हैदराबाद: आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव को लिखे एक लंबे पत्र में, जिसे उन्होंने पूरा X पर पोस्ट किया, पूर्व CBI निदेशक एम. नागेश्वर राव ने राज्य में गैर-मुस्लिम लड़कों के बीच खतना को बढ़ावा देने वाले कथित रैकेट का आरोप लगाया.
30 मिनट से भी कम समय में, आंध्र प्रदेश के एकमात्र बीजेपी मंत्री यादव ने X पर जवाब देते हुए कहा कि उनका विभाग इन आरोपों की जांच करेगा.
अपने पोस्ट में पूर्व IPS अधिकारी राव ने लिखा कि NDA शासित राज्य के अस्पतालों में लड़कों का खतना किया जा रहा है, जिनमें गैर-मुस्लिम समुदायों के लड़के भी शामिल हैं.
उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस बात की विश्वसनीय जानकारी है कि कई मेडिकल प्रैक्टिशनरों को यह मानने के लिए “सिखाया या प्रभावित किया जा रहा है कि खतना एक लाभकारी मेडिकल प्रक्रिया है”.
राव के पत्र में कहा गया, इसके परिणामस्वरूप वे गैर-मुस्लिम लड़कों को खतना कराने की सलाह दे रहे हैं और यह प्रक्रिया कर भी रहे हैं.
पूर्व IPS अधिकारी ने आगे लिखा कि आंध्र प्रदेश में यह प्रथा काफी समय से जारी है और उन्हें संदेह है कि यह किसी सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देने का संगठित प्रयास है. उन्होंने लिखा, “यह प्रथा बेहद चिंताजनक है, क्योंकि ऐसा लगता है कि यह मेडिकल शिक्षा या प्रशिक्षण में फैलाए जा रहे गलत तथ्यों से जुड़ी है. संभव है कि इसके पीछे वैज्ञानिक मेडिकल प्रैक्टिस की आड़ में किसी खास धार्मिक या सांप्रदायिक एजेंडे को बढ़ावा देने का संगठित प्रयास हो”.
Sri @satyakumar_y garu
Hon’ble Minister for Health, Family Welfare & Medical Education, Andhra PradeshSub: Alleged Promotion of Circumcision as a Routine Medical Practice in Andhra Pradesh
Sir,
It has come to my notice through credible sources that many medical practitioners… pic.twitter.com/n6bohF60is
— M. Nageswara Rao IPS (Retired) (@MNageswarRaoIPS) December 20, 2025
दिप्रिंट से बात करते हुए एम. नागेश्वर राव ने कहा कि उनका पत्र आंध्र प्रदेश के कई मेडिकल प्रैक्टिशनरों और “कुछ प्रभावित युवाओं” से मिली विश्वसनीय जानकारी पर आधारित है.
पूर्व IPS अधिकारी ने आंध्र प्रदेश के सरकारी और निजी अस्पतालों में गैर-मुस्लिम लड़कों के खतने के आरोपों की निष्पक्ष और गहन जांच के लिए एक जांच समिति बनाने की मांग की है.
दिप्रिंट से बात करते हुए ओडिशा कैडर के 1986 बैच के IPS अधिकारी ने कहा, “एक संगठित रैकेट लगता है, जो गहन जांच से सामने आ सकता है. इस संवेदनशील मुद्दे को जनस्वास्थ्य, मेडिकल नैतिकता और सांप्रदायिक सौहार्द के हित में गंभीरता और तात्कालिकता के साथ सुलझाया जाना चाहिए”.
उन्होंने यह भी मांग की है कि पिछले 10 साल या उससे अधिक के मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा की जाए, ताकि हर मामले में खतना करने के मेडिकल कारणों और औचित्य की जांच की जा सके.
उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री सत्य कुमार यादव को लिखे पत्र में कहा, “आंध्र प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के सिलेबस, शिक्षण सामग्री और प्रशिक्षण मॉड्यूल की जांच की जाए, ताकि यह पता चल सके कि क्या इस तरह की जानकारी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनकर दी जा रही है. राज्य में मेडिकल प्रैक्टिशनरों के बीच इस तरह की प्रथाओं की व्यापकता की भी जांच की जाए”. उन्होंने तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की.
एम. नागेश्वर राव ने अपने पत्र में जिन उपायों का उल्लेख किया है, उनमें जरूरत पड़ने पर मेडिकल शिक्षा दिशानिर्देशों में आवश्यक संशोधन शामिल हैं. गैर-मेडिकल संदर्भों में खतने को लेकर वैज्ञानिक और मेडिकल स्थिति स्पष्ट करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाने का सुझाव भी दिया गया है.
अपने जवाब में यादव ने इस मुद्दे को सामने लाने के लिए राव का धन्यवाद करते हुए लिखा, “आंध्र प्रदेश सरकार साक्ष्य आधारित मेडिकल प्रैक्टिस, नैतिक मानकों और सांप्रदायिक सौहार्द के प्रति प्रतिबद्ध है. मैंने आपकी चिंताओं पर ध्यान दिया है और स्वास्थ्य विभाग स्थापित मेडिकल दिशानिर्देशों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार इस मुद्दे की जांच करेगा. उचित समीक्षा के बाद जरूरत पड़ने पर कार्रवाई की जाएगी”.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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