scorecardresearch
Thursday, 19 March, 2026
होमरिपोर्टसज़ा दिलाने में भी रिकार्ड बना रहा बिहार! 6 महीने में 64 हज़ार से ज्यादा को सज़ा

सज़ा दिलाने में भी रिकार्ड बना रहा बिहार! 6 महीने में 64 हज़ार से ज्यादा को सज़ा

बिहार पुलिस की ओर से 64 हजार से ज्यादा सजा शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों में दिलवाई गई. यह संख्या कुल मामलों में 89% है.

Text Size:

पटना: बिहार पुलिस अब सिर्फ अपराधियों को पकड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाकर सजा दिलाने में भी देश में मिसाल कायम कर रही है. जनवरी से जून 2025 के बीच 64,098 आरोपियों को सजा दिलाई गई. इनमें 3 को मौत की सजा, 601 को उम्रकैद और 307 को 10 साल से ज्यादा की सजा सुनाई गई.

सबसे खास बात यह है कि सिर्फ 6 महीने में 56,897 आरोपियों को शराबबंदी कानून में जेल भेजा गया.

राज्यभर में हत्या के मामलों में 611 आरोपियों को दोषी करार दिया गया। इनमें मधुबनी के 2 और कटिहार के 1 आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई. उम्रकैद पाने वालों में पटना सबसे आगे रहा, जहां 35 लोगों पर दोष सिद्ध हुआ. इसके बाद छपरा में 34, मधेपुरा में 33, शेखपुरा में 32 और बेगूसराय में 31 लोगों को उम्रकैद की सजा हुई.

डीजीपी विनय कुमार ने जानकारी दी कि हत्या, आर्म्स एक्ट और अन्य संगीन अपराधों में गवाहों को समय पर कोर्ट में पेश कराने पर विशेष फोकस किया जा रहा है. इसके लिए ऑनलाइन माध्यम भी अपनाया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल वाले मामलों में केस लंबा न चले, यही हमारी प्राथमिकता है. पुलिस मुख्यालय लगातार केसों की सख्त मॉनिटरिंग कर रहा है ताकि गवाहों की 100% उपस्थिति सुनिश्चित हो सके. यही वजह है कि बिहार पुलिस अपराधियों को सजा दिलाने में सफल हो रही है.

10 साल से ज्यादा की सजा पाने वालों में भोजपुर सबसे ऊपर, आर्म्स एक्ट: 231 आरोपी, रेप मामले: 122 आरोपी, मादक पदार्थ तस्करी: 284 आरोपी, पॉक्सो एक्ट: 154 आरोपी, एससी-एसटी एक्ट: 151 आरोपी.

बिहार पुलिस की ओर से 64 हजार से ज्यादा सजा शराबबंदी कानून से जुड़े मामलों में दिलवाई गई. यह संख्या कुल मामलों में 89% है. शराब के सबसे ज्यादा मामले मोतिहारी, गया, पटना, भोजपुर, छपरा, नालंदा, बक्सर, औरंगाबाद, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, गोपालगंज, सीवान और सुपौल से सामने आए.

डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि पुलिस विभाग उन लोगों पर भी कार्रवाई कर रहा है, जो गवाही के वक्त कोर्ट पहुंचने में देरी करते हैं या तारीख पर नहीं पहुंचते. ऐसे लापरवाह इंवेस्टिगेशन ऑफिसर, थाना प्रभारी, गवाह और डॉक्टर जो बहाने बनाकर सुनवाई के दौरान कोर्ट में हाजिर नहीं होते, उन पर भी सख्त कार्रवाई की जा रही है. यही वो कारण हैं जिनसे सजाओं की रफ्तार तेज हुई है.

share & View comments