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छात्र अब एक साथ कर सकेंगे दो डिग्रियां, UGC ने दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप दिया

UGC बहुत समय से इस क़दम को उठाने पर विचार कर रही थी, और उसे 2020 में इसके लिए हरी झंडी मिल गई थी. दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देकर, UGC अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने मंगलवार को उन्हें अधिकारिक कर दिया.

यूजीसी के चेयरमैन एम जगदीश कुमार की फाइल फोटो | पीटीआई.

नई दिल्ली: शैक्षणिक सत्र 2022-23 से छात्र एक साथ दो डिग्री कोर्स कर पाएंगे- ये ऐलान मंगलवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने किया.

UGC बहुत समय से इस क़दम को उठाने पर विचार कर रही थी, लेकिन जैसा कि दिप्रिंट ने ख़बर दी, उसे इसके लिए हरी झंडी 2020 में मिल गई थी. दिशा-निर्देशों को अंतिम रूप देकर मंगलवार को आधिकारिक कर दिया गया.

इस प्रोग्राम के तहत छात्रों को दो अंडरग्रेजुएट डिग्रियां, दो पोस्टग्रेजुएट डिग्रियां या दो डिप्लोमा प्रोग्राम साथ-साथ करने की अनुमति होगी. कुमार ने बताया कि दो डिग्रियां फिज़िकल क्लासरूम मोड, एक ऑनलाइन और एक ऑफलाइन मोड, या दोनों ऑनलाइन मोड- किसी में भी पूरी की जा सकती हैं.

आगे से दोनों डिग्रियां केवल ग़ैर-तकनीकी कार्यक्रम होंगी, जिन्हें यूजीसी की स्वीकृति होगी. इनमें अलग अलग धाराओं यानी ह्यूमैनिटीज़, विज्ञान कथा कॉमर्स के विषयों का मिश्रण हो सकता है, और इनमें दाख़िला छात्र की योग्यता और कार्यक्रमों की उपलब्धता के आधार पर दिया जाएगा. कुमार ने समझाया कि तकनीकी और ग़ैर-तकनीकी कार्यक्रमों को मिलाना मुश्किल होगा, इसलिए फिलहाल के लिए आयोग उससे बच रहा है.

जेएनयू के पूर्व वाइस-चांसलर ने, जो हाल ही में यूजीसी अध्यक्ष बने हैं, कहा, ‘एक छात्र बीकॉम और गणित की डिग्री एक साथ कर पाएगा, अगर उसकी इच्छा हो और अगर वो ऐसा करने का पात्र हो. विचार ये है कि छात्रों को जितना संभव हो सके, उतना लचीलापन उपलब्ध कराया जाए’.

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यूजीसी बुधवार तक अधिकारिक दिशा-निर्देश जारी कर देगा, और उन्हें विभिन्न संस्थानों तथा वैधानिक निकायों को भी उपलब्ध करा देगा.

‘गाइडलाइन्स को अपनाना अनिवार्य नहीं’

जगदीश कुमार ने ये भी बताया कि किसी भी विश्वविद्यालय अथवा परिषद के लिए, इन दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य नहीं है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि ज़्यादा से ज़्यादा संस्थान, छात्रों को एक साथ दो डिग्रियां करने की अनुमति दे देंगे.

उन्होंने ये भी कहा कि एक बार जब संस्थानों और वैधानिक निकायों को गाइडलाइन्स भेज दी जाएंगी, तो जो तरीक़ा उन्हें सही लगे उससे वो इन्हें अपनाने के लिए स्वतंत्र होंगे. उन्होंने समझाया, ‘प्रवेश और परीक्षाओं की प्रक्रिया और पात्रता, संबंधित संस्थानों द्वारा तय की जाएगी. अगर किसी विश्वविद्यालय में छात्रों को सीयूईटी (कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट) में बैठने की ज़रूरत है, तो उन्हें ऐसा करना होगा. अगर वो किसी ऐसे दूसरे संस्थान को देख रहे हैं, जिसमें ऐसा टेस्ट नहीं है, तो उन्हें उस संस्थान विशेष की दाख़िला प्रक्रिया का पालन करना होगा’.

उन्होंने ये भी कहा कि कार्यक्रमों के लिए हाज़िरी की आवश्यकता, संबंधित कॉलेजों और संस्थानों द्वारा तय की जाएगी.

(इस ख़बर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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