50 Words
दिप्रिंट का 50 शब्दों में सबसे तेज़ नज़रिया
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327 ईसा पूर्व में सिकंदर के इतिहासकारों को भारतीयों के बारे में जिस बात ने चौंकाया था वह आज साल 2021 में सही दिख रहा है. जो मुझे सीधे-सीधे प्रभावित नहीं करता उसके प्रति उदासीनता का भाव. जब सेना लड़ रही थी तो पास में ही रह रहे किसान अपने खेतों में शांत भाव से हल चला रहे थे. जिस तरह से चुनाव से लेकर कुंभ और किसान आंदोलन कोविड महामारी के बावजूद चल रहे हैं.

अच्छी पत्रकारिता मायने रखती है, संकटकाल में तो और भी अधिक

क्यों न्यूज़ मीडिया संकट में है और कैसे आप इसे संभाल सकते हैं

आप ये इसलिए पढ़ रहे हैं क्योंकि आप अच्छी, समझदार और निष्पक्ष पत्रकारिता की कद्र करते हैं. इस विश्वास के लिए हमारा शुक्रिया.

आप ये भी जानते हैं कि न्यूज़ मीडिया के सामने एक अभूतपूर्व संकट आ खड़ा हुआ है. आप मीडिया में भारी सैलेरी कट और छटनी की खबरों से भी वाकिफ होंगे. मीडिया के चरमराने के पीछे कई कारण हैं. पर एक बड़ा कारण ये है कि अच्छे पाठक बढ़िया पत्रकारिता की ठीक कीमत नहीं समझ रहे हैं.

हमारे न्यूज़ रूम में योग्य रिपोर्टरों की कमी नहीं है. देश की एक सबसे अच्छी एडिटिंग और फैक्ट चैकिंग टीम हमारे पास है, साथ ही नामचीन न्यूज़ फोटोग्राफर और वीडियो पत्रकारों की टीम है. हमारी कोशिश है कि हम भारत के सबसे उम्दा न्यूज़ प्लेटफॉर्म बनाएं. हम इस कोशिश में पुरज़ोर लगे हैं.

दिप्रिंट अच्छे पत्रकारों में विश्वास करता है. उनकी मेहनत का सही वेतन देता है. और आपने देखा होगा कि हम अपने पत्रकारों को कहानी तक पहुंचाने में जितना बन पड़े खर्च करने से नहीं हिचकते. इस सब पर बड़ा खर्च आता है. हमारे लिए इस अच्छी क्वॉलिटी की पत्रकारिता को जारी रखने का एक ही ज़रिया है– आप जैसे प्रबुद्ध पाठक इसे पढ़ने के लिए थोड़ा सा दिल खोलें और मामूली सा बटुआ भी.

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शेखर गुप्ता

संस्थापक और एडिटर-इन-चीफ

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