Monday, 8 August, 2022
होम50 शब्दों में मतआइए प्रतिस्पर्धी सांप्रदायिक घृणा के जरिए हत्यारों को पालना बंद करें

आइए प्रतिस्पर्धी सांप्रदायिक घृणा के जरिए हत्यारों को पालना बंद करें

दिप्रिंट का 50 शब्दों में सबसे तेज़ नज़रिया.

Text Size:

कमलेश तिवारी, मल्लेशप्पा कलबुर्गी और अब कन्हैया लाल: कट्टरता और धर्मांधता ने बहुत से लोगों की अब तक जान ले ली है. एक सदी से भी अधिक समय से, घरेलू हत्यारों को प्रतिस्पर्धात्मक सांप्रदायिक घृणा द्वारा पाला गया है. वक्त आ गया है कि इस तरह के अपराधों को भारतीय निंदा करें और आत्मनिरीक्षण से पीछे हटना चाहिए.

share & View comments