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Saturday, 17 January, 2026
होमरिपोर्टराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जशक्राफ्ट की जनजातीय मातृशक्ति के कौशल की सराहना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जशक्राफ्ट की जनजातीय मातृशक्ति के कौशल की सराहना

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय समुदायों की परंपराओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है. अपनी जनजातीय विरासत और पहचान को सुरक्षित रखते हुए युवाओं को आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि जनजातीय समाज अपनी धरोहर को संजोते हुए निरंतर प्रगति करेगा.

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रायपुर: भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के गुमला में आयोजित अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जतरा’ में जशपुर जिले की स्व-सहायता समूहों से जुड़ी जनजातीय महिलाओं के कौशल, मेहनत और आत्मनिर्भरता की सराहना की. उन्होंने विशेष रूप से ‘जशक्राफ्ट’ से जुड़ी जनजातीय बहनों द्वारा तैयार किए जा रहे आभूषणों और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण है.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जशपुर वनमंडल अंतर्गत वन प्रबंधन समिति शब्दमुंडा, ग्राम कोटानपानी की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों को जनजातीय सृजनशीलता, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रेरक प्रतीक बताया. उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास न केवल आजीविका के साधन बढ़ाते हैं, बल्कि पारंपरिक कला और हस्तशिल्प को नई पहचान भी दिलाते हैं.

इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी झारखंड के मांझाटोली में आयोजित अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम कार्तिक जतरा में शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि जशपुर की जनजातीय मातृशक्ति, विशेषकर जशक्राफ्ट से जुड़ी बहनों का कौशल और स्वावलंबन पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है. ग्राम कोटानपानी की स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए आभूषण और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और महिलाओं की मेहनत व सृजनात्मकता के जीवंत प्रतीक हैं.

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रपति का यह स्नेहपूर्ण आशीर्वाद और प्रोत्साहन जनजातीय मातृशक्ति के आत्मविश्वास को और मजबूत करेगा तथा आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल की भावना को नई ऊर्जा देगा. उन्होंने जशपुर की समस्त जनजातीय बहनों की ओर से राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया.

कार्यक्रम के दौरान जनजातीय हस्तशिल्प, पारंपरिक लोककला और स्व-सहायता समूहों के उत्पादों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही. छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधि दल ने जशपुर जिले की विशिष्ट शिल्प परंपरा और स्थानीय उत्पादों का प्रदर्शन कर जनजातीय सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया.

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि युवाओं और आने वाली पीढ़ियों को जनजातीय समुदायों की परंपराओं से जोड़ना बेहद आवश्यक है. अपनी जनजातीय विरासत और पहचान को सुरक्षित रखते हुए युवाओं को आधुनिक विकास के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने विश्वास जताया कि जनजातीय समाज अपनी धरोहर को संजोते हुए निरंतर प्रगति करेगा.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि मांझाटोली में आयोजित यह अंतरराज्यीय जन-सांस्कृतिक समागम केवल सांस्कृतिक विरासत का सम्मान नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को जोड़ने वाला सेतु भी है. इस ऐतिहासिक आयोजन में शामिल होना उनके लिए गर्व और आस्था का विषय है.

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