गुरुग्राम: हरियाणा विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे जिला स्तर पर ऐसे “कुख्यात और खुले तौर पर अवज्ञाकारी” अधिकारियों की सूची तैयार करें, जो रिश्वत लिए बिना काम करने से इनकार करते हैं और जिनकी “भ्रष्ट छवि” व्यापक रूप से जानी जाती है.
यह निर्देश मंगलवार को समीक्षा बैठक के दौरान राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो के नए पुलिस महानिदेशक अर्शिंदर सिंह चावला द्वारा जारी कई निर्देशों में शामिल था.
ब्यूरो प्रमुख ने ईमानदार अधिकारियों की सुरक्षा के लिए भी कदम उठाने को कहा. उन्होंने निर्देश दिया कि जो अधिकारी ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, उनके साथ लगातार संवाद बनाए रखा जाए. उन्होंने कहा कि उनके काम की सार्वजनिक रूप से सराहना की जानी चाहिए और उन्हें पुरस्कृत किया जाना चाहिए.
मंगलवार को पदभार संभालने के तुरंत बाद, उन्होंने सभी रेंज के पुलिस अधीक्षकों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इसमें उन्होंने ब्यूरो की प्राथमिकताओं, कार्यप्रणाली और भविष्य की रणनीति पर स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए. उन्होंने चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाइयों की भी विस्तार से समीक्षा की.
उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा कि हर जिले में कुछ ऐसे अधिकारी और कर्मचारी होते हैं जिनकी “भ्रष्ट छवि” व्यापक रूप से जानी जाती है और जो अवैध रिश्वत के बिना सरकारी काम करने से इनकार करते हैं.
उन्होंने कहा, “ऐसे कुख्यात और खुले तौर पर अवज्ञाकारी तत्वों की पहचान की जानी चाहिए और उनकी व्यापक, सत्यापित और नियमित रूप से अपडेट की जाने वाली सूचियां तैयार की जानी चाहिए. स्पष्ट प्राथमिकताएं तय की जानी चाहिए और उसके बाद ठोस कार्रवाई की जानी चाहिए.”
इसके बाद उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, “भ्रष्ट अधिकारियों को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए—देर-सवेर उन्हें कानून के दायरे में लाया जाएगा और उन्हें रंगे हाथ पकड़ने के लिए सभी प्रयास किए जाएंगे.”
बैठक का विवरण राज्य के विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो के एक्स हैंडल पर भी साझा किया गया.
Fear for the #Corrupt, Confidence for the Honest: Arshinder Chawla Puts Vigilance Bureau in Action Mode#ZeroTolerance from Day One: Arshinder Chawla’s Clear Message — Planned Crackdown on Bribery, Technology to Be the Strongest Weapon
Taking charge with a firm resolve,…
— State Vigilance & Anti Corruption Bureau, Haryana (@SVBHaryana) January 6, 2026
पहले की ‘शर्मिंदगी’
भ्रष्ट अधिकारियों की सूची तैयार करने के इस कदम ने उस पहले के विवाद की यादें ताजा कर दी हैं, जब 370 कथित भ्रष्ट पटवारियों की एक लीक सूची वायरल हो गई थी. इस पर न्यायिक जांच शुरू हुई थी और सरकार को नुकसान नियंत्रण की स्थिति में आना पड़ा था.
साहिबजीत सिंह संधू द्वारा अपने वकील इशानी गोयल के माध्यम से दायर एक जनहित याचिका पर कार्रवाई करते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सूची लीक होने और उसमें नामित लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर जवाब मांगा था.
हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट को बताया था कि “भ्रष्ट पटवारियों” की सूची लीक होने के मामले में तीन सरकारी अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है.
8 सितंबर को दाखिल एक अतिरिक्त हलफनामे में हरियाणा सरकार के विशेष सचिव के.के. भडू ने कहा कि तत्कालीन अंडर सेक्रेटरी राजीव मल्होत्रा (अब डिप्टी सेक्रेटरी), डिप्टी सुपरिंटेंडेंट आज़ाद बलदिया और सहायक रविंदर कुमार के खिलाफ सूची “अनजाने में” जारी करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है.
अदालत द्वारा यह पूछे जाने पर कि दोष सिद्ध हुए बिना पटवारियों को भ्रष्ट बताने वाली आपत्तिजनक सामग्री को सार्वजनिक डोमेन से आधिकारिक रूप से वापस लिया गया है या नहीं, अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक बाल्यान और अंकुर मित्तल के नेतृत्व में कानून अधिकारियों ने दावा किया कि ऐसी किसी भी प्रकाशन को सरकार की ओर से कभी अधिकृत नहीं किया गया था.
उन्होंने कहा कि यह ज्ञात नहीं है कि अखबारों और मीडिया संस्थानों के पास यह दस्तावेज कैसे पहुंचा.
इसके बाद डिवीजन बेंच ने पांच अखबारों के संपादकों को नोटिस जारी किए. अदालत ने कहा कि यह पता लगाने का एकमात्र तरीका कि सूची अनजाने में जारी हुई थी या आधिकारिक रूप से, उसे प्रकाशित करने वालों से पूछताछ करना है. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 7 नवंबर 2025 के लिए तय की.
प्रतिवादियों की ओर से जवाब अभी आना बाकी है, हालांकि मामले की सुनवाई 7 नवंबर और 17 दिसंबर को हो चुकी है.
‘कुछ बिना रिश्वत के हिलते नहीं’
बुधवार को दिप्रिंट द्वारा उनके निर्देश के सिलसिले में संपर्क किए जाने पर डीजीपी (राज्य विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो) चावला ने कहा कि सूची बनाने और उसे अपडेट रखने का उद्देश्य उसे लोगों में बांटना नहीं, बल्कि ऐसे अधिकारियों की गतिविधियों पर नजर रखना है.
उन्होंने कहा, “हर दफ्तर में कुछ ऐसे अधिकारी होते हैं जो बिना रिश्वत के हिलते नहीं हैं. ऐसे अधिकारियों के नाम पहले से ही लोगों को पता होते हैं. जैसे पुलिस आदतन अपराधियों के पीछे एक खास रणनीति से पड़ती है, वैसे ही आदतन भ्रष्ट अधिकारियों को कानून के दायरे में लाने के लिए भी अलग तरीका जरूरी है.”
उन्होंने आगे कहा, “जिला स्तर पर सूची तैयार करने का मकसद ऐसे अधिकारियों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखना है. अंततः लक्ष्य समाज में भ्रष्टाचार की समस्या पर लगाम लगाना है.”
मंगलवार को हुई बैठक में चावला ने सभी रेंज एसपी को ऐसे अधिकारियों की पहचान करने और लक्षित कार्रवाई के लिए व्यापक, सत्यापित और नियमित रूप से अपडेट की जाने वाली सूचियां बनाए रखने के निर्देश दिए.
इस निर्देश के साथ “पहले दिन से शून्य सहनशीलता” का वादा भी किया गया.
अर्शिंदर सिंह चावला, डीजी, विजिलेंस और एसीबी, हरियाणा ने कहा, “जैसे पुलिस आदतन अपराधियों के पीछे एक खास रणनीति से पड़ती है, वैसे ही आदतन भ्रष्ट अधिकारियों को कानून के दायरे में लाने के लिए भी अलग तरीका जरूरी है.”
डीजी ने इस बात पर जोर दिया कि “100 प्रतिशत सफलता दर” के लिए अच्छी तरह योजनाबद्ध, गोपनीय और तकनीकी रूप से मजबूत ट्रैप ऑपरेशन तैयार किए जाने चाहिए और प्रक्रियात्मक चूकों की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.
उन्होंने मामलों को मजबूत करने में आधुनिक तकनीक के अधिकतम इस्तेमाल का निर्देश दिया और कहा कि डिजिटल युग में तकनीकी रूप से दक्ष होना अब विकल्प नहीं रहा. उन्होंने कहा, “उन्नत तकनीकी उपकरण न केवल ठोस सबूतों के साथ ट्रैप मामलों को मजबूत करते हैं, बल्कि अदालतों में प्रभावी अभियोजन और मामलों के त्वरित निपटारे में भी अहम भूमिका निभाते हैं.”
ब्यूरो प्रमुख ने रेखांकित किया कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि व्यवस्था की सफाई करना है.
उन्होंने कहा, “इसे हासिल करने के लिए भ्रष्ट अधिकारियों में कड़े कानूनी भय की भावना पैदा करनी होगी, और साथ ही ईमानदार अधिकारियों का मनोबल बढ़ाना होगा, ताकि वे बिना डर या दबाव के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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