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Monday, 26 January, 2026
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बांग्लादेश की राजनीति में तारीक रहमान का अंधेरा अतीत रहा है, पहले उन्हें अपनी छवि सुधारनी होगी

आज बीएनपी के सामने एक बड़ी चुनौती उसके पूर्व सहयोगी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी का उभार है. फरवरी 2026 के चुनावों में दोनों पार्टियां आमने-सामने होंगी.

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बांग्लादेश की बेचैनी भरी सर्दियों में, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारीक रहमान क्रिसमस की सुबह जैसी मिठास भरे वादों और अपनापन लेकर अपने लोगों के बीच लौटे. “मेरे पास एक योजना है” उन्होंने 25 दिसंबर को ढाका के पूर्वाचल में 300 फीट रोड पर उनका स्वागत करने आए जोशीले समर्थकों से कहा. बाहें फैलाए हुए उन्हें देखकर कई न्यूज़ पोर्टलों ने उनके भाषण की तुलना मार्टिन लूथर किंग जूनियर के मशहूर भाषण “आई हैव ए ड्रीम” से कर दी.

बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष और देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के नेता, तारीक रहमान 17 साल के ब्रिटेन निर्वासन के बाद स्वदेश लौटे हैं. शेख हसीना की अवामी लीग की राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध के चलते फिलहाल बीएनपी प्रमुख भूमिका में है.

उनकी वापसी पर हज़ारों समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता ढाका की सड़कों पर उमड़ पड़े. तारीक रहमान ने अपना भाषण “प्रिय बांग्लादेश” शब्दों से शुरू किया. उन्होंने समावेशी बांग्लादेश की बात की, अर्थव्यवस्था सुधारने की ज़रूरत बताई और देश में शांति, व्यवस्था और स्थिरता लाने का वादा किया, जो इस समय क़ानूनहीनता और सांप्रदायिक हिंसा की चपेट में है.

तारीक रहमान का भाषण बांग्लादेश के कई वर्गों में तुरंत लोकप्रिय हो गया. ढाका विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर सब्बीर अहमद ने इसे “प्रेरणादायक और उम्मीद जगाने वाला” बताया, लेकिन इससे पहले कि हम तारीक रहमान को बांग्लादेश की टूटी-बिखरी राजनीति का अगला बड़ा चेहरा मान लें, ज़रूरी है कि 60-वर्षीय यह नेता पहले अपनी पार्टी को संभाले. साथ ही, बांग्लादेश की राजनीति में अपने ही अतीत की लंबी और विवादित छाया से खुद को अलग भी करे.

अंदरूनी कलह

तारीक रहमान की बीएनपी में सब कुछ ठीक नहीं है. इस साल अक्टूबर में बांग्लादेशी प्रेस ने रिपोर्ट किया था कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व देश भर में “बेलगाम” नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगे कई आरोपों से निपट रहा है.

प्रोथोम आलो की एक रिपोर्ट के मुताबिक, “5 अगस्त (2024) को हालात बदलने के बाद, पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन करने और हमले, कब्ज़ा, वसूली, दबदबा कायम करने जैसे आरोपों के चलते बीते दो महीनों में बीएनपी ने 1,000 से ज़्यादा नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की है.”

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि निष्कासन, पदावनति और कमेटियों को भंग करने जैसी सख्त कार्रवाइयों के बावजूद नए आरोप सामने आते जा रहे हैं. प्रोथोम आलो से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि इतने कम समय में इतनी बड़ी संख्या में नेताओं के खिलाफ कार्रवाई बीएनपी के इतिहास में पहली बार हुई है.

अब देखना यह है कि इस तरह की गंभीर रिपोर्ट के प्रकाशित होने के बाद बीते दो महीनों में पार्टी के भीतर हालात सुधरे हैं या नहीं. आज बीएनपी के सामने एक और बड़ी चुनौती उसके पूर्व सहयोगी बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी का उभार है. जमात और बीएनपी ने 2001 में मिलकर सरकार बनाई थी और शेख हसीना की अवामी लीग के सत्ता में रहने के दौरान उसके खिलाफ भी साथ मिलकर चुनाव लड़े थे. इस बार फरवरी 2026 के चुनावों में बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामवादी राजनीतिक पार्टी और तारीक रहमान की पार्टी आमने-सामने हैं.

हालांकि, जमात की राजनीतिक ताकत को बीएनपी के मुकाबले काफी कम माना जाता है और यह उम्मीद की जा रही थी कि अगला चुनाव बीएनपी ही जीतेगी, लेकिन विश्वविद्यालयों के अहम छात्रसंघ चुनावों में जमात की छात्र शाखा की चौंकाने वाली जीत ने ढाका के राजनीतिक विश्लेषकों के मन में वाजिब शंकाएं पैदा कर दी हैं.

ढाका यूनिवर्सिटी और जहांगीरनगर यूनिवर्सिटी के केंद्रीय छात्रसंघ चुनावों में जब बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी की छात्र शाखा जमात शिबिर ने बीएनपी की छात्र इकाई को बुरी तरह हराया, तो बीएनपी के भीतर खतरे की घंटी बजने लगी.

नाम न छापने की शर्त पर बीएनपी के एक उपाध्यक्ष ने प्रेस को बताया कि राष्ट्रीय चुनाव से पहले पार्टी ने अपनी सभी इकाइयों और सहयोगी संगठनों में नई कमेटियों के गठन पर रोक लगाने का फैसला किया है, सिवाय उन इलाकों के जहां अभी कोई कमेटी मौजूद नहीं है. विश्वविद्यालय चुनावों के नतीजों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब रहमान का मानना है कि पार्टी को पूरी तरह राष्ट्रीय चुनाव पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए और अपनी लोकप्रियता बनाए रखने के लिए देश भर में जनता से संपर्क मज़बूत करना चाहिए.

बीएनपी के एक सूत्र ने दिप्रिंट को बताया कि देश के 40 प्रतिशत मतदाता युवा हैं, ऐसे में जमात और नेशनल सिटिज़न पार्टी (एनसीपी) — जिसका नेतृत्व जुलाई 2024 के आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले छात्र कर रहे हैं — दोनों ही युवा उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रहे हैं.

सूत्र ने कहा, “सिर्फ एनसीपी ही नहीं, जमात के नामित उम्मीदवारों में भी बड़ी संख्या में युवा हैं और पार्टी ने युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए लक्षित अभियान शुरू किए हैं.” इसके उलट, बीएनपी के ज़मीनी स्तर पर असंतोष बढ़ रहा है, जहां टिकट उम्रदराज़ पार्टी नेताओं को दिए गए हैं. सूत्र ने आगे कहा, “जो उम्मीदवार इस पीढ़ी से सीधे तौर पर जुड़े नहीं हैं या ग्राउंड पर सक्रिय नहीं हैं, उनके लिए युवा मतदाताओं को आकर्षित करना मुश्किल हो सकता है.”

सूत्र ने दिप्रिंट को बताया, नोआखाली-4 (सदर–सुबर्णचर) सीट पर बीएनपी के उपाध्यक्ष मोहम्मद शाहजहान गंभीर रूप से बीमार पड़ गए हैं, जिससे मुकाबले को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है. इस बात पर भी संदेह जताया जा रहा है कि वे प्रचार अभियान में शामिल हो पाएंगे या नहीं. इसी तरह, ब्राह्मणबारिया-4 (कस्बा–अखौरा) सीट पर पार्टी ने 88-वर्षीय मुश्फिकुर रहमान को प्रारंभिक टिकट दिया है, जिससे युवा पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराज़गी है.

ढाका के पत्रकार मारुफ हसन के अनुसार, तारीक रहमान लंबे समय तक लंदन से ही पार्टी चला रहे थे और इसी वजह से उनके और जमीनी स्तर के नेताओं व कार्यकर्ताओं के बीच कुछ दूरी बन गई थी, लेकिन हसन ने दिप्रिंट से कहा, “उनकी वापसी से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा हुआ है, जो आने वाले चुनावों में एक बड़ा कारक साबित हो सकता है.”

अधूरा अतीत

हसीना के बांग्लादेश में तारीक रहमान को भगोड़ा घोषित किया गया था. उनके खिलाफ एक दर्जन से ज्यादा मामले थे, जिनमें भ्रष्टाचार और हत्या के प्रयास जैसे आरोप शामिल थे. 21 अगस्त 2004 को ढाका के बंगबंधु एवेन्यू पर अवामी लीग द्वारा आयोजित एक आतंकवाद विरोधी रैली में 13 ग्रेनेड फेंके गए थे. इस हमले में मौके पर ही 18 लोगों की मौत हो गई थी, जो बाद में बढ़कर 24 हो गई. 500 से ज्यादा लोग घायल हुए थे, जिनमें शेख हसीना भी शामिल थीं.

इस हमले के मामले में तारीक रहमान को आजीवन कारावास की सज़ा दी गई थी. उस समय उनकी मां खालिदा जिया बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं. 4 सितंबर 2025 को, हसीना के बांग्लादेश छोड़ने के एक महीने बाद, बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त ग्रेनेड हमला मामले में रहमान और सभी अन्य आरोपियों को बरी कर दिया.

इसके अलावा भी अन्य आरोप रहे हैं. 23 फरवरी 2023 को इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू में भारत की रक्षा खुफिया एजेंसी के पूर्व उप महानिदेशक मेजर जनरल गगनजीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा था कि अप्रैल 2004 में बांग्लादेश के चटगांव में हथियारों की एक बड़ी खेप — 10 ट्रक हथियार, जब्त की गई थी. उनके अनुसार, यह खेप यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA) और भारत के पूर्वोत्तर के अन्य उग्रवादी समूहों के लिए थी, ताकि क्षेत्र को अस्थिर किया जा सके.

सिंह ने आरोप लगाया कि हथियारों की यह सप्लाई बीएनपी और जमात के गठबंधन के जरिए की गई थी. उन्होंने कहा कि ULFA प्रमुख परेश बरुआ, जो “साजिश का मास्टरमाइंड” था, बांग्लादेश की खुफिया एजेंसियों के करीबी संपर्क में था, जिनके तार उनके मुताबिक तारीक रहमान से जुड़े थे.

इसके बाद 2001-06 के दौर के दौरान रिश्वतखोरी और वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण देने के भी आरोप लगे, जब खालिदा जिया प्रधानमंत्री थीं—इन्हीं आरोपों के चलते तारीक रहमान को बांग्लादेशी राजनीति का “डार्क प्रिंस” कहा जाने लगा.

बांग्लादेशी पत्रकार साहिदुल हसन खोकोन, जिन्होंने रहमान के राजनीतिक करियर पर करीब से नज़र रखी है, उन्होंने दिप्रिंट से कहा कि बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष का राजनीतिक उभार उनकी मां खालिदा जिया के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ. खोकोन ने कहा, “किसी संवैधानिक पद पर न रहते हुए भी उन्होंने पार्टी के भीतर अपना प्रभाव बढ़ाया और शासन पर अनौपचारिक नियंत्रण व्यवस्था तथा कारोबार और सरकारी ठेकों पर राजनीतिक सिंडिकेट के नियंत्रण के आरोप सामने आए.”

25 दिसंबर के उनके भाषण के बाद, बांग्लादेश के राजनयिक और मोरक्को में बांग्लादेश के पूर्व राजदूत मोहम्मद हारुन अल राशिद ने एक्स पर लिखा: “इसमें कोई जान नहीं थी. कोई जोखिम नहीं. कोई दृष्टि नहीं. उन्होंने बस यह कहकर अपनी जूनियर विंग को साथ ले लिया कि उनके पास एक योजना है. इतना ही काफी था. नाटककार दृश्य गढ़ नहीं सका—बस यह घोषणा कर दी कि दृश्य मौजूद है.”

अब देखना यह है कि क्या रहमान अपने पार्टी कैडर को सक्रिय कर और अपने अतीत से रिश्ते तोड़कर एक नए बांग्लादेश की तस्वीर गढ़ पाते हैं या नहीं.

(दीप हालदार लेखक और पत्रकार हैं. उनका एक्स हैंडल @deepscribble है. यह उनके निजी विचार हैं.)

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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