लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय साइबर फॉरेंसिक समिट का उद्घाटन किया और प्रदेश के 75 जिलों के लिए 75 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. इस दौरान उन्होंने एडवांस्ड डीएनए डायग्नोस्टिक्स लैब, एआई और रोबोटिक्स लैब तथा अटल लाइब्रेरी का भी उद्घाटन किया.
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में फॉरेंसिक ढांचे के व्यापक विस्तार पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा, “2017 से पहले प्रदेश में केवल 4 फॉरेंसिक लैब थीं. आज हमारे पास 12 फॉरेंसिक लैब तैयार हैं और 6 निर्माणाधीन हैं. जुलाई 2024 से बीएनएस लागू होने के बाद हमने यह अनिवार्य कर दिया है कि सात साल से अधिक पुराने अपराधों में फॉरेंसिक सबूत लेना जरूरी होगा. इसी को सुनिश्चित करने के लिए हम 75 जिलों के लिए 75 मोबाइल फॉरेंसिक वैन को रवाना कर रहे हैं.”
सीएम योगी ने कहा कि प्रदेश साइबर क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. उन्होंने बताया, “हम राज्य में एक साइबर मुख्यालय बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमने साइबर वॉरफेयर का अनुभव किया. इसी कड़ी में आज हमने एडवांस्ड डीएनए डायग्नोस्टिक्स लैब, एआई और रोबोटिक्स टेक्नोलॉजी लैब और अटल लाइब्रेरी का शुभारंभ किया है. हमें आने वाली चुनौतियों के अनुरूप तैयारी करनी होगी.”
उन्होंने यूपी पुलिस की त्वरित कार्रवाई और बदलते समय के साथ तालमेल की सराहना भी की. सीएम ने कहा, “आज अपराध होने के 24 से 48 घंटे के भीतर अपराधी पकड़े जा रहे हैं. यूपी पुलिस ने यह उपलब्धि हासिल की है. आज अपराधियों के दिल में कानून का भय है और अपराध के प्रति हमारी जीरो टॉलरेंस नीति स्पष्ट दिख रही है.”
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि जिस ज़मीन पर यह संस्थान बना है, कभी उस पर भूमाफिया का कब्ज़ा था. उन्होंने कहा, “फाइल की समीक्षा के दौरान जिसने जमीन पर कब्ज़ा किया था, वह खुद आकर जमीन लौटाने की पेशकश करने लगा. मैंने साफ कहा कि यह कोई एहसान नहीं है, उसे जमीन यूपी पुलिस को लौटानी ही होगी.”