलने वाली सुरक्षा नहीं देती, तो हकीकत जैसे आग पकड़ लेती है और उन्हें जलाने लगती है.”

कोर्ट ने चेताया कि लिव-इन रिश्ते टूटने पर महिलाएं अक्सर किसी कानूनी सुरक्षा के बिना रह जाती हैं.

मद्रास हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एस. श्रीमथी ने 2024 में दर्ज एफआईआर से जुड़े मामले में प्रभारकरन नामक व्यक्ति की अग्रिम ज़मानत याचिका पर सुनवाई की. एफआईआर में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि शादी का बार-बार आश्वासन देने के बाद धोखे से यौन संबंध बनाए गए.

धोखे से यौन संबंध, जैसे शादी का झूठा वादा करके सेक्स करना, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 69 के तहत अपराध है. इसके लिए 10 साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.

कोर्ट ने कहा कि जब कोई पुरुष शादी का वादा करके महिला के साथ यौन संबंध बनाता है और बाद में शादी करने से इनकार करता है, तो यह पूरी तरह से बीएनएस की धारा 69 में आता है.

कोर्ट ने कहा कि आरोपी ने बार-बार शादी का आश्वासन देने के बाद भी शादी करने से मना किया और पुलिस जांच में रिश्ते को स्वीकार किया, इसलिए उसके खिलाफ इस धारा के तहत मुकदमा चलाना ही एकमात्र विकल्प था.

क्या था मामला

शिकायतकर्ता ने कहा कि वे और आरोपी स्कूल से एक-दूसरे को जानते थे और बाद में रिलेशनशिप में आए. उन्होंने आरोप लगाया कि शादी का बार-बार आश्वासन मिलने के बाद रिश्ता शारीरिक हो गया.

अगस्त 2024 में, दोनों घर छोड़कर शादी करने गए, लेकिन महिला के परिवार ने गायब होने की शिकायत दर्ज कराई और पुलिस ने उन्हें वापस लाया.

पुलिस जांच के दौरान आरोपी ने रिश्ते को स्वीकार किया और रेलवे भर्ती परीक्षा पास करने के बाद फिर शादी का वादा किया.

रिश्ता बाद में टूट गया और महिला ने धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई.

कोर्ट ने नोट किया कि बीएनएस की धारा 69, जो धोखे से यौन संबंध को अपराध मानती है, एफआईआर में शामिल नहीं थी और राज्य को इसे शामिल करने का निर्देश दिया.

आरोपी ने अग्रिम ज़मानत मांगी और कहा कि रिश्ता सहमति से था और उसने महिला के पिछले रिश्तों के बारे में जानने के बाद इसे खत्म किया. उसने बेरोज़गारी और आर्थिक तनाव का हवाला देते हुए शादी नहीं करने के कारण बताए.

कोर्ट ने ज़मानत याचिका क्यों की खारिज

ज़मानत याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि बीएनएस की धारा 69 धोखे से यौन संबंध बनाने को अलग अपराध बनाती है, भले ही यह बलात्कार के बराबर न हो.

न्यायमूर्ति श्रीमथी ने कहा कि पहले ऐसे मामलों को आईपीसी की धोखाधड़ी या बलात्कार की धाराओं के तहत देखा जाता था. नए आपराधिक कानून के तहत संसद ने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने को अलग अपराध बनाया है.

अदालत ने पाया कि आरोपी ने शादी का आश्वासन देकर शारीरिक संबंध बनाए और बाद में शादी करने से मना कर दिया.

चूंकि आरोपी ने शादी करने से इनकार किया, इसलिए अदालत ने कहा कि धारा 69 के तहत मुकदमा चलाना अनिवार्य था और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कस्टोडियल जांच ज़रूरी थी.

अदालत के व्यापक विचार

अदालत ने यह भी कहा कि लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा में एक कमी है.

अदालत ने कहा कि नाबालिगों को POCSO के तहत सुरक्षा है और शादीशुदा महिलाओं के पास कानूनी उपाय हैं, लेकिन लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं के पास ऐसे विशेष उपाय नहीं हैं.

कोर्ट ने कहा, “अब लिव-इन रिलेशनशिप की वजह से महिलाएं मानसिक पीड़ा झेल रही हैं और इसका शिकार बन रही हैं. उनके लिए कोई सुरक्षा नहीं है.”

अदालत ने यह भी कहा कि जोड़े लिव-इन रिलेशनशिप को “आधुनिक” समझते हैं, लेकिन विवाद होने पर महिला की छवि पर हमला कर देते हैं.

अदालत ने यह भी लिखा कि सुलह की बातचीत के दौरान शिकायतकर्ता ने मुआवजा लेने से इंकार किया, डर के कारण कि उसे “पैसे के लिए सोने वाली” कहा जाएगा.

अदालत ने कहा कि यह समस्या की गंभीरता को दर्शाता है.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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