नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच चल रहा तनाव अब पड़ोसी राज्य झारखंड तक फैल गया है. कई स्रोतों के अनुसार, गुरुवार सुबह ईडी अधिकारी रांची स्थित अपने जोनल कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां पुलिस ने कार्यालय को चारों ओर से घेर रखा था.
एजेंसी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि रांची पुलिस ने ईडी के दो अधिकारियों की सेवा से जुड़ी जानकारी और जोनल कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज एकत्र की.
पिछली रात भेजे गए एक ईमेल में झारखंड पुलिस ने एजेंसी को ईडी के दो अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एक मामले की जानकारी दी थी. इनमें एक सहायक निदेशक भी शामिल है. इन अधिकारियों के खिलाफ एक पूर्व सरकारी कर्मचारी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है, जिसने उन पर जबरदस्ती और मारपीट का आरोप लगाया है.
गुरुवार को आरोपित ईडी अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट में एफआईआर रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दायर की. मामले की सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है. रिट याचिका में ईडी अधिकारियों ने रांची पुलिस को संतोष कुमार के खिलाफ शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देने और अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है.
रांची पुलिस द्वारा दर्ज मामले में शिकायतकर्ता संतोष कुमार झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में पूर्व कैशियर-कम-अपर डिवीजनल क्लर्क यानी यूडीसी रह चुका है.
कुमार को वर्ष 2024 में लगभग तीन करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी के मामले में पुलिस ने गिरफ्तार किया था. उसी साल ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी.
उसकी शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने मंगलवार को दो ईडी अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 115(2), 117(2), 127(2), 109(2), 351(2), 352, 238 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया.
एजेंसी के सूत्रों ने बताया कि मंगलवार को संतोष कुमार के खिलाफ भी एक शिकायत पुलिस को दी गई, जिसमें उसके खिलाफ आरोपों का विवरण शामिल था. इसमें यह भी कहा गया कि उसने जांच अधिकारी पर आरोप लगाकर ईडी जांच को प्रभावित करने की कोशिश की.
रांची जोन के पुलिस महानिरीक्षक मनोज कौशिक ने मामले पर कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया. वहीं, रांची के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राकेश रंजन को भेजे गए संदेश और फोन कॉल का कोई जवाब नहीं मिला.
इस बीच, ईडी के जोनल कार्यालय को घेरने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए झारखंड में विपक्ष ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार पर मुख्यमंत्री और पुलिस प्रशासन से जुड़े मामलों में अहम सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश का आरोप लगाया.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा, “ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामलों और पुलिस-प्रशासन से संबंधों से जुड़े महत्वपूर्ण सबूत मौजूद हैं. आशंका है कि पुलिस कार्रवाई की आड़ में इन अहम सबूतों से छेड़छाड़ या उन्हें नष्ट करने की कोशिश की जा सकती है.”
रांची के एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी के क्षेत्रीय कार्यालय को @ranchipolice द्वारा घेरने की सूचना प्राप्त हो रही है। ईडी कार्यालय में मुख्यमंत्री @HemantSorenJMM एवं पुलिस-प्रशासन से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार मामलों से संबंधित महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद हैं। आशंका है कि…
— Babulal Marandi (@yourBabulal) January 15, 2026
मरांडी ने आगे लिखा, “पहले भी झारखंड में ईडी के खिलाफ झूठे मामले दर्ज किए गए हैं और जेएमएम-कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा ईडी पर हमले की कोशिशें हुई हैं. इस तरह की घटनाएं जांच एजेंसियों के स्वतंत्र और निष्पक्ष कामकाज में बाधा डालने का प्रयास हैं. हेमंत जी, ध्यान से सुनिए… हम झारखंड को बंगाल नहीं बनने देंगे. भ्रष्टाचार के लिए आपको जरूर सजा मिलेगी.” उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से ईडी अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की तैनाती की मांग भी की.
इस महीने की शुरुआत में पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल में भी राज्य पुलिस और ईडी के बीच इसी तरह का टकराव सार्वजनिक रूप से सामने आया था. उस समय केंद्रीय एजेंसी ने राजनीतिक रणनीति कंपनी आई-पैक के कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापे मारे थे. आई-पैक कई वर्षों से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद छापे वाले स्थानों पर पहुंचीं और पार्टी से जुड़े संवेदनशील दस्तावेज बताए गए कागजात को वहां से “ले गईं”. ईडी ने ममता बनर्जी के इस कदम के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है और मामला अब सुप्रीम कोर्ट में है.
ED अधिकारियों के खिलाफ शिकायत में क्या कहा
गुरुवार के टकराव के केंद्र में मौजूद जांच एक 2023 के मामले से जुड़ी है, जिसमें झारखंड पुलिस ने संतोष कुमार पर ठेकेदार लार्सन एंड टुब्रो के नाम से फर्जी पेयी आईडी बनाकर सरकारी धन ट्रांसफर करने का आरोप लगाया था. पुलिस के अनुसार, कुमार ने चेक के जरिए 2.71 करोड़ रुपये की राशि गलत तरीके से ट्रांसफर की.
कुमार को अप्रैल 2024 में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था. इस दौरान ईडी अधिकारियों ने उससे धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के तहत पूछताछ की. एजेंसी के सूत्रों के मुताबिक, न्यायिक हिरासत के दौरान कुमार ने कहा था कि वह केवल फंड ट्रांसफर से जुड़े निर्देशों का पालन कर रहा था और वरिष्ठ अधिकारियों ने उसे बलि का बकरा बना दिया.
जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान कुमार ने आरोप लगाया कि वह कैशियर के रूप में अपनी ड्यूटी निभा रहा था, जिसमें ड्रॉइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर यानी डीडीओ द्वारा स्वीकृत बिलों के लिए चेक जारी करना शामिल था. कुमार को पिछले साल अप्रैल में जमानत मिल गई थी.
एक ईडी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “नवंबर-दिसंबर में उसने समन से बचने की कोशिश की थी और आशंका थी कि वह जांच से बच रहा है. सोमवार को वह खुद पेश हुआ. चूंकि उसे समन नहीं भेजा गया था, इसलिए पीएमएलए 2002 की धारा 50 के तहत उसका बयान दर्ज करने की प्रक्रिया अपनाई गई. लेकिन जैसे ही पूछताछ शुरू हुई और उसे सबूतों और उसके पुराने बयानों से रूबरू कराया गया, उसने एक कांच तोड़ दिया और खुद को घायल कर लिया.”
वहीं कुमार ने आरोप लगाया, “जब मैंने कबूल करने से इनकार किया, तो दोनों ईडी अधिकारियों ने मुझे बुरी तरह पीटा, गालियां दीं और मेरी मां और बहन को लेकर अपशब्द कहे. उन्होंने मुझे डंडे से बार-बार मारा और कहा कि अगर मैं मर भी गया तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मारपीट से मेरा सिर फट गया और बहुत खून बहने लगा.”
उसने अपनी पुलिस शिकायत में आगे कहा, “वे मुझे दोपहर दो बजे सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में ले गए, जहां उन्होंने मुझे धमकाया कि डॉक्टर से कहना होगा कि चोटें हादसे में लगी हैं, वरना मुझे, मेरी पत्नी और बच्चों को जेल भेज देंगे. सदर अस्पताल में मेरे सिर पर छह टांके लगे.”
कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि उसे शाम चार बजे तक अस्पताल में रखा गया और बाद में एजेंसी के जोनल कार्यालय ले जाया गया, जहां उसकी “खून से सनी टी-शर्ट जबरन उतार ली गई”. उसने कहा कि अपने परिवार को अपनी स्थिति की जानकारी देने की उसकी बार-बार की गई मांगों को ठुकरा दिया गया.
उसने आरोप लगाया, “इन्हीं धमकियों के जरिए मुझसे ‘इंसिडेंट रिपोर्ट’ नाम के एक दस्तावेज पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसे मुझे पढ़ने तक नहीं दिया गया. मुझसे यह लिखवाया गया कि मैं 16 जनवरी 2026 को फिर से ईडी कार्यालय में पेश होने का अनुरोध करता हूं और यह भी कि मैं आज स्वेच्छा से ईडी कार्यालय आया था. यह सब धमकी के तहत कराया गया.”
कुमार ने आगे कहा, “इसके बाद भी मुझे रात 10:45 बजे तक जबरन ईडी कार्यालय में रोके रखा गया, जिससे मैं समय पर पुलिस, अपने वकील, परिवार या मीडिया को इस घटना की जानकारी नहीं दे सका.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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