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Wednesday, 14 January, 2026
होमदेशआतंकी कनेक्शन के आरोप: J&K में शिक्षक, लैब टेक्नीशियन समेत 5 कर्मचारी बर्खास्त

आतंकी कनेक्शन के आरोप: J&K में शिक्षक, लैब टेक्नीशियन समेत 5 कर्मचारी बर्खास्त

मंगलवार को की गई बर्खास्तगी के बाद, 2021 से अब तक केंद्र शासित प्रदेश में बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारियों की संख्या 85 से ज्यादा हो गई है.

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नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल (एल-जी) मनोज सिन्हा ने मंगलवार को लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से जुड़े होने के आरोप में पांच सरकारी कर्मचारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया.

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के सूत्रों ने बर्खास्त किए गए अधिकारियों की पहचान मोहम्मद इशफाक, तारिक अहमद रह, बशीर अहमद मीर, फारूक अहमद भट और मोहम्मद यूसुफ के रूप में की है. प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार की बर्खास्तगी के बाद 2021 से अब तक बर्खास्त किए गए सरकारी कर्मचारियों की संख्या 85 से अधिक हो गई है.

पिछले साल अगस्त में भी सिन्हा ने कुपवाड़ा में एक शिक्षक और एक सहायक स्टॉकमैन को लश्कर से मिलीभगत के आधार पर बर्खास्त किया था.

इन बर्खास्तगियों को उपराज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 311 (2) (c) के तहत लागू किया, जो राज्य की सुरक्षा के हित में बिना जांच के सरकारी कर्मचारी को बर्खास्त करने की अनुमति देता है.

केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के एक सूत्र ने कहा, “ये सक्रिय सहयोगी, जिन्हें आतंकी संगठनों और पाकिस्तान की आईएसआई ने सरकारी तंत्र के भीतर बैठाया था, टाइम बम की तरह हैं. इन्होंने पिछले कई दशकों में सिस्टम में घुसपैठ कर सरकारी मशीनरी को कमज़ोर किया और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला.”

इशफाक को अप्रैल 2022 में डोडा में एक पुलिस अधिकारी की हत्या की योजना को अंजाम देने से पहले गिरफ्तार किया गया था. उन्होंने रहबर-ए-तालीम (शिक्षक भर्ती योजना) के तहत सेवा जॉइन की थी और 2013 में उन्हें स्थायी शिक्षक बनाया गया था.

हालांकि, सूत्रों के अनुसार, वह युवाओं को आतंकी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रभावित करने में शामिल पाया गया और पाकिस्तान स्थित लश्कर कमांडर मोहम्मद अमीन उर्फ अबू खुबैब के साथ मिलकर काम कर रहा था.

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने इशफाक से जुड़े ठिकानों से हथियार और गोला-बारूद बरामद किया.

एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, “उसने कट्टरपंथी विचारधारा फैलाने, युवाओं को आतंकवाद की ओर प्रेरित करने और जम्मू-कश्मीर की शांति और विकास को बाधित करने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया. शिक्षक होने के नाते, जिसकी युवाओं तक सीधी पहुंच थी, इशफाक लश्कर के लिए एक अहम संपत्ति था. हमें इनपुट मिले हैं कि जेल में रहते हुए भी वह कैदियों को गुमराह कर कट्टर गतिविधियों में शामिल है.”

इसी तरह, तारिक अहमद रह, जिन्हें 2011 में स्वास्थ्य विभाग में अनुबंध पर लैब टेक्नीशियन रखा गया था और 2016 में स्थायी किया गया, को राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने गिरफ्तार किया. उस पर आरोप है कि उन्होंने 2005 में अपने चाचा और हिज्बुल मुजाहिदीन के पूर्व डिविजनल कमांडर अमीन बाबा को पाकिस्तान भेजने में मदद की थी. यह मामला 2023 में एसआईए को सौंपा गया था.

सूत्रों ने कहा कि तारिक कम उम्र से ही आतंकी संगठनों के प्रभाव में था और उसने बाबा को अनंतनाग में ठहराने और अटारी-वाघा बॉर्डर तक पहुंचाने की व्यवस्था की थी.

सूत्र ने कहा, “तारिक ने एक वांछित आतंकी को अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कराने में मदद की. उसकी साजिश के कारण अमीन बाबा पाकिस्तान पहुंच गया और वहां से आतंकी गतिविधियां चला रहा है.”

खुफिया एजेंसियों के सूत्रों का दावा है कि बाबा पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और जैश-ए-मोहम्मद तथा लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों के साथ नियमित बैठकें करता था.

एक खुफिया सूत्र ने कहा, “वह न सिर्फ हिज्बुल कैडर को आतंकी शिविरों में ट्रेनिंग देने, बल्कि युवाओं की भर्ती और पाकिस्तान से आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में भी शामिल था. उसकी भूमिका सामने आने के बाद तारिक को यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया और बाद में उसे जमानत मिल गई.”

सूत्र ने आगे कहा, “पुख्ता खुफिया जानकारी से पता चलता है कि जमानत पर रिहा होने के बाद भी तारिक ने अपनी आतंकी गतिविधियां फिर से शुरू कर दीं और आतंकियों तथा उनके समर्थकों के संपर्क में रहा.”

वन विभाग में फील्ड वर्कर के रूप में नियुक्त फारूक अहमद भट को भी बाबा को पाकिस्तान भेजने की योजना में शामिल पाया गया. 2024 में उसे गिरफ्तार किया गया था और पिछले साल उसे जमानत मिल गई, सूत्रों ने बताया.

भट एक पूर्व विधायक का अनौपचारिक निजी सहायक भी था और उसने अपनी सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल कर सुरक्षा जांच से बचाते हुए बाबा को भगाने में मदद की. उसने विधायक की गाड़ी और ड्राइवर का इस्तेमाल कर बाबा को अंतरराष्ट्रीय सीमा तक छोड़ा.

वहीं, बशीर अहमद मीर को 1988 में पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग (PHE) विभाग में नियुक्त किया गया था और 1996 में उन्हें असिस्टेंट लाइनमैन के रूप में नियमित किया गया.

सूत्रों के अनुसार, बाद में मीर बांदीपोरा जिले के गुरेज इलाके में ओवरग्राउंड वर्कर (OGW) बन गया और आतंकियों को रास्ता दिखाने, लॉजिस्टिक सपोर्ट देने, ठहरने की जगह उपलब्ध कराने और सुरक्षा बलों की आवाजाही की जानकारी साझा करने लगा.

सितंबर 2021 में वह सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आया, जब पुलिस को सूचना मिली कि उसके घर में दो लश्कर आतंकी छिपे हैं. उसके घर पर हुई कार्रवाई में दोनों आतंकी मारे गए.

एक सूत्र ने कहा, “दो एके-47 और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया. उसे गिरफ्तार किया गया और बाद में अदालत से मेडिकल जमानत मिली. बशीर जैसे लोग, जो सरकारी सिस्टम के भीतर रहकर भारतीय खजाने से वेतन लेते हुए दुश्मन की सेवा करते हैं, देश की संप्रभुता और अखंडता के लिए गंभीर खतरा हैं.”

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में ड्राइवर के रूप में काम करते हुए मोहम्मद यूसुफ हिज्बुल कैडर, खासकर पाकिस्तान स्थित कमांडर बशीर अहमद भट के संपर्क में था. उसके निर्देश पर यूसुफ गांदरबल जिले में गोला-बारूद और पैसे की आवाजाही देखता था.

सूत्रों के मुताबिक, जुलाई 2024 में एक ऐसी ही खेप की डिलीवरी के दौरान यूसुफ को उसके साथी एहसान हमीद के साथ गिरफ्तार किया गया. वाहन से पुलिस ने एक पिस्तौल, गोला-बारूद, एक ग्रेनेड और 5 लाख रुपये नकद बरामद किए.

एक सूत्र ने कहा, “लगातार पूछताछ में यूसुफ ने बताया कि उसे यह खेप उसके पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर मिली थी और इसे एक आतंकी तक पहुंचाया जाना था.”

सूत्र के मुताबिक, यूसुफ ने यह भी कबूल किया कि वह अस्पताल ड्राइवर के रूप में अपने सरकारी पद का इस्तेमाल कर आतंकियों को ऑपरेशनल लॉजिस्टिक सपोर्ट देता था और वह उस नेटवर्क का भी हिस्सा था जो जेल में बंद आतंकियों को फोन उपलब्ध कराकर पाकिस्तान में बैठे आतंकियों से संपर्क कराता था.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)

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