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अब समझ आ गया है कि मोदी सरकार के समर्थकों की लड़ाई औरतों से है

जेएनयू में फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जाने के बाद सरकार के कथित समर्थक बौखला गए. उन्हें सोशल मीडिया पर गालियां देनी शुरू कर दी.

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जेएनयू में नकाबपोशों के हमले के शिकार जेएनयू के छात्रों के समर्थन में जेएनयू पहुंची अभिनेत्री दीपिका पादुकोण, फाइल फोटो.

देश में चल रहे माहौल को देखकर लग रहा है कि सरकार के समर्थकों की लड़ाई सबसे ज्यादा औरतों से है. जेएनयू में फिल्म अभिनेत्री दीपिका पादुकोण के जाने के बाद सरकार के कथित समर्थक बौखला गए. दीपिका ने कोई वक्तव्य नहीं दिया पर उनका सिर पर पट्टी बांधे जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशी घोष से मिलना किसी टाइम बम की तरह फूटा. सोशल मीडिया पर दीपिका के लिए सिर्फ गालियां इस्तेमाल की गईं. चरित्र हनन के लिए सबसे बड़े हथियार के रूप में उनके पूर्व प्रेमियों की लिस्ट को इस्तेमाल किया गया.

जब हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका कृष्णा सोबती एक इंटरव्यू के दौरान प्रेम संबंध के सवाल को लेकर कह सकती हैं कि मेरे इतने बुरे दिन कभी नहीं रहे कि मेरा सिर्फ एक प्रेम संबंध हो. तो सरकार के समर्थकों को ये जान जाना चाहिए कि 21वीं शताब्दी की औरत ना सिर्फ हाजिरजवाबी है बल्कि अपनी राजनैतिक और आर्थिक ताकत को भी पहचानती है. वो अपने दम पर जमाने को बदलने का माद्दा रखती है. वो किसी विचारधारा के पक्ष और विपक्ष में बोलने से नहीं कतराएगी.

समर्थक ये भी नहीं समझ पाए कि दीपिका का शांत भाव से खड़े रहना प्राचीन वक्त के किसी महान योद्धा की तरह का व्यवहार था जो चुपचाप खड़े रहकर अपनी ताकत को बस महसूस कराता है. इसके जवाब में समर्थकों ने सोशल मीडिया पर सिर्फ गालियां दीं. पर क्या एक औरत गाली से डर जाएगी?

औरतों की बदलती राजनीतिक चेतना को समझने की जरूरत है. कुछ वर्ष पहले तक मांएं और दादियां राजनैतिक प्रतीक के रूप में सिर्फ इंदिरा गांधी का नाम लेती थीं. ऐसा नहीं था कि पहले की राजनीति में महिलाएं नहीं आई थीं, पर सामान्य महिलाएं इस तरीके से राजनीतिक में नहीं थीं जैसी अब हैं. सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के बाद देखा गया है कि भारत की औरतों ने हर स्तर पर अपना विचार खुलकर जताए हैं. चाहे वो व्यापार क्षेत्र की सिरमौर किरण मजूमदार शॉ हों, या फिल्म अभिनेत्रियां स्वरा भास्कर, ऋचा चड्ढा, तापसी पन्नू, परिणिति चोपड़ा, चित्रांगदा सिंह, दीपिका पादुकोण, सोनाक्षी सिन्हा या इंस्टा स्टार हों या सड़कों पर झंडे फहराती लड़कियां हों या फिर शाहीनबाग की औरतें हों, सबने अपना विरोध खुलकर जताया है. ये हर तबके, हर जाति-धर्म की लड़कियां हैं. देश में हो रही हिंसा से ये औरतें नाखुश हैं और अब राजनीतिक पार्टियों को चेत जाने की जरूरत है.

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ऐसा पहली बार हो रहा है कि भारत की औरतें किसी महिला या नारीवादी पुरुष का इंतजार नहीं कर रही हैं कि वो इनका नेतृत्व करें. ये सारी लड़कियां अपने क्षेत्र में नेता हैं और इन्हें अपनी ताकत पता है. एक फिल्म अभिनेत्री ने तो साफ-साफ कहा कि ज्यादा ताकत के साथ ज्यादा जिम्मेदारी आती है. ये लड़कियां अपनी आर्थिक सफलता से देश में योगदान कर रही हैं, यही नहीं ये अपनी राजनैतिक चेतना से देश के युवाओं को प्रेरित भी कर रही हैं.

पिछले पांच वर्षों में सोशल मीडिया पर सत्ताधारी पार्टी के समर्थन में एक नया वर्ग उभरा. ये वर्ग विपक्ष में उठने वाली हर आवाज को गाली से काउंटर करता है. गालियां हैं तो जाहिर सी बात है कि औरतों के खिलाफ ही होंगी. अगर उनका टारगेट कोई पुरुष है फिर भी गालियां उसके खानदान की औरतों को ही दी जाएंगी. पर इसी वक्त में एक और वर्ग उभरा- महिलाओं का. घरों में रहने वाली महिलाएं जिनकी राजनीतिक बातें सुनने के लिए कोई नहीं था, उनको सोशल मीडिया पर स्पेस मिला. उन्हें सरकार की नीतियां अच्छी नहीं लगीं तो उन्होंने खुलकर बोला. सरकार के समर्थकों के पास एक ही तरीका था- गालियां. उन्होंने इन औरतों को जी भरकर गालियां दीं. उन्हें लगा कि ये औरतें चुप हो जाएंगी.

पर जिस अंग से पूरी सृष्टि पैदा हुई है, उसी अंग को गाली देकर पुरुष क्या साबित करना चाहते हैं? भारत माता की जय और ‘यत्र नार्यस्तु पूजयंते’ का फ्रॉड सबके सामने है. ये साबित हो चुका है कि पुरुषों के पास औरतों से बात तक करने का सामर्थ्य नहीं है. जिस तरीके से इन सुखद नारों-श्लोकों को दुहराकर वो कुंठा को छुपाते हैं उसी तरह सरकारी पॉलिसी ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसी चीजों का नारा बनाकर अपना नया हथियार बना लिया है. इन अच्छी बातों की आड़ में जितनी भद्दी गालियां औरतों को दी जा रही हैं, उसकी मुआफी नहीं है.

सिंहासन खाली करो कि औरतें आती हैं. ये औरतें गठरी में कपड़ा लपेटकर रास्ता पूछने वाली मजबूर नहीं, अपनी ताकत समझने वाली औरतें हैं. आपकी राजनीति पुराने सड़ चुके पैट्रियार्कल माइंडसेट की है. इन औरतों की राजनीति भविष्योन्मुखी है. तुम्हें समझना चाहिए कि फिनलैंड में 34 साल की लड़की पीएम बनी है और दुनिया में पहली बार हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी लेकर आई है. फिनलैंड की शिक्षा व्यवस्था को ही हर देश में कॉपी करने की बात चल रही है ना?

धीरे-धीरे हर व्यवस्था कॉपी होगी. सारे ताज उछाले जाएंगे, सारे तख्त उछाले जाएंगे. क्योंकि लड़कियों की लहराती जुल्फों के लिए ताज-तख्त नहीं चाहिए, उनके चेहरे का गुरूर ही सत्ता का ताज है.

8 टिप्पणी

  1. Jb ye khud tod-fod krte h tb kyon nhi kisi ne inko samjhaya jb new registration ke liye aye students ko inhone mar-mar ke bhagaya tb koi Kyun nhi bola inke khilaf jb professor ko class lene nhi de rhe the ye jnu students tb kyon nhi kisi ki juban inke khilaf kuchh bhi bol pane me asmarth thi jb dipika ke wahi mojud rahte aajadi mang rhe the tb dipika ne inko Kyun nahi roka

  2. वाह क्या खूब लिखा है ज्योति यादव जी आपने आपका नारी होना ही बहुत सम्माननीय व्यक्तित्व है।

  3. Besharm DelhiPolice
    Kuchh to sharm karo.
    AishiGhoshh khud marte marte bachi hai usi ko target kr rhe ho. Shameful .
    Jis nakara BJP Govt ke ishare pr tum ye kr rhe ho. Vo ab jyada dinn tk chalne wali Govt. nhi hai. Ab voters samajh gaye jain. Chhattisharh Maharashtra ka haal dekh lo…….
    Anyayi sarkar ka ant jaldi aur bahut bura hoga….

  4. तुम्हारे नाम से ही पता चल गया बौखलाहट का ।

    अब वो जमाना नहीं रहा, ज़हां कलाकार, पत्रकार जो जी चाहे वो करे और लोग उसे सिर पर बिठाकर रखें।

  5. समर्थन करना अपनी व्यक्तिगत राय है उस पर एतराज करना या ओछी भाषा का इस्तेमाल ठीक नही । रही बात दीपिका की तो मेरे खयाल मैं लोगों का मनोरंजन कर अपनी आजीविका चलाने वाले कलाकारों को सेलेब्रेटी की उपमा देना कदापि न्यायोचित नही कहा जा सकता । इनका समाज के लिए कोई योगदान नही है ।ना ही तो ये मंजे हुए कलाकार होते है ये तो पर्दे की कठपुतलियां हिती है जिन्हें निर्देशक अपने निर्देशन मैं नचाता है ओर ये सिर्फ पैसों के लिए थिरकते है , ये बिचारे तो पूर्ण कलाकार भी नही होते हैं इसीलिए ये नाटक मैं भाग नही लेते है।

  6. Mahilaon or Bacho ki aad lekar dange fasad karwana or agjani karwana ye samaz se pre hai jo Congress or left ki atankwadi or tukde gang soch ka samartan na kre wo modi samartak or bhakt ho gye yahi aap logo ki giri hue soch hai

  7. Aurto ki baat krte ho aapko sobha nahi deta jab teen tlak kanoon laya gya tha tab yahi Congress, sapa, rjd jase dal is kanoon ka virodh kar rhe the tab kha thi dipika padukon or unke jase log tab kyun nahi kiya in dalo k virodh main andolan kyunki bill modi sarkar layi. Tab unke manavdhikaro ki raksha k liye ye actor or samazwadi kaun se bill main chup gye the tab kyun inke muh se ek sabad bhi nahi nikla

  8. छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशी घोष k sir par 24 tanke ate hai or agle hi din wo pahunch jati hai protest krne or uske sath hote hai desvirodhi nare lgane wale Khanaiya or actress Dipika padukon. Nare lgte hai azadi k
    Ye kasa protests hai or dipika khade khade sunti rhti hai are sarm ani chaiye aap sab ko drame ki bhi had hoti hai
    Is trha logo ko gumrha krte hue sram ani chaiye aap logo ko

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