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Saturday, 30 August, 2025
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ट्रंप की अनदेखी? भारत-जापान फैक्टशीट में बाइडेन दौर के खनिज और इंडो-पैसिफिक व्यापार समझौते पर जोर

हाल के महीनों में भारत और अमेरिका के बीच संबंधों में खटास आ गई है. ट्रंप ने भारत की अनुचित व्यापार प्रथाओं और रूसी तेल की निरंतर खरीद के कारण उस पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाया है.

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नई दिल्ली: भारत और जापान ने ऐलान किया है कि अहम खनिजों में उनकी साझेदारी दो बाइडेन-युग के समझौतों—मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप (MSP) और इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF)—पर आधारित है. इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के लिए एक तरह का तंज माना जा सकता है.

“भारत और जापान, मिनरल्स सिक्योरिटी पार्टनरशिप और इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क और क्वाड क्रिटिकल मिनरल्स इनिशिएटिव्स में साझेदारी के जरिए अहम खनिज आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए साथ काम कर रहे हैं,” भारत-जापान संबंधों पर विदेश मंत्रालय ने एक फेक्ट शीट में कहा. इसमें इन दोनों बाइडेन-युग के अंतरराष्ट्रीय ढांचों को खासतौर से उजागर किया गया.

MSP की शुरुआत जून 2022 में हुई थी. इसमें किसी भी देश का स्वागत है जो अहम खनिजों की जिम्मेदार सप्लाई चेन का समर्थन करना चाहता है. ताकि आर्थिक विकास और जलवायु मजबूती को सहारा मिले. MSP में 14 सदस्य देश हैं. इनमें भारत, जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, इटली, नॉर्वे, स्वीडन, यूनाइटेड किंगडम और यूरोपीय संघ (EU) शामिल हैं.

भारत और जापान की यह साझेदारी महामारी के तुरंत बाद बनी. कोविड-19 ने वैश्विक व्यापार में अहम खनिजों से जुड़ी रुकावटों को उजागर किया था और यह भी कि चीन और रूस इन धातुओं के सबसे बड़े रिफाइनर हैं. बीजिंग लिथियम और दूसरे रेयर अर्थ तत्वों की सप्लाई पर हावी है. वहीं, मॉस्को निकल, एल्युमिनियम और प्लैटिनम का निर्यात करता है.

बदलते भू-राजनीतिक हालात ने बाइडेन प्रशासन को ऐसे ढांचे बनाने की ओर धकेला जिनमें समान विचारधारा वाले देश मिलकर सप्लाई चेन में मजबूती ला सकें. भारत 2023 में MSP में शामिल हुआ. इसी तरह, इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क फॉर प्रॉस्पेरिटी (IPEF) की शुरुआत अमेरिका और 12 देशों ने मिलकर मई 2022 में की थी.

यह समूह दुनिया की ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) का कम से कम 40 प्रतिशत हिस्सा रखता है. इस समूह में ऑस्ट्रेलिया, ब्रुनेई दारुस्सलाम, फिजी, भारत, इंडोनेशिया, जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, न्यूज़ीलैंड, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, वियतनाम और अमेरिका शामिल हैं.

सदस्य देश चार हिस्सों पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं—व्यापार, सप्लाई चेन, साफ-सुथरी अर्थव्यवस्था और निष्पक्ष अर्थव्यवस्था. भारत इनमें से एक स्तंभ—व्यापार—का सदस्य नहीं है. आईपीईएफ का उद्देश्य प्रत्येक स्तंभ पर सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना है ताकि आर्थिक लचीलापन बनाया जा सके और इन क्षेत्रों में चीन के दबदबे का मुकाबला किया जा सके.

हालांकि, बाइडेन काल की रूपरेखाएं पिछले नौ महीनों में बदल गई हैं, जब से राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सत्ता संभाली है. ट्रंप प्रशासन की विदेश नीति पहलों में बाइडेन काल के समझौते शायद ही कभी सामने आए हैं.

ट्रंप प्रशासन ने क्वाड में अपनी निरंतर रुचि स्पष्ट की है और जनवरी 2025 से कम से कम दो विदेश मंत्रिस्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं.

पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव आया है. ट्रंप ने भारत पर अनुचित व्यापार प्रथाओं और रूसी तेल की खरीद जारी रखने के लिए 50 प्रतिशत का शुल्क लगाया है. इसी तरह, ट्रंप ने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को दोबारा आकार देने की कोशिश की है, जिसने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जापान की तेज़ी से रिकवरी में मदद की थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)


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