नई दिल्ली: केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की जांच ने कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाठ के आरोपों को सही ठहराया है. कर्नल बाठ ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस के कर्मियों ने, जिनमें इंस्पेक्टर रैंक के चार अधिकारी भी शामिल थे, पटियाला जिले में एक ढाबे के बाहर उन पर और उनके बेटे पर हमला किया था.
सीबीआई जांच में यह भी पुष्टि हुई कि कर्नल ने खुद को सेना का अधिकारी बताने के बावजूद करीब एक दर्जन पुलिसकर्मियों ने उन्हें और उनके बेटे को बेरहमी से पीटा और पिता-पुत्र को एनकाउंटर करने की धमकी तक दी.
हालांकि, नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों के एक मेडिकल बोर्ड ने यह पाया कि उनकी चोटें गंभीर थीं, लेकिन वे जान के लिए खतरा नहीं थीं.
कैबिनेट सचिवालय में उप सचिव के पद पर तैनात कर्नल बाठ और उनके बेटे अंगद को हरभंस ढाबे के बाहर पुलिस अधिकारियों ने पीटा था. आरोपियों में इंस्पेक्टर हरी बोपराय, शमिंदर सिंह, हरजिंदर ढिल्लों और जय सिंह शामिल थे.
13 और 14 मार्च की दरम्यानी रात हुई इस मारपीट की घटना के बाद पंजाब पुलिस की कड़ी आलोचना हुई, खासकर घटना के बाद मामले को जिस तरह से संभाला गया, उसे लेकर. पटियाला जिला पुलिस ने सबसे पहले ढाबा मालिक की शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, जबकि कर्नल बाठ की शिकायत में इंस्पेक्टरों के नाम साफ-साफ दिए गए थे.
घटना के एक हफ्ते बाद पटियाला पुलिस ने कर्नल बाथ की शिकायत के आधार पर नई एफआईआर दर्ज की और पंजाब पुलिस मुख्यालय ने एक अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एक जांच समिति बनाई.
पिछले महीने कर्नल की पत्नी जसविंदर कौर बाठ की याचिका पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने यह मामला सीबीआई को सौंप दिया था. इसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने चारों इंस्पेक्टरों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट करणवीर सिंह माजू ने शुक्रवार को जारी समन आदेश में कहा, “मैंने दलीलों पर विचार किया है और रिकॉर्ड का अवलोकन किया है. जांच के बाद सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस, 2023 की धारा 115(2), 117(2), 126(2), 324(3), 351(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत चार्जशीट दाखिल की है. इसलिए इन धाराओं के तहत दंडनीय अपराधों के लिए आरोपी—रॉनी सिंह, हरी बोपराय, हरजिंदर सिंह, शमिंदर सिंह और जय सिंह के खिलाफ संज्ञान लिया जाता है और उन्हें 16.03.2026 को मुकदमे का सामना करने के लिए तलब किया जाता है.”
सीबीआई के सूत्रों ने बताया कि हत्या के प्रयास की धारा इसलिए हटाई गई, क्योंकि मेडिकल बोर्ड ने यह राय दी थी कि पिता-पुत्र की चोटें जानलेवा नहीं थीं.
लापता डीवीआर
पटियाला जिला पुलिस ने सबसे पहले ढाबा मालिक की शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 194(2) (मारपीट से संबंधित) के तहत अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी. घटना के समय ढाबा मालिक बाहर था.
इस एफआईआर पर सेना के पूर्व अधिकारियों की ओर से कड़ी आलोचना और पक्षपात के आरोप लगे, जिसके बाद पुलिस ने रॉनी सिंह, हरजिंदर सिंह ढिल्लों, हैप्पी बोपराय, राजवीर सिंह और सुरजीत सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया.
हालांकि, कर्नल बाथ ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर हाई कोर्ट का रुख किया, लेकिन हाई कोर्ट ने पहले यह मामला जांच के लिए चंडीगढ़ पुलिस को सौंप दिया.
करीब तीन महीने बाद, हाई कोर्ट ने जांच में कोई ठोस प्रगति न होने पर और बीएनएस की धारा 109 (हत्या का प्रयास) हटाने की राय देने को लेकर यूनियन टेरिटरी पुलिस को फटकार लगाई.
चंडीगढ़ पुलिस की एसआईटी ने हाई कोर्ट को बताया था कि आरोपी पुलिसकर्मी “लापता” हो गए हैं.
सीबीआई ने आरोप लगाया कि पटियाला पुलिस ने 14 मार्च को खोली गई डेली डायरी रिपोर्ट (डीडीआर) में बयान दर्ज किया और यह कहते हुए इसे खुला रखा कि दोनों पक्ष—कर्नल बाठ और आरोपी पुलिसकर्मी—एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे थे.
इसके अलावा, सीबीआई ने कहा कि पटियाला पुलिस ने अपनी पहली एफआईआर हरबंस ढाबा के मालिक की शिकायत पर दर्ज की, जो घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं था.
चार्जशीट में कहा गया है कि यह सब उस समय किया गया, जब एक उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) रैंक का अधिकारी अस्पताल में कर्नल बाथ से मिला था और उनके बयान में हमलावरों के नाम साफ तौर पर दर्ज थे.
विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सीबीआई की चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा, “जसविंदर कौर बाथ कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ के बयान पर मामला दर्ज कराने के लिए दर-दर भटकती रहीं, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. कर्नल बाठ और अंगद सिंह बाठ के शरीर पर चोटें होने, 14.03.2025 का कर्नल बाथ का विस्तृत बयान रिकॉर्ड में होने और सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने के बावजूद, स्थानीय पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज नहीं की.”
सीबीआई ने सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने कानून की तय प्रक्रिया का पालन किए बिना सीसीटीवी फुटेज हासिल की, जो सबूत के तौर पर काम आ सकती थी.
सीबीआई के मुताबिक, एसएचओ 14 मार्च की दोपहर को घटना स्थल पर गया और ढाबा मालिक के मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हुए बावा ढाबा में लगे सीसीटीवी से फुटेज रिकॉर्ड की, जिसमें घटना भी कैद थी.
एसएचओ ने दावा किया कि उसने सीसीटीवी फुटेज अपने मोबाइल में इसलिए रिकॉर्ड की, क्योंकि ढाबे का मॉनिटर काम नहीं कर रहा था.
हालांकि, बाद में बावा ढाबा का सीसीटीवी डीवीआर गायब पाया गया. ढाबा मालिक ने बताया कि एसएचओ के ढाबे पर आने के कुछ घंटे बाद कुछ अज्ञात पुलिसकर्मी वहां आए और बिना कोई रसीद दिए डीवीआर ले गए.
अदालत ने सीबीआई की चार्जशीट का हवाला देते हुए कहा, “उक्त ढाबे का डीवीआर बाद में गायब पाया गया. मालिक के बयान के अनुसार, 14.03.2025 को शाम करीब 4 बजे कुछ अज्ञात पुलिसकर्मी बावा ढाबा आए और बिना कोई रसीद दिए डीवीआर ले गए. कोशिशों के बावजूद बावा ढाबा का डीवीआर बरामद नहीं किया जा सका.”
अदालत ने आगे कहा, “जांच के दौरान इंस्पेक्टर अमृतवीर सिंह का मोबाइल सीएफएसएल, चंडीगढ़ भेजा गया. फॉरेंसिक जांच में पाया गया कि संबंधित वीडियो फाइलें डिस्प्ले मॉनिटर से दोबारा रिकॉर्ड की गई थीं और यह रिकॉर्डिंग मूल रिकॉर्डिंग के बाद की थी तथा स्थिर नहीं थी.”
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