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Sunday, 25 January, 2026
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भारत–न्यूज़ीलैंड FTA वार्ता पूरी, अगले साल साइनिंग. कीवी FM इसके खिलाफ वोट क्यों देने की तैयारी में है

पिछले 4 सालों में यह फाइव-आइज अलायंस के किसी सदस्य के साथ भारत का तीसरा FTA है. यह इस साल नई दिल्ली द्वारा घोषित तीसरा ट्रेड डील भी है, जो UK और ओमान के साथ हुए समझौतों के बाद हुआ है.

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नई दिल्ली: भारत और न्यूज़ीलैंड ने सोमवार को एक मुक्त व्यापार समझौते के लिए हुई बातचीत के पूरा होने की घोषणा की. इस समझौते पर अगले साल की पहली तिमाही में साइन किए जाने की उम्मीद है. हालांकि, न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स, जिनकी पार्टी न्यूज़ीलैंड फर्स्ट सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस व्यापार समझौते के खिलाफ वोट करेगी.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एफटीए पर सहमति बनना “भारत-न्यूज़ीलैंड संबंधों के लिए एक अहम क्षण है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को मजबूत बढ़ावा मिलेगा”.

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “मेरे मित्र प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन और मेरी थोड़ी देर पहले भारत-न्यूज़ीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के पूरा होने के बाद बहुत अच्छी बातचीत हुई”.

उन्होंने कहा कि यह एफटीए बाजार तक बेहतर पहुंच, निवेश के गहरे प्रवाह और नवाचार करने वालों, उद्यमियों, किसानों, एमएसएमई, छात्रों और युवाओं के लिए कई अवसर सुनिश्चित करता है.

एफटीए को लेकर बातचीत इस साल मार्च में शुरू हुई थी और नौ महीनों के भीतर इसे पूरा कर लिया गया. फिलहाल यह अंतिम कानूनी समीक्षा के दौर से गुजर रहा है.

सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि उम्मीद है कि 2026 की पहली तिमाही के अंत से पहले दोनों देश इस समझौते पर साइन कर लेंगे.

यह समझौता 2021 के बाद भारत द्वारा घोषित सातवां व्यापार समझौता है और फाइव आइज़ समूह के किसी देश के साथ तीसरा समझौता है. इससे पहले भारत ने ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम के साथ ऐसे समझौते किए हैं.

इसके अलावा, भारत 2026 की शुरुआत में कनाडा के साथ टर्म्स ऑफ रेफरेंस पर सहमति बनाने की तैयारी में है और फिलहाल अमेरिका के साथ भी एक समझौते पर बातचीत कर रहा है. अगर वाशिंगटन डीसी और ओटावा दोनों के साथ बातचीत पूरी हो जाती है, तो नई दिल्ली के पास फाइव आइज़ गठबंधन के सभी सदस्यों के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते होंगे.

मार्केट एक्सेस

न्यूज़ीलैंड के साथ यह समझौता लागू होने के बाद भारतीय सामानों को 100 प्रतिशत बाजार पहुंच मिलेगी. यह संभव है कि यह 2026 की दूसरी छमाही में लागू हो जाए. इसके बदले भारत न्यूज़ीलैंड से आने वाले सामानों के लिए अपनी लगभग 70.03 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर बाजार पहुंच देगा. साथ ही, समझौते के लागू होने के दसवें साल तक औसत शुल्क घटकर 9.06 प्रतिशत रह जाएगा.

हालांकि, इस समझौते में डेयरी उत्पाद, पशु उत्पाद, वनस्पति उत्पाद, कृत्रिम शहद, हथियार और गोला-बारूद, तांबा और उससे जुड़े उत्पाद, एल्युमिनियम और उससे जुड़े उत्पाद जैसे कई क्षेत्रों को भारतीय बाजार से बाहर रखा गया है.

डेयरी उत्पादों को समझौते से बाहर रखने के फैसले के कारण वेलिंगटन की सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार के सदस्य विंस्टन पीटर्स इस समझौते के खिलाफ सामने आए हैं.

एक्स पर जारी बयान में पीटर्स, जो पहले न्यूज़ीलैंड के उप प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं, ने इस समझौते को “न तो मुक्त और न ही निष्पक्ष” बताया और कहा कि इसमें भारत को बहुत ज्यादा दिया गया है, जबकि बदले में बहुत कम मिला है.

उन्होंने कहा, “न्यूज़ीलैंड फर्स्ट ने अपने गठबंधन साझेदार से कहा था कि भारत के साथ कम गुणवत्ता वाले समझौते को जल्दबाजी में पूरा न किया जाए और इस संसदीय कार्यकाल के पूरे तीन सालों का इस्तेमाल कर सबसे बेहतर सौदा किया जाए. हमने यह भी कहा था कि जब संसद में इस समझौते के लिए बहुमत को लेकर अनिश्चितता हो, तब ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करना समझदारी नहीं होगी”.

पीटर्स ने आगे कहा, “यह समझौता न्यूज़ीलैंड के किसानों के लिए अच्छा नहीं है और ग्रामीण समुदायों के सामने इसका बचाव करना असंभव है. भारत के साथ यह एफटीए न्यूज़ीलैंड का पहला व्यापार समझौता होगा, जिसमें हमारे प्रमुख डेयरी उत्पादों, जैसे दूध, पनीर और मक्खन को बाहर रखा गया है. नवंबर 2025 तक के एक साल में इन उत्पादों का निर्यात करीब 24 अरब डॉलर का था, जो हमारे कुल वस्तु निर्यात का 30 प्रतिशत है”.

नवंबर 2023 से प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के नेतृत्व वाली छठी नेशनल सरकार को 123 सदस्यीय न्यूज़ीलैंड संसद में 13 सीटों का बहुमत हासिल है. पीटर्स की न्यूज़ीलैंड फर्स्ट पार्टी के फिलहाल प्रतिनिधि सभा में आठ सदस्य हैं.

वेलिंगटन के लिए आगे के कदमों में पहले समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होंगे. इसके बाद विदेश मामलों, रक्षा और व्यापार चयन समिति अंतिम समझौते की समीक्षा करेगी और राष्ट्रीय हित का विश्लेषण किया जाएगा. जनता से सुझाव मांगे जाएंगे. इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपेगी.

इसके बाद न्यूज़ीलैंड संसद समझौते को लागू करने के लिए जरूरी कानूनों पर विचार करेगी. पीटर्स ने घोषणा की है कि उनकी न्यूज़ीलैंड फर्स्ट पार्टी सत्तारूढ़ गठबंधन का समर्थन नहीं करेगी.

मुख्य नतीजे

वित्त वर्ष 2024-2025 तक भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2.4 अरब डॉलर है.

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि एफटीए लागू होने के बाद पांच साल के भीतर इस आंकड़े को दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है.

2024 में न्यूज़ीलैंड का कुल वैश्विक व्यापार करीब 89 अरब डॉलर का था. वित्त वर्ष 2024-2025 में न्यूज़ीलैंड के साथ भारत का माल व्यापार 1.298 अरब डॉलर का रहा.

समझौते के तहत, एफटीए लागू होते ही वेलिंगटन 8,284 टैरिफ लाइनों पर सभी शुल्क हटा देगा. फिलहाल न्यूज़ीलैंड को भारतीय निर्यात पर औसत टैरिफ लगभग 2.2 प्रतिशत है, लेकिन कपड़ा, चमड़ा, ऑटोमोबाइल सामान और ऑटो कंपोनेंट्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों को औसतन 10 प्रतिशत टैरिफ देना पड़ता है.

न्यूज़ीलैंड सेवाओं के तहत 118 क्षेत्रों में ज्यादा पहुंच देगा. इसके अलावा, देश में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए वीज़ा समेत कई मोबिलिटी योजनाएं भी पेश की जाएंगी.

न्यूज़ीलैंड तीन साल तक के अस्थायी कार्य वीज़ा चाहने वाले भारतीयों के लिए 5,000 वीज़ा का कोटा भी शुरू करेगा. साथ ही, 1,000 युवा भारतीयों को वर्क हॉलिडे वीज़ा योजना के तहत देश में प्रवेश का मौका मिलेगा.

इसके अलावा, न्यूज़ीलैंड ने अगले 15 वर्षों में भारत में करीब 20 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया है. गोयल ने बताया कि यह निवेश केवल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, यानी एफडीआई, के रास्ते होगा.

इसके बदले भारत 106 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच देगा और 45 अतिरिक्त सेवा क्षेत्रों को मोस्ट फेवर्ड नेशन टैरिफ का लाभ देगा. कृषि क्षेत्र में न्यूज़ीलैंड को कीवीफ्रूट, मनुका शहद, सेब और एल्ब्यूमिन के निर्यात की अनुमति दी जाएगी, जिन पर कम टैरिफ होंगे और हर कृषि उत्पाद के लिए अलग-अलग कोटा तय किया जाएगा.

लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस, चमड़ा और कच्ची खाल जैसे सामानों की करीब 30 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर एफटीए लागू होते ही भारत शुल्क पूरी तरह हटा देगा.

इसके अलावा, पेट्रोलियम उत्पाद, वनस्पति तेल और मैकेनिकल मशीनरी जैसे सामानों को शामिल करने वाली 35.6 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर तय समयावधि में धीरे-धीरे शुल्क समाप्त किया जाएगा. वहीं, डेयरी उत्पाद, भेड़ के मांस को छोड़कर अन्य पशु उत्पाद और वनस्पति उत्पाद समेत 29.97 प्रतिशत सामानों को समझौते से बाहर रखा गया है.

वाइन, दवाइयों, पॉलिमर, एल्युमिनियम और स्टील से जुड़े उत्पादों जैसी वस्तुओं की करीब 4.37 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारत शुल्क में कटौती करेगा. अन्य सहमति वाले दस्तावेजों में “एफटीए की समीक्षा के तहत डेयरी क्षेत्र से जुड़े परामर्श पर साइड लेटर” भी शामिल है.

गोयल ने साफ किया कि एफटीए के तहत डेयरी उत्पादों पर परामर्श तभी शुरू होंगे, जब भारत किसी ऐसे देश के साथ, जिसकी अर्थव्यवस्था का आकार न्यूज़ीलैंड के बराबर हो, किसी अन्य व्यापार समझौते में विदेशी डेयरी उत्पादों को बाजार पहुंच देगा.

उन्होंने कहा, “यह साइड लेटर कोई मायने नहीं रखता क्योंकि भारत अपना डेयरी क्षेत्र नहीं खोलेगा. इसके अलावा, यह पत्र केवल चर्चा की अनुमति देता है और इसमें कोई प्रतिबद्धता नहीं है”.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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