नई दिल्ली: नोएडा पुलिस ने रविवार को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) के एक जवान और उसकी पत्नी को ग्रेटर नोएडा में फोर्स के कैंप के भीतर उनके क्वार्टर में एक नाबालिग लड़की पर हमला करने के आरोप में गिरफ्तार किया.
10 साल की लड़की नोएडा के मैक्स अस्पताल में वेंटिलेटर सपोर्ट पर है. वह अपनी छाती, सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में लगी गंभीर चोटों से जूझ रही है.
आरोपी जवान जनवरी 2024 से CRPF की 235वीं बटालियन में तैनात है. यह बटालियन फोर्स की विशेष VIP सुरक्षा विंग की एक यूनिट है. CRPF ने सोमवार को एक बयान में कहा कि जवान फोर्स के नोएडा अस्पताल में “फर्स्ट एडर” के तौर पर काम करता था.
फोर्स ने बताया कि जवान को सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है.
यह मामला CRPF के एक असिस्टेंट कमांडेंट-स्तरीय अधिकारी द्वारा शनिवार को पुलिस और जिला बाल कल्याण समिति को लिखे गए पत्र के एक दिन बाद दर्ज किया गया. अधिकारी ने FIR दर्ज करने के साथ आरोपी के खिलाफ बाल श्रम, तस्करी और नाबालिग के साथ गंभीर दुर्व्यवहार की धाराएं लगाने की मांग की थी. हालांकि FIR केवल भारतीय न्याय संहिता की धारा 110 यानी गैर-इरादतन हत्या के प्रयास के तहत दर्ज की गई.
FIR के अनुसार, जवान ने 10 साल की लड़की को अधिकारियों की अनुमति के बिना ग्रेटर नोएडा कैंप में अपने क्वार्टर में रखा था. 14 और 15 जनवरी की दरमियानी रात लड़की पर हमला किया गया.
अधिकारी की शिकायत में कहा गया है कि कांस्टेबल जीडी तारिक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून ने लड़की पर हमला किया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं. उसके सिर, छाती और शरीर के अन्य हिस्सों में चोटें थीं. इसके बाद उसे पहले बिसरख के सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया. फिलहाल वह सेक्टर 128 स्थित मैक्स अस्पताल में वेंटिलेटर पर है.
शिकायतकर्ता ने कहा कि घटना 14 जनवरी 2026 और 15 जनवरी 2026 की दरमियानी रात की है. जवान ने विभागीय अधिकारियों को संतोषजनक जवाब नहीं दिया. लड़की को कैंप अस्पताल में फर्स्ट एड नहीं दिया गया और न ही इसकी कोई सूचना दी गई. उन्होंने आगे कहा कि लड़की की बेहोश और मरणासन्न हालत के लिए यह दंपती जिम्मेदार है.
डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस, सेंट्रल नोएडा, शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि आरोपी लड़की को घरेलू काम और बच्चों की देखभाल में मदद के लिए लाए थे.
DCP ने कहा कि आरोपियों ने छोटी-छोटी बातों पर पीड़िता को परेशान करना और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. 14 और 15 जनवरी की रात उन्होंने पीड़िता पर हमला किया, जिसके कारण वह अभी अस्पताल में इलाज करा रही है. 18 जनवरी को इकोटेक-3 पुलिस स्टेशन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी तारिक अनवर और उसकी पत्नी रिम्पा खातून को गिरफ्तार कर लिया.
‘मेडिकल सलाह के खिलाफ अस्पताल से ले गए’
FIR के मुताबिक, लड़की को शुरुआत में सर्वोदय अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उसके शरीर पर कई चोटें और निशान थे. लैब जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से बीमार थी और उसके कई अंगों में चोटें थीं.
FIR के अनुसार, दंपती ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए उसे जल्द ही अस्पताल से डिस्चार्ज करवा लिया.
मेडिकल ऑफिसर ने डिस्चार्ज समरी में लिखा कि लड़की वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी और उसे ICU में शिफ्ट किए जाने की जरूरत थी.
दिप्रिंट द्वारा देखी गई सर्वोदय अस्पताल की हाथ से लिखी डिस्चार्ज समरी के मुताबिक, लड़की को इमरजेंसी डिपार्टमेंट में अर्ध-बेहोशी की हालत में लाया गया था. CRPF जवान और उसकी पत्नी ने दावा किया कि वह रात में वॉशरूम में गिर गई थी.
डिस्चार्ज समरी में कहा गया है कि जांच के दौरान बच्चे की गर्दन, सिर, हाथों और पैरों पर कई चोटें पाई गईं.
इसमें यह भी दर्ज है कि जांच में बच्चे की आंखों के आसपास चोट के निशान, चेहरे या सिर पर चोट के कारण सूजन और सामान्य एडिमा पाई गई. चेहरे, गर्दन और शरीर पर कई निशान मौजूद थे. पुरानी और नई दोनों तरह की चोटें पाई गईं.
शिकायत के अनुसार, डॉक्टरों ने बताया कि लड़की की कई पसलियां टूटी हुई थीं, उसके नाखून फटे हुए थे और हीमोग्लोबिन का स्तर 1.9 था. यह लंबे समय तक उपेक्षा और कुपोषण का संकेत देता है.
CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट ने शनिवार को अपनी शिकायत में यह चिंता भी जताई कि अस्पताल से सबूत मिलने के बावजूद उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में समय पर FIR दर्ज नहीं की.
जांच जारी है, CRPF ने कहा
CRPF के एक प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि जवान को सस्पेंड कर दिया गया है और घटना की वजह बनी कमियों का पता लगाने के लिए जांच की जाएगी.
आधिकारिक बयान में कहा गया है, “वह अपने परिवार के साथ CRPF नोएडा कैंप में रहता था और उसके परिवार के साथ एक छोटी लड़की भी रहती थी, जो कथित तौर पर उसकी पत्नी की रिश्तेदार थी… घटना की गंभीरता को देखते हुए उक्त कांस्टेबल को सस्पेंड कर दिया गया है और प्रक्रिया के अनुसार जांच शुरू कर दी गई है.”
इसमें आगे कहा गया है, “CRPF जांच के लिए पुलिस को हर संभव सहायता देगी और उस छोटी लड़की के मेडिकल इलाज में पूरी मदद करेगी.”
CRPF सूत्रों ने दिप्रिंट को बताया कि फोर्स के डायरेक्टर जनरल ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने नोएडा पुलिस अधिकारियों से बात की और कहा कि वे नाबालिग के सभी मेडिकल खर्च उठाएंगे.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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